‘जहां से चाहेंगे वहां से तेल खरीदेंगे’, पार्लियामेंट्री कमेटी को विदेश मंत्रालय ने साफ-साफ बता द‍िया

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पायल मेहता/ यतेंद्र शर्मा
संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति की मंगलवार को हुई हाई-प्रोफाइल मीटिंग में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिका के साथ होने वाली ट्रेड डील को लेकर बड़ी चर्चा हुई. कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली इस कमेटी के सामने विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने भारत का रुख स्पष्ट कर दिया. कमेटी में सरकार की ओर से यह संदेश बिल्कुल साफ था कि अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने का मतलब यह कतई नहीं है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और तेल खरीद के लिए किसी बाहरी दबाव में आएगा.

मीटिंग में क‍ितनी बातें हुईं और क्‍या क्‍या सवाल पूछे गए, इसके बारे में विस्‍तार से जानकारी नहीं दी गई. लेकिन बैठक के बाद कमिटी के अध्यक्ष शशि थरूर ने कहा कि US और EU के साथ ट्रेड डील को लेकर चर्चा हुई. सभी विषयों को लेकर सदस्यों ने सवाल उठाए. सभी का जवाब अधिकारियों ने दिया. सबसे खास बात, अधिकारियों के ज्यादातर जवाबों से सभी सदस्य संतुष्ट थे. सूत्रों ने बताया क‍ि बैठक के दौरान लगभग 18 सांसदों ने विदेश सचिव और वाणिज्य मंत्रालय के मुख्य वार्ताकार से तीखे सवाल पूछे. विदेश मंत्रालय की ओर से उनका क्‍या जवाब द‍िया गया है, पढ़‍िए…

क्या अमेरिका से डील के बाद भारत रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद कर देगा?

सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा. भारत अपनी पसंद और प्रतिस्पर्धात्मक दरों के आधार पर किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है. अमेरिका के साथ डील अपनी जगह है, लेकिन नेशनल इंट्रेस्‍ट सर्वोपरि हैं.

अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर के आयात का लक्ष्य क्या मुमकिन है?

यह कोई बाध्यकारी वादा नहीं बल्कि एक टारगेट है. वर्तमान में हम हर साल करीब 42 बिलियन डॉलर का आयात करते हैं. इसे बढ़ाना मुश्किल नहीं है क्योंकि इसमें एयरोप्लेन पार्ट्स, डेटा सर्वर और सेमीकंडक्टर जैसी हाई-वैल्यू चीजें शामिल हैं, जिनसे यह आंकड़ा आसानी से हासिल किया जा सकता है.

कब तक फाइनल हो जाएगा भारत अमेर‍िका ट्रेड एग्रीमेंट?

व‍िदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि यह एक ‘इंटरिम एग्रीमेंट’ यानी अंतरिम समझौता है जो मार्च के मध्य तक फाइनल हो जाएगा. इसमें दोनों देशों के हितों का ध्यान रखा गया है और टैरिफ में कमी से भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा होगा.

क्या बांग्लादेश के साथ हमारे संबंधों पर कोई असर पड़ेगा?

बैठक में बांग्लादेश के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. सरकार ने कमेटी को भरोसा दिलाया कि वह बांग्लादेश की सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के साथ संपर्क में है और वहां के घटनाक्रम पर करीब से नजर रखी जा रही है.

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