cancer patient uzbek woman got life in a hospital in delhi india with 3D printed titanium implant treatment ब्रेन तक फैल गया कैंसर, निकाला खोपड़ी का एक हिस्सा, उज्बेकिस्तान में नहीं मिला इलाज तो आई भारत, यहां मिली जिंदगी

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अब ब्रेन में भी इम्‍प्‍लांट क‍िया जा सकता है. उज्बेकिस्तान की 27 वर्षीय महिला का दिल्ली में डॉ. अनुराग सक्सेना की टीम ने 3D-प्रिंटेड टाइटेनियम इम्प्लांट से ब्रेन सर्जरी कर इलाज क‍िया है. यह नई तकनीक है और इससे इलाज के बाद मह‍िला की हालत भी स्‍थि‍र है.

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ब्रेन तक फैल गया कैंसर, निकाला खोपड़ी का एक हिस्सा, उज्बेकिस्तान में नहीं...Zoom

उज्‍बेक‍िस्‍तान की मह‍िला को भारत में नई ज‍िंदगी म‍िली है.

उज्बेकिस्तान की रहने वाली 27 साल की एक महिला को भारत में नई जिंदगी मिली. उसका ओवेरियन कैंसर ब्रेन तक फैल गया था और उज्बेकिस्तान में सर्जरी के दौरान उसकी खोपड़ी का एक हिस्सा निकाल दिया गया था. इससे सिर में खाली जगह बन गई, जिससे ब्रेन पर असामान्य दवाब बनने लगा और कई जटिलताएं पैदा हो गईं. इस दौरान उसके देश में इलाज न मिलने के बाद उसे दिल्ली लाया गया और एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया. मेडिकल परीक्षण में पता चला कि उसके उसके सिर के पीछे सूजन थी और न्यूरोलॉजिकल लक्षण बहुत बिगड़ गए थे.

डॉक्टरों ने देखा कि समय के साथ ब्रेन का ऊतक (टिश्यू) और सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (मस्तिष्क तरल) उस खाली जगह से बाहर की ओर उभरने लगा. यह एक बहुत दुर्लभ और खतरनाक स्थिति थी. इससे महिला को बहुत तेज सिरदर्द, आंखों की समस्या, कन्फ्यूजन, भटकाव और सूजन साफ दिखने लगी. वह न तो ठीक से रह पा रही थी और न ही अकेले रोजाना के काम कर पा रही थी.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक न्यूरोसर्जन डॉ. अनुराग सक्सेना ने जिन्होंने इलाज की अगुवाई की, ने बताया कि यह बहुत असामान्य था. आमतौर पर ब्रेन हर्नियेशन अंदर की ओर होता है, जैसे स्ट्रोक में लेकिन यहां खोपड़ी की हड्डी न होने से ब्रेन बाहर की ओर धकेला जा रहा था.

मेटास्टेटिक ब्रेन डिजीज वाले मरीज में दोबारा सर्जरी बहुत जोखिम भरी थी.इमेजिंग और प्लानिंग के बाद सर्जन्स ने बाहर निकले ब्रेन टिश्यू को वापस जगह पर किया, जमा हुआ फ्लूइड निकाला, ब्रेन की कवरिंग (मेनिंज) को ठीक किया और खोपड़ी को एक कस्टमाइज्ड 3D-प्रिंटेड टाइटेनियम इम्प्लांट से रीकंस्ट्रक्ट किया. जो खासतौर पर उसके डिफेक्ट के लिए बनाया गया था.

डॉ. सक्सेना ने बताया कि सर्जरी दो हफ्ते पहले हुई थी और अब मरीज स्थिर है. अब उसे रोजमर्रा के कामों में दिक्कत नहीं होगी, जैसे बाल संवारना या सिर धोना. बहुत तेज सिरदर्द और दूसरे लक्षण खत्म हो गए हैं. वह बालों में कलर भी करवा सकती है.

मरीज की रिकवरी अच्छी हुई, उसे जल्दी चलना-फिरना शुरू कराया गया और स्थिर हालत में डिस्चार्ज कर दिया गया. डॉक्टरों ने कहा कि यह केस दिखाता है कि पर्सनलाइज्ड 3D-प्रिंटेड इम्प्लांट्स कॉम्प्लेक्स न्यूरोसर्जरी में, यहां तक कि एडवांस्ड कैंसर वाले मरीजों में भी, रिजल्ट्स बदल रहे हैं.

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्…और पढ़ें

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