‘समझौते से सुलझाएं’, गाने ‘वीरा राजा वीरा’ पर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट की एआर रहमान को सलाह

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सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म ‘पोन्नियिन सेलवन II’ के गाने ‘वीरा राजा वीरा’ को लेकर एआर रहमान और ध्रुपद गायक फैयाज वसीफुद्दीन डागर के बीच चल रहे विवाद में समझौते की सलाह दी है. कोर्ट ने कहा कि यह केवल कानूनी अधिकारों का नहीं, बल्कि ‘डागरवाणी’ परंपरा और शास्त्रीय विरासत के सम्मान का मामला है. बेंच ने साफ कहा कि संगीत की मौलिकता और ऑथरशिप अलग विषय हैं, जिनकी जांच सबूतों के आधार पर होगी. एआर रहमान के वकील ने तर्क दिया कि यह धुन पहले भी कई बार पब्लिक के सामने गाई जा चुकी है.

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गाने 'वीरा राजा वीरा' पर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट की एआर रहमान को सलाहZoom

फिल्म ‘पोन्नियिन सेलवन II’ के गाने से जुड़ा है विवाद

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार 13 फरवरी को मशहूर संगीतकार एआर रहमान को सलाह दी कि वे फिल्म ‘पोन्नियिन सेलवन II’ के गाने ‘वीरा राजा वीरा’ के मामले में ध्रुपद सिंगर फैयाज वसीफुद्दीन डागर के योगदान को स्वीकार करें. जज सूर्यकांत और जज जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि यह विवाद सिर्फ कॉपीराइट या कानूनी अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसी कलाकार की पहचान और उसकी विरासत के सम्मान से जुड़ा एक गहरा मुद्दा है. कोर्ट का मानना था कि शास्त्रीय संगीत की परंपराओं को सहेजने वाले कलाकारों के प्रति उदारता दिखाई जानी चाहिए, क्योंकि संगीत का हित इसी में समाया है कि ऐसे मामलों को आपसी सहमति और सम्मान के साथ सुलझाया जाए.

अदालत ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि सिंगर फैयाज वसीफुद्दीन डागर परिवार के पूर्वजों का ‘डागरवाणी’ परंपरा और ध्रुपद गायकी में काफी बड़ा योगदान रहा है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बेंच ने एआर रहमान के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा कि शास्त्रीय संगीत के उपासक अक्सर कमर्शियल कंपिटीशन से दूर रहते हैं और वे सम्मान और अपनी कला की पहचान होती है. कोर्ट ने अहम कमेंट भी किया कि अगर इन ट्रेडिशनल घरानों ने शास्त्रीय संगीत की नींव नहीं रखी होती, तो आज के मॉडर्न सिंगरों और संगीतकारों के लिए इस मुकाम तक पहुंचना मुमकिन नहीं होता. धुन की मौलिकता को एक बड़ी वजह मानते हुए कोर्ट ने संगीतकारों के बीच आपसी संवाद की कमी पर खेद जताया.

कोर्ट का सुझाव
बेंच ने मामले की कानूनी पेचीदगियों पर चर्चा करते हुए कहा कि मौलिकता और लेखन दो अलग-अलग पहलू हैं. हालांकि सिंगर फैयाज वसीफुद्दीन डागर ने धुन की मौलिकता के आधार पर एक मजबूत पक्ष रखा है, लेकिन इसके ऑरिजिनल ऑथरशिप के सवाल पर सबूत और गहरी जांच की जरूरत होगी. कोर्ट ने सुझाव दिया कि दोनों पक्षों को कानूनी दांव-पेंच में उलझने के बजाय समझौते का रास्ता अपनाना चाहिए. यह न केवल ध्रुपद परंपरा की विरासत को संरक्षित करने के लिए जरूरी है, बल्कि इससे आने वाली पीढ़ियों को भी संगीत के प्रति एक पॉजिटिव मैसेज मिलेगा. पीठ ने साफ कहा कि पहली बार किसी कला को प्रस्तुत करने का अर्थ उसका लेखक होना नहीं होता, जिसकी कानूनी जांच की जाएगी.

एआर रहमान की परफॉर्मेंस के समय ही विवाद क्यों?
एआर रहमान की ओर से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने दलील दी कि यह रचना 1991 में गुंदेचा ब्रदर्स ने पब्लिक के सामने गई थी और लंबे समय से कई अन्य मंचों पर भी इसकी प्रस्तुत की जाती रही है. उन्होंने तर्क दिया कि पहले कभी इस पर आपत्ति नहीं जताई गई थी और सिर्फ एआर रहमान की परफॉर्मेंस के समय ही विवाद खड़ा करना गलत है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की बयानों और पहचान के मुद्दे को देखते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से इस विषय पर एआर रहमान से निर्देश लेने के लिए समय मांगा है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों पक्ष कानूनी लड़ाई जारी रखते हैं या संगीत की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए किसी समझौते पर पहुंचते हैं.

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Abhishek Nagar

अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें

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