Kanpur Lamborghini Crash: ‘शिवम नहीं, ड्राइवर चला रहा था कार’, वकील के दावे ने पलटी बाजी, पुलिस की थ्योरी पर उठे सवाल
Kanpur Lamborghini Crash: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में हुए बहुचर्चित लैंबॉर्गिनी एक्सीडेंट मामले में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है. ₹14 करोड़ की लग्जरी स्पोर्ट्स कार से आधा दर्जन लोगों को कुचलने के आरोपी, तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा के वकील ने अब पुलिसिया दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. सोमवार को कोर्ट में वकील मृत्युंजय कुमार ने दावा किया कि हादसे के वक्त स्टीयरिंग शिवम के हाथ में नहीं, बल्कि उनके ड्राइवर मोहन के हाथ में थी.
एक ओर जहां चश्मदीद और वायरल वीडियो शिवम मिश्रा को ड्राइविंग सीट पर होने का इशारा कर रहे हैं, वहीं बचाव पक्ष के इस नए दावे ने कानूनी लड़ाई को और पेचीदा बना दिया है. इस बीच, शिवम मिश्रा की तलाश में पुलिस ने चार ठिकानों पर छापेमारी की. लेकिन, शिवम अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है.
‘मेरा क्लाइंट बीमार है, वह गाड़ी नहीं चला रहा था’
सोमवार (9 फरवरी) को ACJM-7 कोर्ट में जमानत और कार रिलीज करने की याचिका दाखिल करते हुए वकील मृत्युंजय कुमार ने मीडिया से कहा,
कल (10 फरवरी) मामले की सुनवाई है. शिवम मिश्रा निर्दोष हैं क्योंकि वह गाड़ी चला ही नहीं रहे थे. कार उनका ड्राइवर मोहन चला रहा था. यह महज एक सड़क दुर्घटना है. जब मेरा क्लाइंट गाड़ी की सीट पर था ही नहीं, तो उसके खिलाफ केस का आधार ही खत्म हो जाता है.
वकील ने शिवम की सेहत का हवाला देते हुए आगे कहा कि उनकी तबीयत अक्सर खराब रहती है, उन्हें मेडिकल इश्यूज (मिर्गी के दौरे) हैं, ऐसी स्थिति में उनके कार चलाने का सवाल ही नहीं उठता.
यह घटना रविवार, 8 फरवरी की दोपहर करीब 3:15 बजे ग्वालटोली इलाके के वीआईपी मार्ग पर हुई. दिल्ली नंबर (DL 11 CF 4018) की काले रंग की लिमिटेड एडिशन लैंबॉर्गिनी ने मौत की रफ्तार से कहर बरपाया. चश्मदीद सोनू त्रिपाठी के मुताबिक, कार ने पहले एक ऑटोरिक्शा को जोरदार टक्कर मारी, फिर सड़क किनारे खड़ी एक बुलेट मोटरसाइकिल को अपनी चपेट में ले लिया.
टक्कर इतनी भीषण थी कि बुलेट पर बैठा युवक विशाल हवा में करीब 10 फीट ऊपर उछलकर दूर जा गिरा. कार मोटरसाइकिल के अगले पहिये को रौंदते हुए उसे काफी दूर तक घसीटती रही और अंत में एक बिजली के खंभे से टकराकर रुकी. इस हादसे में कुल 6 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं.
इस मामले में कानपुर पुलिस की भूमिका शुरू से ही संदिग्ध रही है, जिसके चलते ग्वालटोली थाना प्रभारी संतोष गौड़ को लाइन हाजिर कर दिया गया है. पुलिस पर लापरवाही के 5 गंभीर आरोप लग रहे हैं:
- बिना मेडिकल कराए रिहाई: हादसे के बाद पुलिस शिवम को थाने तो लाई, लेकिन बिना मेडिकल टेस्ट कराए उसे ‘इमरजेंसी’ बताकर छोड़ दिया गया.
- कार को VIP प्रोटोकॉल: थाने के अंदर ₹14 करोड़ की कार को थाना प्रभारी की जीप वाली जगह पर खड़ा किया गया और उसे काले कवर से ढंक दिया गया ताकि किसी की नजर न पड़े.
- अज्ञात के खिलाफ FIR: मौके पर शिवम मिश्रा के मौजूद होने के बावजूद पुलिस ने 20 घंटे तक ‘अज्ञात चालक’ के खिलाफ FIR दर्ज की. दबाव बढ़ने पर अगले दिन शिवम का नाम जोड़ा गया.
- दबिश में ढिलाई: जब पुलिस टीम कारोबारी के घर पहुंची और दरवाजा नहीं खुला, तो पुलिस बिना किसी कार्रवाई के वापस लौट आई.
- टेक्निकल मुआयना टालना: हादसे के दूसरे दिन तक कार का तकनीकी निरीक्षण नहीं कराया गया, जिससे सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका बढ़ गई.
कानपुर लैंबॉर्गिनी एक्सीडेंट से जुड़े अहम सवाल
प्रश्न 1: क्या एक्सीडेंट के वक्त शिवम मिश्रा नशे में था?
उत्तर: स्थानीय लोगों और चश्मदीदों ने नशे का संदेह जताया है, लेकिन पुलिस ने समय पर मेडिकल नहीं कराया. परिवार का दावा है कि उसे मिर्गी के दौरे पड़ते हैं.
प्रश्न 2: वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है?
उत्तर: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है जिसमें निजी बाउंसर शिवम मिश्रा को ड्राइविंग सीट की तरफ से निकालकर ले जाते दिख रहे हैं. यही वीडियो वकील के ‘ड्राइवर’ वाले दावे पर सवाल खड़े कर रहा है.
प्रश्न 3: कार के साथ मौजूद बाउंसरों पर क्या आरोप हैं?
उत्तर: आरोप है कि हादसे के तुरंत बाद बाउंसरों ने पीड़ितों की मदद करने के बजाय भीड़ को डराया-धमकाया और धक्का-मुक्की की ताकि शिवम को वहां से सुरक्षित निकाला जा सके.
प्रश्न 4: अब आगे क्या होगा?
उत्तर: 10 फरवरी को कोर्ट में सुनवाई होनी है. पुलिस की रिपोर्ट तय करेगी कि शिवम को जमानत मिलेगी या नहीं और कार रिलीज होगी या जब्त रहेगी.
पुलिस कमिश्नर का सख्त रुख, ‘शिवम ही था चालक’
कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने हालात बिगड़ते देख खुद कमान संभाली. उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में शिवम मिश्रा का नाम सामने आया है और उसे FIR में नामजद किया जा रहा है. घायल तौफीक की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है. कमिश्नर ने उन आरोपों की भी जांच के आदेश दिए हैं जिनमें कहा गया था कि शिवम नशे में था या उसके बाउंसरों ने लोगों के साथ बदसलूकी की. इतना ही नहीं, कमिश्नर के निर्देश पर शिवम की तलाश में पुलिस ने स्वरूप नगर ,आर्य नगर ,किदवई नगर ,सिविल लाइंस के संभावित ठिकानों पर छापेमारी की गई. हालांकि, पुलिस के हाथ शिवम नहीं लगा.