जब भी होटल में खाना खाने जाएं, इस बात का ध्यान जरूर रखें, जानिए हैरान करने वाली दिलचस्प जानकारी
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Hotel light colour meaning : जब भी हम परिवार या दोस्तों के साथ होटल में खाना खाने जाते हैं, तो अक्सर हमारा ध्यान सजावट और मेन्यू पर होता है. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि कुछ आधुनिक होटलों और कैफे के बाहर या काउंटर पर एक खास रंग की लाइट लगी होती है? यह कोई साधारण सजावट नहीं, बल्कि आपके लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है. दरअसल, कई जगहों पर यह लाइट इस बात का सूचक होती है कि होटल के पास खाना उपलब्ध है या नहीं. आइए इसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जानते हैं.
भारत में सड़क किनारे ढाबे या रेस्टोरेंट का चलन सदियों पुराना है. जब भी मुसाफिर सड़क किनारे से गुजरते हैं तो वे अपने मनपसंद ढाबा में खाना खाते हैं. जो लोग अक्सर सड़क मार्ग से यात्रा करते हैं उन्हें तो सब कुछ पता रहता है लेकिन जो लोग नए-नए यात्रा करते हैं या कभी कभार यात्रा करते हैं उनके लिए चीजें अलग होती है. उन्हें बहुत कुछ पता नहीं रहता है. दरअसल, हम यहां एक ऐसी जानकारी साझा कर रहे हैं जो हमारे यहां पुराने जमाने में काफी प्रचलित में था. भले ही आज आधुनिकता के कारण इसमें कमी आई हो लेकिन यह जानकारी आज भी खास है.
कई छोटे होटलों और ढाबों में हरी लाइट एक तरह का संकेत होती है. जब होटल में खाना तैयार रहता है और ग्राहकों के लिए उपलब्ध होता है, तब बाहर हरे रंग की ट्यूब लाइट या बल्ब जला दिया जाता है. जैसे ही खाना खत्म हो जाता है या किचन बंद हो जाता है, यह हरी लाइट बंद कर दी जाती है. इससे राह चलते लोग दूर से ही समझ जाते हैं कि होटल में इस समय भोजन मिल रहा है या नहीं. यह एक आसान और सस्ता तरीका है ग्राहकों को जानकारी देने का, जिससे उन्हें बिना पूछे ही स्थिति का पता चल जाता है.
पहले के समय में छोटे रेस्टोरेंट और ढाबों में एक दिलचस्प परंपरा होती थी. जब खाना तैयार हो जाता था, तो दुकान के बाहर केले का पत्ता लटका दिया जाता था. यह इस बात का संकेत होता था कि भोजन उपलब्ध है. राह चलते लोग उस पत्ते को देखकर समझ जाते थे कि यहां खाना मिल रहा है. जैसे ही खाना खत्म हो जाता, वह पत्ता हटा लिया जाता था. समय के साथ इसी परंपरा ने नया रूप ले लिया और केले के पत्ते की जगह हरी बत्ती ने ले ली. आज कई जगहों पर हरी लाइट जलाकर यही संकेत दिया जाता है कि खाना तैयार है.
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बड़े और आधुनिक होटल आमतौर पर हरी लाइट वाले इस पारंपरिक तरीके का इस्तेमाल नहीं करते. वहां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बड़े साइनबोर्ड, डिजिटल डिस्प्ले और अलग-अलग तरह की लाइटिंग का उपयोग किया जाता है. लेकिन छोटे शहरों और कस्बों की परोटा दुकानों या ढाबों में आज भी हरी ट्यूब लाइट का चलन साफ दिखाई देता है. यह एक आसान और सस्ता संकेत होता है कि दुकान पर खाना उपलब्ध है. हालांकि अब कई छोटी दुकानों को भी रंग-बिरंगी एलईडी लाइटों से सजाया जाने लगा है, जिससे हरी लाइट की अलग पहचान और उसका महत्व पहले जैसा नहीं रहा है.
इसलिए अब ज्यादातर दुकानों में ऐसे हरे लाइट लगाकर ग्राहकों को भूख बढ़ाने का संकेत नहीं दिया जाता. लेकिन छोटे शहरों के रेस्टोरेंट्स और दक्षिण के जिलों में आज भी ये आदत आमतौर पर देखी जा सकती है.