केरल की सबसे कम उम्र की ऑर्गन डोनर एलिन शेरिन अब्राहम की प्रेरक कहानी.
तिरुवनंतपुरम: नियति का क्रूर खेल देखिए, जिस उम्र में नन्हे कदम चलना सीखते हैं, उस उम्र में 10 महीने की मासूम एलिन शेरिन अब्राहम मौत की आगोश में सो गई. लेकिन श्मशान की राख बनने से पहले इस नन्ही परी ने वो कर दिखाया जो बड़े-बड़े सूरमा नहीं कर पाते. एक भीषण सड़क हादसे ने एलिन को ब्रेन डेड बना दिया, पर उसके माता-पिता ने अपने कलेजे के टुकड़े को विदा करने से पहले उसकी सांसों को दूसरों में बांटने का साहसी फैसला किया. केरल के इतिहास में सबसे कम उम्र की ऑर्गन डोनर बनकर एलिन ने साबित कर दिया कि इंसानियत की उम्र नहीं, उसका जज्बा मायने रखता है.
दर्द पर भारी पड़ी इंसानियत
पठानमथिट्टा की रहने वाली एलिन शेरिन अब्राहम के माता-पिता पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब डॉक्टरों ने उनकी लाडली को बचाने से हाथ खड़े कर दिए. लेकिन इस असीम निजी पीड़ा के बीच उन्होंने समाज को वो रास्ता दिखाया जिसकी आज सख्त जरूरत है. शुक्रवार को एलिन के अंग दान करने की प्रक्रिया पूरी की गई. बच्ची की किडनी, लिवर और हार्ट वाल्व ने उन परिवारों में उजाला कर दिया है जो बरसों से किसी चमत्कार की उम्मीद में थे. उसकी किडनी तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज में एक 10 वर्षीय बच्चे को नई जिंदगी देगी.
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने इस महान त्याग को सलाम करते हुए इसे मानवता की सबसे बड़ी मिसाल करार दिया है. उन्होंने कहा कि जब एक परिवार अपनी सबसे कीमती चीज खो देता है, तब दूसरों की जान बचाने का फैसला लेना किसी चमत्कार से कम नहीं है. एलिन अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी धड़कनें और उसकी यादें उन चेहरों पर मुस्कान बनकर जिंदा रहेंगी, जिन्हें उसने नया जीवनदान दिया है.
सवाल-जवाब
एलिन शेरिन अब्राहम के साथ क्या दुखद हादसा हुआ था?
10 महीने की मासूम एलिन एक भीषण सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया था.
एलिन ने केरल के इतिहास में कौन सा रिकॉर्ड बनाया है?
वह केरल राज्य की सबसे कम उम्र की ‘ऑर्गन डोनर’ (अंग दाता) बन गई है.
एलिन के कौन-कौन से अंग दान किए गए हैं?
एलिन की दोनों किडनी, लिवर और हार्ट वाल्व दान किए गए हैं, जिनसे कई लोगों की जान बचाई जा सकेगी.
दान की गई किडनी का इस्तेमाल किसे जीवनदान देने में होगा?
उसकी किडनी तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज के एस.ए.टी. अस्पताल में भर्ती एक 10 साल के बीमार बच्चे को ट्रांसप्लांट की जा रही है.
स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने इस परिवार के बारे में क्या कहा?
उन्होंने इसे ‘अनोखा और हिम्मत भरा काम’ बताते हुए कहा कि माता-पिता ने अपने निजी दर्द को दूसरों के लिए उम्मीद की किरण में बदल दिया है.