Maha Shivaratri 2026 Nandi Right Ear Wish Belief। नंदी के दाहिने कान में मनोकामना क्यों कही जाती है
Mahashivaratri 2026: मंदिर जाते ही आपने एक बात जरूर नोट की होगी. लोग शिवलिंग के दर्शन करते हैं, फिर सीधे नंदी महाराज के पास जाकर उनके कान में कुछ फुसफुसाते हैं. ये दृश्य इतना आम है कि हम देखते तो हैं, पर रुककर सोचते नहीं कि आखिर ऐसा क्यों होता है. क्या सच में नंदी भगवान शिव तक हमारी बात पहुंचाते हैं? और अगर हां, तो सिर्फ दाहिने कान में ही इच्छा क्यों कही जाती है? महाशिवरात्रि 2026 करीब है और इस मौके पर ये सवाल और भी दिलचस्प हो जाता है. मान्यता, भाव, ऊर्जा और प्रतीक -इन सबका एक गहरा कनेक्शन है इस परंपरा से. ये सिर्फ रिवाज नहीं, बल्कि भक्त और भोलेनाथ के बीच एक भावनात्मक रास्ता माना जाता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
महाशिवरात्रि 2026 कब है और क्यों खास मानी जाती है?
महाशिवरात्रि 2026 रविवार, 15 फरवरी को पड़ेगी. इस रात को शिवभक्त जागरण, जप और पूजा करते हैं. कहा जाता है कि इस समय ध्यान करने से मन जल्दी स्थिर होता है और प्रार्थना का असर भी ज्यादा महसूस होता है. गांव हो या शहर, इस दिन मंदिरों में लंबी लाइनें दिखती हैं, लोग दूध, जल और बेलपत्र चढ़ाते नजर आते हैं.
नंदी और भगवान शिव का रिश्ता क्या है?
सिर्फ वाहन नहीं, सबसे करीबी भक्त
नंदी महाराज को सिर्फ शिवजी का वाहन मानना अधूरा है. उन्हें द्वारपाल, सेवक और परम भक्त भी कहा जाता है. ज्यादातर शिव मंदिरों में नंदी शिवलिंग की ओर सीधे देखते हुए बैठे मिलते हैं. ये मुद्रा ही बताती है कि उनका पूरा ध्यान शिव पर है. लोक मान्यता कहती है कि नंदी शिवजी के सबसे भरोसेमंद हैं. इसलिए भक्त अपनी बात सीधे भगवान तक पहुंचाने के लिए नंदी को माध्यम मानते हैं. जैसे घर में किसी बड़े तक बात पहुंचाने के लिए भरोसेमंद इंसान चुना जाता है, वैसा ही भाव यहां जुड़ा है.
नंदी के कान में मनोकामना क्यों कही जाती है?
इस परंपरा के पीछे भावनात्मक और आध्यात्मिक दोनों पहलू बताए जाते हैं.
1. पहला, कान में धीरे से कही गई बात गोपनीयता का प्रतीक मानी जाती है. इसका मतलब है कि भक्त अपनी सच्ची, निजी इच्छा बिना दिखावे के व्यक्त कर रहा है.
2. दूसरा, नंदी का ध्यान हमेशा शिव की ओर होता है. मान्यता है कि जैसे ही भक्त अपनी बात कहता है, वह भाव सीधे शिव तक पहुंच जाता है.
3. तीसरा, ये एक प्रतीक है -भक्त, माध्यम और भगवान के बीच जुड़ाव का. कई लोग बताते हैं कि उन्होंने परीक्षा, नौकरी या घर की परेशानी को लेकर नंदी के कान में इच्छा कही और बाद में काम बन गया. भले इसे आस्था कहें, पर ऐसे किस्से लोगों के भरोसे को मजबूत करते हैं.
सिर्फ दाहिने कान में ही क्यों?
दाहिना पक्ष और शुभता का संबंध
धार्मिक मान्यताओं में दाहिना भाग शुभ, सकारात्मक और ऊर्जावान माना जाता है. पूजा-पाठ में भी दाहिने हाथ का ज्यादा इस्तेमाल होता है. इसी सोच से नंदी का दाहिना कान शुभ माध्यम माना गया.
कहा जाता है कि दाहिने कान में कही गई इच्छा सात्विक भाव से जुड़ती है और जल्दी फल देने वाली मानी जाती है. हालांकि कुछ जगह बाएं कान की भी परंपरा मिलती है, लेकिन दाहिने कान की मान्यता ज्यादा प्रचलित है.
महाशिवरात्रि पर यह परंपरा और असरदार क्यों मानी जाती है?
भक्तों का मानना है कि महाशिवरात्रि की रात माहौल अलग होता है. मंदिरों में मंत्र, घंटियां, दीपक -सब मिलकर एक खास माहौल बनाते हैं. इस समय की गई प्रार्थना को लोग ज्यादा भाव से जोड़ते हैं. इसलिए इस दिन नंदी के कान में इच्छा कहना शुभ माना जाता है.
नंदी के कान में इच्छा कहने से पहले क्या करें?
पहले शिवलिंग के दर्शन करें. फिर नंदी को प्रणाम करें, उन्हें छूने की जरूरत नहीं. “ॐ नमः शिवाय” का जप करें. जल, बेलपत्र या फूल चढ़ाएं. उसके बाद शांत मन से दाहिने कान में धीरे से अपनी बात कहें. इच्छा पूरी हो जाए तो धन्यवाद कहना भी याद रखें -ये भाव ही असली पूजा है.
आस्था, भरोसा और जुड़ाव
नंदी के कान में मनोकामना कहना सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि विश्वास की अभिव्यक्ति है. महाशिवरात्रि 2026 जैसे मौके पर ये भाव और गहरा हो जाता है, जब भक्त अपने दिल की बात भोलेनाथ तक पहुंचाने की कोशिश करता है.