Ghaziabad Bharat City Suicide Case| 3 Sisters Suicide Ghaziabad| Ghaziabad News| गाजियाबाद समाचार

Share to your loved once


Ghaziabad News: ‘भारत सिटी’ सोसाइटी की 9वीं मंजिल से जब तीन नाबालिग बहनों ने मौत की छलांग लगाई, तो लगा कि शायद यह सिर्फ ‘कोरियन कल्चर’ के प्रति उनके जुनून का नतीजा था. लेकिन पुलिस की हालिया जांच ने इस कहानी में एक गहरा और काला अध्याय जोड़ दिया है ‘कंगाली’. जिस घर की बेटियां सात समंदर पार कोरिया जाने के सपने देख रही थीं, उस घर के मुखिया के बैंक खाते में महज 39 पैसे बचे थे. दरअसल, पुलिस जांच में सामने आया है कि पिछले दो साल से यह परिवार दाने-दाने को मोहताज था और पिता कर्ज के जाल में पूरी तरह फंस चुका था.

पुलिस ने छह बैंक खातों को खंगाला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 9वीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली तीनों बहनों के पिता चेतन और उसकी पत्नियों की पुलिस को बैंक खातों की डिटेल मिल गई है. इन बैंक खातों में हजारों पन्नों के लेन-देन दर्ज हैं, जिसकी पुलिस ने गहन छानबीन शुरू कर दी है. टीला मोड़ थाना पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए पिता चेतन और उसकी पत्नियों के कुल छह बैंक खातों को खंगाला. इन खातों की स्थिति देखकर पुलिस भी हैरान रह गई.

बैंक खातों ने खोली तंगहाली की पोल
जांच के मुताबिक, चेतन के बैंक ऑफ बड़ौदा के डीमैट खाते में 37,000 रुपये मिले, जिसमें से 30,000 रुपये मिनिमम बैलेंस के तौर पर रखना अनिवार्य है. यानी खर्च के लिए सिर्फ 7 हजार रुपये ही उपलब्ध थे. पत्नी हिना के कोटक महिंद्रा बैंक के खाते में सिर्फ 39 पैसे मिले. वहीं, सुजाता के नाम पर मौजूद कोटक महिंद्रा और एचडीएफसी के खाते काफी समय पहले ही बंद हो चुके थे. आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि पिछले दो सालों से इन खातों में कोई बड़ा ट्रांजैक्शन नहीं हुआ, जो परिवार की टूटती आर्थिक कमर का सीधा सबूत है.

करोड़ों का कारोबार और फिर अर्श से फर्श तक का सफर
जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी आया कि साल 2007 के आसपास चेतन के खातों में करोड़ों रुपयों का लेन-देन होता था. वह प्रॉपर्टी डीलिंग और वाहनों की खरीद-फरोख्त के बड़े कारोबार से जुड़ा था. लेकिन वक्त बदला और धीरे-धीरे उसके सारे काम बंद हो गए. वर्तमान में वह केवल एक ब्रोकर के जरिए शेयर ट्रेडिंग कर रहा था, जिससे घर चलाना भी मुश्किल था.

10 लोन और उधारी की जिंदगी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, चेतन ने 2016 से अब तक क्रेडिट कार्ड और विभिन्न बैंकों से 10 अलग-अलग लोन लिए थे. इनमें से अधिकांश लोन 2 से 3 लाख रुपये के थे. हालांकि वह किसी तरह इन लोन्स की किस्तें चुका रहा था, लेकिन बोझ इतना बढ़ गया था कि वह अपने भाई विष्णु से हर महीने घर खर्च के लिए पैसे मांगता था. रिश्तेदारों और परिचितों से उधार मांगना उसकी मजबूरी बन चुकी थी.

क्या फोन बेचना बना सुसाइड की वजह?
लड़कियों के पास मौजूद सुसाइड नोट में कोरियन गेम्स और वहां जाने की जिद का जिक्र था. पिता की माली हालत इतनी खराब थी कि उन्होंने बेटियों के दो मोबाइल फोन तक बेच दिए थे. एक तरफ विदेश जाने के महंगे सपने और दूसरी तरफ हाथ में फोन तक न होना, शायद इसी विरोधाभास ने 12 से 16 साल की उन मासूमों को इस आत्मघाती कदम की ओर धकेल दिया.

पुलिस की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार
गाजियाबाद पुलिस अब इस मामले को अंतिम रूप देने में जुटी है. पुलिस इस बात का विश्लेषण कर रही है कि क्या पिता की आर्थिक तंगी और बेटियों की मांगों के बीच होने वाले रोज के झगड़ों ने उन्हें अवसाद में डाल दिया था? फिलहाल, 9वीं मंजिल से गिरी उन तीन जिंदगियों की कहानी अब ‘गरीबी’ और ‘महंगे सपनों’ के बीच एक सबक बनकर रह गई है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP