Wheat farming : फरवरी में गेहूं किसान भूलकर भी न करें ये गलती, इस वक्त सिंचाई कितनी जरूरी, जानें सबकुछ

Share to your loved once


होमफोटोकृषि

फरवरी में गेहूं किसान भूलकर भी न करें ये गलती, सिंचाई कितनी जरूरी, जानें सबकुछ

Last Updated:

Wheat farming tips : फरवरी का महीना गेहूं किसानों के लिए सावधानी बरतने वाला होता है. बदलते तापमान के बीच खेतों में लगी फसलों पर कई तरह के रोगों का खतरा बढ़ जाता है. पौधों से लेकर पत्तियां तक में इनका असर देखने को मिलता है. इससे उत्पादन घट सकता है. ऐसे में किसानों को कुछ जरूरी उपाय जरूर करने चाहिए. लोकल 18 ने इस बारे में आजमगढ़ के कृषि विशेषज्ञ डॉ. विजय विमल से बात की. वे बताते हैं कि अगर फरवरी में मौसम सामान्य से अधिक गर्म होता है और बारिश कम होती है तो गेहूं के समय से पहले पकाने का खतरा बढ़ जाता है.

यूपी में किसानों बड़े पैमाने पर गेहूं की खेती करते हैं. कई किसान व्यावसायिक रूप से भी गेहूं उगाते हैं. कम लागत और कम देखभाल की वजह से गेहूं किसानों के लिए मुनाफे वाली फसल रही है. यही वजह है कि ज्यादातर किसान गेहूं की खेती जरूर करते हैं. इन दिनों मौसम में तेजी से परिवर्तन हो रहा है. गेहूं किसानों के लिए ये मौसम सावधान रहने का है.

फरवरी का महीना गेहूं की फसल के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है. इस मौसम में अधिकांश क्षेत्रों में या तो गेहूं की फसल में बलियां निकल रही होती हैं या फिर दाना भरने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. ऐसे में किसानों को इस दौरान फसल की देखरेख पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है.

लोकल 18 से बात करते हुए आजमगढ़ के कृषि विशेषज्ञ डॉ. विजय विमल बताते हैं कि यदि फरवरी के महीने मौसम में सामान्य से अधिक गर्म होता है और बारिश कम होती है तो ऐसी स्थिति में गेहूं की फसल समय से पहले पकाने का खतरा बढ़ जाता है. इससे बलियों में दाने ठीक तरह से नहीं बन पाते हैं और छोटे व हल्के रह जाते हैं.

Add News18 as
Preferred Source on Google

इस समस्या के कारण फसल का उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से नुकसान भी झेलना पड़ सकता है. गेहूं के दाने छोटे होने से मार्केट में उनकी डिमांड कम होती है. किसानों को गेहूं बेचने में भी दिक्कत आती है.

इस स्थिति से बचने के लिए किसानों को समय पर फसलों की सुरक्षा के लिए कुछ विशेष इंतजाम करने की जरूरत है, जिससे उनकी फसल को मौसम में हो रहे परिवर्तन के कारण नुकसान न पहुंचे. फरवरी के महीने में यदि मौसम में तापमान सामान्य से अधिक होने लगे और हवा तेज चलने लगे तो इस स्थिति में किसानों को खेत में अधिक सिंचाई नहीं करनी चाहिए.

किसान चाहें तो स्प्रिंकलर या फवारा तकनीक से खेतों में हल्की सिंचाई कर सकते हैं. इससे फसल सुरक्षित रहती है और अधिक तापमान को भी नियंत्रित करने में मदद मिलती है. किसानों को सिंचाई करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि सिंचाई शाम के समय या ऐसे समय करें जब हवा कम हो या धीरे चल रही हो.

कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक, फरवरी के महीने में की गई देखरेख से ही मार्च और अप्रैल में गेहूं की अच्छी पैदावार मिलती है. किसानों को फसल की नियमित निगरानी, संतुलित खाद और समय पर सही सिंचाई करने जरूर करनी चाहिए.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP