Picnic Spot Mirzapur : मिर्जापुर के लिए 4 चांद हैं ये 5 स्थान, आकर धन्य हो जाओगे, नहीं आना सबसे बड़ी भूल

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Best Picnic Spot Mirzapur : मिर्जापुर धार्मिक नगरी के साथ ऐतिहासिक और प्राचीन शहरों में एक है. यहां पर किले से लेकर कई रहस्मयी आश्रम और वाटरफॉल हैं, जो दिव्य और अलौकिक हैं. आइये ऐसे पांच स्थानों के बारे में जानते हैं, जो धार्मिक, ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर हैं. जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर के अंदर ही ये सारे स्थान हैं, जहां आप एक दिन में घूमकर लौट सकते हैं. मन की शांति के लिए भी यहां आ सकते हैं. ये सभी जगहें मिर्जापुर के लिए चार चांद की तरह हैं. कुछ तो अति प्राचीन और अब धरोहर के रूप मौजूद हैं. यहां चिड़ियों की चहचहाहट आपकी थकान छूमंतर कर देगी.

मिर्जापुर की अपनी धार्मिक पहचान दुनियाभर में मशहूर है. धार्मिक नगरी होने के साथ ही ये ऐतिहासिक और प्राचीन नगर भी है. यहां रहस्यमई किले, आश्रम और वाटरफॉल हैं, जो दिव्य और अलौकिक हैं. आइये ऐसे ही उन पांच स्थानों के बारे में जानते हैं, जो मिर्जापुर के लिए चार चांद की तरह हैं.

मिर्जापुर जिले में सबसे ऐतिहासिक चुनार का किला है. इसका निर्माण राजा सहदेव ने कराया था. इस तिलस्मी किले से मुगलों से लेकर अंग्रेज तक ने राज किए हैं. मुगलकाल में इस किले से पूर्वी भारत पर राज किया जाता था, जहां अंग्रेजों के आने के बाद उनके अधिकारी इस किले का प्रयोग करने लगे. यहां पर जेल, शस्त्रागार के साथ फांसी गृह बनाया गया. हालांकि, अब यह धरोहर के रूप मौजूद है और इतिहास जीवंत किए हुए है.

मिर्जापुर के धार्मिक स्थलों में सबसे चर्चित मां विंध्यवासिनी धाम है. मान्यता है कि यहां पर साक्षात देवी सशरीर विराजमान हैं. उनके दर्शन से हर मनोकामनापूर्ण हो जाती है. दूर-दूर से भारी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं. पूरे क्षेत्र का धार्मिक पर्यटन के तौर पर विकास कराया जा रहा है, जहां नव्य, दिव्य और भव्य मंदिर देखकर आप भी मंत्रमुग्ध हो जाएंगे. मन की शांति के लिए यह स्थान बेहद खास है.

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धार्मिक नगरी मिर्जापुर में धर्म और आध्यत्म का अनूठा संगम है. यहां पर विश्व प्रसिद्ध देवरहा बाबा का आश्रम है. देवरहा बाबा सिद्ध संत थे. करीब 40 बीघे में भव्य मंदिर और आश्रम फैला है. कूप से लेकर तालाब तक मौजूद हैं. यहां पर अपने बच्चों और परिवार के साथ आ सकते हैं.

मिर्जापुर के सत्तेशगढ़ में परमहंस आश्रम स्थित है. किले में बनाया गया यह आश्रम बेहद दिव्य और अलौकिक है. आश्रम में संत अड़गड़ानंद महराज के सत्संग में दूर-दूर से भक्त आते हैं. नदी और वाटरफॉल के किनारे बसे हुए इस आश्रम का नजारा बेहद खास है. चिड़ियों की चहचहाहट के साथ ही पत्तों की आवाज आपके मानसिक थकान को छूमंतर कर देगी. यहां भी आप घूमने आ सकते हैं.

प्राकृतिक सौंदर्यता को अनुभूत करने के लिए आप लखनिया दरी भी घूमने आ सकते हैं. पहाड़ों के बीच स्थित यह फॉल बेहद खास है. अगर आप भी मिर्जापुर आ रहे हैं या वाराणसी के नजदीक हैं तो यहां घूमने के लिए जरूर आएं.

मिर्जापुर में ये कुछ ऐसे स्थान हैं, जहां आप अपने परिवार के साथ घूमने आ सकते हैं. समय बिता सकते हैं. प्राकृतिक सुंदरता के साथ आध्यत्म का अनुभव ले सकते हैं. ये सारे स्थान जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर के अंदर हैं.

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