अयोध्या में आकर्षण का केंद्र बना है रामसेवक पुरम, अब ओपन म्यूजियम के रूप में हो रहा विकसित

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Ayodhya news:ओपन म्यूज़ियम श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है. यहां विशाल धनुष-बाण, गदा, भव्य शिवलिंग के साथ-साथ गंडकी नदी से लाया गया वह पाषाण भी रखा गया है, जिसका मंदिर निर्माण में उपयोग नहीं हो पाया था.विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि ओपन म्यूज़ियम के माध्यम से एक धार्मिक संदेश पूरे समाज तक पहुंच रहा है. लोग यहां दर्शन कर भावविभोर हो रहे हैं

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अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को अब श्रद्धालु एक ही स्थान पर देख सकेंगे. राम मंदिर निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाली सामग्रियों के साथ राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दरमियां देश भर से आये लोंगो की श्रद्धा के अनुरूप सामानों को रामसेवक पुरम में ओपन म्यूज़ियम के रूप में संरक्षित किया गया है. zराम मंदिर निर्माण के सहयोगी रहे विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने जानकारी दी कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राण प्रतिष्ठा के दौरान और उसके बाद देश-विदेश से अनेक प्रकार की धार्मिक सामग्रियां प्राप्त हुईं. इन सभी वस्तुओं को संग्रहित कर रामसेवक पुरम में व्यवस्थित रूप से स्थापित किया गया है.

श्रद्धालुओं के लिए बन रहा आकर्षण का केंद्र

शरद शर्मा ने बताया कि यह ओपन म्यूज़ियम श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है. यहां विशाल धनुष-बाण, गदा, भव्य शिवलिंग के साथ-साथ गंडकी नदी से लाया गया वह पाषाण भी रखा गया है, जिसका मंदिर निर्माण में उपयोग नहीं हो पाया था.विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि ओपन म्यूज़ियम के माध्यम से एक धार्मिक संदेश पूरे समाज तक पहुंच रहा है. लोग यहां दर्शन कर भावविभोर हो रहे हैं और भावी पीढ़ी को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि भगवान राम लला के प्रति हमारे पूर्वजों की आस्था कैसी थी और किस तरह यह सामग्री राम मंदिर ट्रस्ट को प्राप्त हुई

राम मंदिर आंदोलन का दिखेगा जीवंत रूप

वही अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी राम मंदिर निर्माण के दरमियान प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के दरमियान जिन लोगों ने अलग-अलग तरीके से अपनी आस्था रामलला को समर्पित की थी उसे पूरे ओपन संग्रहालय में दर्शन कर अभिभूत हो रहे हैं. जिसमें विशाल का धनुष बाण गदा भगवान के जीवन पर आधारित तमाम सामग्री और इसके अलावा गंडकी नदी चलाए गए शालिग्राम के पत्थर के पास और भी दर्शनार्थ रखे गए हैं जिसको लेकर अभिभूत है और राम मंदिर ट्रस्ट का शुक्रिया अदा करते हुए आभार प्रकट किया है. रामसेवक पुरम में स्थापित यह ओपन संग्रहालय न सिर्फ आस्था का केंद्र बन रहा है, बल्कि राम मंदिर आंदोलन के ऐतिहासिक सफर को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रहा है

इतना ही नहीं साल 1998 में रामसेवक पुरम की स्थापना की गई थी और यहां पर राम मंदिर से जुड़े सभी पत्थर के तराशी का कार्य भी चल रहा था . इतना ही नहीं समस्त देवी देवताओं की प्रतिमा की इसी स्थल पर बनाई जाती थी विश्व हिंदू परिषद की देखरेख में यहां पर पत्थरों की तरसी भी हो रही थी अब इस स्थल को ओपन म्यूजियम के रूप में विकसित कर राम भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाया जा रहा है .

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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