गोंडा की वर्मा देसी बर्फी: 30 साल पुराना स्वाद, बिना मिलावट की पहचान

Share to your loved once


गोंडा. जिले के विकासखंड छपिया में वर्मा की देसी बर्फी काफी मशहूर है, यह बर्फी अपने खास स्वाद और शुद्धता के लिए जानी जाती है. इसे बनाने में शुद्ध दूध और पारंपरिक तरीके का इस्तेमाल किया जाता है. दूध को पहले धीमी आंच पर अच्छी तरह पकाया जाता है, फिर उसमें चीनी मिलाकर लगातार चलाया जाता है. सही गाढ़ापन आने पर उससे बर्फी के आकार में तैयार किया जाता है. बिना किसी मिलावट के बनाए जाने वाली वर्मा की देसी बर्फी की मांग आसपास के इलाकों के साथ-साथ विदेशों में भी है. यही वजह है कि यह बर्फी गोंडा की पहचान बन चुकी है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान दुकान के मालिक रामलोचन वर्मा बताते हैं कि उनकी दुकान लगभग 30 से 32 वर्ष पुरानी है और उनकी दुकान पर किसी भी प्रकार का बोर्ड नहीं लगा हुआ है. उनका पारंपरिक तरीके से बनाया गया बर्फी का स्वाद ही लोगों को अपनी तरफ खींच लाता है.

कैसे तैयार होती है देसी बर्फी
रामलोचन वर्मा बताते हैं कि देसी बर्फी तैयार करने के लिए सबसे पहले हम भैंस के दूध को लेते हैं. उसके बाद उसे कड़ाही में डालकर धीमी आंच पर अच्छी तरह पकाया जाता है. पकाने के बाद उसमें चीनी डाली जाती है और चीनी डालने के बाद उसे फिर से धीरे-धीरे लगातार चलाया जाता है. इसके बाद वह खुरचन बर्फी में बदल जाती है, इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम 2 से 3 घंटे का समय लगता है.

कैसे आया बर्फी बनाने का आइडिया
रामलोचन वर्मा बताते हैं कि उन्होंने पढ़ाई बिल्कुल नहीं की है, पहले वह खेती-किसानी करते थे. फिर अचानक उनके दिमाग में आया कि क्यों न कुछ बिजनेस किया जाए. एक दिन उन्होंने अपने घर पर दूध को पकाकर बर्फी बनाई, तो लोगों ने उसकी काफी तारीफ की. इसके बाद उन्होंने सोचा कि क्यों न बर्फी का ही बिजनेस शुरू किया जाए. फिर उन्होंने लगभग 30 से 32 साल पहले इस दुकान की शुरुआत की, उन्होंने बताया कि हम बर्फी बनाना कहीं से सीखने नहीं गए हैं, बनाते-बनाते ही हमें बनाना आ गया और लोगों को यह काफी पसंद आ रही है.

क्यों पसंद आती है लोगों को वर्मा की देसी बर्फी
रामलोचन वर्मा बताते हैं कि जैसे हम 30 साल पहले बर्फी बनाते थे, आज भी उसी तरीके से बर्फी बनाते हैं. पहले हम भट्टी पर बर्फी बनाते थे, पिछले 1 साल से हम गैस चूल्हे का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन पूरी प्रक्रिया आज भी वही पुरानी है. इसी वजह से लोग हमारी बर्फी को खूब पसंद करते हैं. रामलोचन वर्मा बताते हैं कि हमारी बर्फी की सप्लाई गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, अयोध्या और बस्ती के अलावा दुबई, अमेरिका और कई दूसरे देशों में भी होती है.

डेली कितने किलो तैयार होती है बर्फी
रामलोचन वर्मा बताते हैं कि हमारे यहां डेली 10 से 15 किलो बर्फी ही तैयार की जाती है, क्योंकि हम बर्फी ज्यादातर ऑर्डर पर ही बनाते हैं. रामलोचन वर्मा बताते हैं कि हमारे यहां 1 किलो बर्फी का रेट मात्र 300 रुपए प्रति किलो है. रामलोचन वर्मा बताते हैं कि हमारे यहां डेली 70 से 80 किलो दूध से बर्फी तैयार की जाती है. दूध हम 60 से 70 रुपए प्रति लीटर की दर से लेते हैं और उसमें चीनी का भी प्रयोग किया जाता है. इस तरह लगभग 700 से 800 रुपए का खर्चा आता है.

कितना हो रहा है डेली का इनकम
रामलोचन वर्मा बताते हैं कि हमारे यहां से डेली लगभग 10 से 15 किलो बर्फी की सप्लाई होती है और कभी-कभी ऑर्डर बढ़ने पर यह मात्रा और ज्यादा हो जाती है. इस तरह कुल मिलाकर हमारे यहां डेली 3000 से 3500 रुपए की बिक्री हो जाती है. ग्राहक अनीश बताते हैं कि हम रहने वाले तो गोंडा के ही हैं, लेकिन मैं दिल्ली में रहकर जॉब करता हूं. मैं बचपन से ही वर्मा जी की बर्फी खाता आ रहा हूं, मेरी सिस्टर बलरामपुर में रहती हैं, जब मैं बलरामपुर जाता हूं तो उनके यहां से एक से डेढ़ किलो बर्फी जरूर लेकर जाता हूं. उन लोगों को उनकी बर्फी काफी पसंद है, हम बचपन से ही अपने पिताजी के साथ उनके यहां बर्फी खाने आते थे. जब मैं दिल्ली इनकी बर्फी लेकर जाता हूं, तो हमारे दोस्त इसकी काफी तारीफ करते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP