गाजियाबाद में डग्गामार वाहनों का ‘आतंक’, रोडवेज को लग रहा करोड़ों का चूना, अब 48 घंटे की निगरानी से खुलेगी पोल

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Ghaziabad News: दिल्ली से सटे गाजियाबाद की सड़कों पर इन दिनों उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों से ज्यादा डग्गामार वाहनों का बोलबाला है. जीटी रोड हो या नेशनल हाईवे-9, शहर के मुख्य चौराहों से लेकर आंतरिक सड़कों तक, डग्गामार माफियाओं ने अपने पक्के ठिकाने बना लिए हैं. आलम यह है कि सरकारी खजाने को चूना लगाकर ये अवैध वाहन न केवल गाजियाबाद, बल्कि पूरे प्रदेश में चांदी काट रहे हैं. ताज्जुब की बात यह है कि जिम्मेदार विभाग सब कुछ जानते हुए भी अब तक मौन बना रहा, लेकिन अब परिवहन निगम ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है.

48-48 घंटे होगी निगरानी, तैयार होगा कच्चा चिट्ठा
लगातार घटते राजस्व और मुख्यालय की फटकार के बाद अब परिवहन निगम एक्शन मोड में है. निगम की विशेष टीमें अब शहर के चिन्हित अवैध अड्डों पर 48-48 घंटे डेरा डालेंगी. इस दौरान एक विस्तृत सर्वे रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें अवैध वाहनों की संख्या, उनके रूट और ले जाए जा रहे यात्रियों का पूरा कच्चा चिट्ठा होगा. यह रिपोर्ट संभागीय परिवहन विभाग (RTO) को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर बड़े स्तर पर जब्ती और चालान की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

रोडवेज के पास सिर्फ 20% सवारी
गाजियाबाद रीजन में परिवहन निगम की अपनी 895 बसें और करीब 200 अनुबंधित बसें सड़कों पर हैं. इतनी बड़ी फ्लीट होने के बावजूद रोडवेज बसों को महज 20 से 30 प्रतिशत यात्री ही मिल पा रहे हैं. बाकी 70 से 80 प्रतिशत यात्रियों पर डग्गामार वाहनों ने कब्जा कर रखा है. अवैध संचालक कम किराए का लालच देकर सवारियां भरते हैं, जिससे परिवहन निगम को रोजाना लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

इन 50 ठिकानों पर डग्गामारों का ‘कब्जा’
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सर्वे में सामने आया है कि शहर में 50 से अधिक ऐसे पॉइंट हैं जहां डग्गामार वाहनों का समानांतर साम्राज्य चल रहा है. इसमें मुख्य रूप से लालकुआं, मोहननगर, यूपी गेट, सिद्धार्थ विहार, नोएडा सेक्टर-62 के पास, लोनी-भोपुरा, गोविंदपुरम, पुराना बस अड्डा, नया बस अड्डा और कौशांबी डिपो के ठीक बाहर. हैरानी की बात तो यह है कि कौशांबी जैसे सुरक्षित माने जाने वाले बस अड्डे के भीतर घुसकर भी ये अवैध संचालक सवारियां उठा रहे हैं.

ई-बसों का पहिया भी थमा
डग्गामारी का असर सिर्फ लंबी दूरी की बसों पर ही नहीं, बल्कि शहर के भीतर चलने वाली ई-बसों पर भी पड़ा है. नगर विकास विभाग ने गोविंदपुरम से कौशांबी के बीच ई-बसें शुरू की थीं, लेकिन अवैध बस संचालकों ने किराए की ऐसी जंग छेड़ी कि ई-बसों को सवारी मिलना बंद हो गई. डग्गामार बसें ई-बसों के मुकाबले आधे से भी कम किराए में यात्रियों को ढो रही हैं, जिसके चलते कई रूटों पर ई-बसों का संचालन बंद करना पड़ा है.

क्या कहते हैं अधिकारी?
कौशांबी डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (ARM) अंशु भटनागर के अनुसार, ‘डग्गामार वाहनों के कारण निगम को भारी आर्थिक चोट पहुंच रही है. हमने सर्वे शुरू कर दिया है. लालकुआं का डेटा तैयार है और जल्द ही अन्य क्षेत्रों की रिपोर्ट RTO को भेज दी जाएगी. इसके बाद पुलिस और आरटीओ के सहयोग से इन अवैध अड्डों को ध्वस्त किया जाएगा.’

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