How many Idols in Home Temple। घर के मंदिर में कितनी मूर्तियां रखना शुभ?
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Idols in Home Temple: घर का छोटा सा मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि भावनाओं, आस्था और पारिवारिक संस्कारों का केंद्र होता है. कई लोग भक्ति भाव में अलग-अलग अवसरों पर नई मूर्तियां या चित्र स्थापित कर लेते हैं. धीरे-धीरे मंदिर भरने लगता है और फिर एक सवाल मन में उठता है क्या घर के मंदिर में देवी-देवताओं की एक से ज्यादा मूर्तियां या चित्र रखने चाहिए? अगर हां, तो कितनी संख्या सही मानी जाती है?
घर के मंदिर में मूर्तियों की संख्या क्यों है महत्वपूर्ण? धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, घर का मंदिर मंदिर जैसा ही पवित्र होना चाहिए, लेकिन उसे अत्यधिक भरा हुआ नहीं रखना चाहिए. ज्यादा मूर्तियां होने से पूजा का केंद्र बिखर सकता है. आस्था में संख्या से ज्यादा भाव महत्वपूर्ण है, फिर भी कुछ पारंपरिक मान्यताएं हैं जिन्हें लोग मानते आए हैं. अक्सर देखा गया है कि लोग यात्रा से लौटते समय या किसी व्रत-त्योहार पर नई मूर्ति ले आते हैं. भावना अच्छी होती है, लेकिन संख्या बढ़ने पर नियमित पूजा करना मुश्किल हो जाता है. यही कारण है कि विद्वान सीमित और संतुलित संख्या की सलाह देते हैं.
देवी-देवताओं के अनुसार क्या हो संख्या? भगवान गणेश भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है, इसलिए लगभग हर घर में उनकी प्रतिमा मिलती है. धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, गणेश जी की मूर्तियां विषम संख्या जैसे 1, 3, 5 या 7 में रखना शुभ माना जाता है. हालांकि एक ही मूर्ति भी पर्याप्त है, यदि श्रद्धा से पूजा की जाए. कई घरों में अलग-अलग आकार की गणेश प्रतिमाएं होती हैं, लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि वे अत्यधिक न हों.
शिवलिंग घर के मंदिर में शिवलिंग स्थापित करने को लेकर विशेष सावधानी बताई जाती है. मान्यता है कि घर में रखा शिवलिंग अंगूठे के आकार से बड़ा नहीं होना चाहिए. बड़े शिवलिंग की पूजा-विधि विस्तृत होती है, जिसे नियमित रूप से निभाना हर किसी के लिए संभव नहीं होता. साथ ही, घर में एक से अधिक शिवलिंग नहीं रखने चाहिए. शिवलिंग को जल से भरे पात्र में स्थापित करना शुभ माना जाता है.
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माता दुर्गा मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा घर-घर में होती है. लेकिन धर्म विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि माता के तीन चित्र या प्रतिमाएं एक साथ न रखें. तीन की संख्या से बचते हुए एक, दो या तीन से अधिक संख्या रखी जा सकती है, पर संतुलन जरूरी है. कई बार लोग नवरात्रि में नई तस्वीर लगा देते हैं, पर पुरानी हटाना भूल जाते हैं यहीं सावधानी की जरूरत है.
बजरंग बली हनुमान जी की मूर्ति के बारे में मान्यता है कि घर में उनकी बैठी हुई मुद्रा वाली प्रतिमा रखना शुभ होता है. यह रूप शांति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है. खड़े या युद्ध मुद्रा वाले चित्र मंदिरों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं, जबकि घर के लिए शांत स्वरूप बेहतर बताया गया है.
राम दरबार और शिव परिवार राम-जानकी और शिव परिवार का चित्र घर में सामूहिकता और पारिवारिक एकता का संदेश देता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इनका चित्र या प्रतिमा घर के मंदिर में अवश्य होनी चाहिए. यह परिवार में प्रेम और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करता है.
मंदिर की दिशा और व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी सिर्फ मूर्तियों की संख्या ही नहीं, बल्कि मंदिर की दिशा भी अहम मानी गई है. वास्तु के अनुसार, घर का मंदिर उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में होना चाहिए. मंदिर का मुख पूर्व की ओर हो तो बेहतर माना जाता है.
मंदिर को कभी भी शयनकक्ष, बाथरूम या सीढ़ियों के नीचे नहीं रखना चाहिए. यह नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकता है. मंदिर के आसपास साफ-सफाई और सादगी बनाए रखना जरूरी है.