Mahashivratri 2026 ke hubh Sanket। महाशिवरात्रि पर मिलने वाले शुभ संकेत और नीलकंठ दर्शन

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Maha Shivratri 2026 : महाशिवरात्रि सिर्फ एक त्योहार नहीं, आस्था की वह रात है जब लोग उम्मीदों के साथ जागते हैं. कोई व्रत रखता है, कोई पूरी रात जप करता है, तो कोई शिवालय की कतार में घंटों खड़ा रहता है. मान्यता है कि इस दिन अगर कुछ खास चीजें दिख जाएं, तो वह आने वाले समय के लिए शुभ संकेत होती हैं. कई लोग इसे संयोग कहते हैं, तो कई इसे भोलेनाथ का इशारा. लेकिन लोकविश्वास में इन संकेतों की अपनी अलग ही जगह है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

महाशिवरात्रि और शुभ संकेतों की परंपरा भारत में त्योहारों के साथ संकेतों और प्रतीकों की परंपरा बहुत पुरानी है. महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से कुछ चीजों का दिखना शुभ माना जाता है. गांवों में आज भी बुजुर्ग कहते हैं, “शिवरात्रि की सुबह जो दिख जाए, वही साल का हाल बता जाए.” शहरों में भले यह बातें कम सुनाई देती हों, लेकिन आस्था आज भी उतनी ही गहरी है.

बेलपत्र: मनोकामना पूरी होने का संकेत बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है. अगर महाशिवरात्रि के दिन अचानक बेल का पेड़ दिख जाए, या पूजा के लिए बेलपत्र सहजता से मिल जाए, तो इसे शुभ माना जाता है. कई श्रद्धालुओं का अनुभव है कि जिस साल उन्हें बिना प्रयास बेलपत्र मिल गया, उस साल उनकी कोई बड़ी इच्छा पूरी हुई. शास्त्रों में भी बेलपत्र को त्रिदेव का प्रतीक बताया गया है. माना जाता है कि सच्चे मन से चढ़ाया गया बेलपत्र दरिद्रता और बाधाओं को दूर करता है.

रुद्राक्ष: मानसिक शांति और भाग्य का द्वार रुद्राक्ष को शिव के आंसुओं से उत्पन्न माना जाता है. महाशिवरात्रि के दिन अगर किसी को रुद्राक्ष मिल जाए, या किसी मंदिर में सहज रूप से रुद्राक्ष की माला मिल जाए, तो इसे महादेव का विशेष आशीर्वाद समझा जाता है. आजकल कई लोग फैशन में भी रुद्राक्ष पहनते हैं, लेकिन आस्था से धारण किया गया रुद्राक्ष मानसिक स्थिरता देता है ऐसा विश्वास है. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि शिवरात्रि के दिन रुद्राक्ष घर लाना सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने जैसा है.

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नंदी और नीलकंठ पक्षी: समृद्धि का प्रतीक भगवान शिव के वाहन नंदी के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है. अगर शिवरात्रि के दिन मंदिर में नंदी के सामने दीप जलाते समय मन में शांति का अनुभव हो, तो इसे संकेत माना जाता है कि आपकी प्रार्थना सुनी जा रही है. वहीं, नीलकंठ पक्षी का दर्शन भी बेहद शुभ समझा जाता है. लोकमान्यता है कि नीलकंठ दिख जाए तो धन और सम्मान में वृद्धि होती है. ग्रामीण इलाकों में लोग आज भी मानते हैं कि शिवरात्रि के दिन नीलकंठ दिखना आने वाले समय में आर्थिक उन्नति का संकेत है.

अन्य शुभ क्रियाएं जो बदल सकती हैं माहौल तांबे का कलश और जलाभिषेक महाशिवरात्रि पर तांबे का कलश घर लाकर उससे शिवलिंग पर जल अर्पित करना कल्याणकारी माना गया है. तांबा शुद्धता और ऊर्जा का प्रतीक है. कई परिवारों में यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है.

शिवलिंग पर विशेष अर्पण शिवपुराण के अनुसार, दूध और घी मिश्रित जल से अभिषेक करने या चंदन से लिखे बेलपत्र चढ़ाने से आर्थिक तंगी दूर होती है. हालांकि इन बातों को पूरी तरह आस्था से जोड़कर ही देखा जाता है, लेकिन श्रद्धालु इसे जीवन में सकारात्मक बदलाव से जोड़ते हैं.

आस्था, विश्वास और सकारात्मक सोच महाशिवरात्रि के ये संकेत केवल धार्मिक प्रतीक भर नहीं हैं. मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो ये विश्वास व्यक्ति में उम्मीद और सकारात्मक सोच जगाते हैं. जब मन में भरोसा होता है कि सब अच्छा होगा, तो व्यक्ति के फैसले भी बेहतर होते हैं.

महाशिवरात्रि पर बेलपत्र, रुद्राक्ष, नंदी और नीलकंठ पक्षी का दर्शन शुभ संकेत माना जाता है. ये प्रतीक सुख, समृद्धि और सकारात्मक बदलाव का संदेश देते हैं, जो आस्था और विश्वास को और मजबूत करते हैं.

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