Cat Worship Village Karnataka Unique India Story। कर्नाटक के एक गांव में बिल्लियों को देवी मानकर पूजा जाता है

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Cat Worship Story: सुबह घर से निकलते वक्त अगर बिल्ली रास्ता काट दे तो कितने लोग ठिठक जाते हैं, है ना? कोई दो मिनट रुकता है, कोई दूसरा रास्ता ढूंढ लेता है. बचपन से सुनी बात दिमाग में घूमती रहती है कि बिल्ली दिखना ठीक नहीं. मगर क्या आपने कभी सोचा कि जिस जानवर को हम अपशकुन समझते हैं, कहीं वही किसी और जगह सौभाग्य का निशान हो? देश के एक कोने में ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है, जहां बिल्ली डर की नहीं, श्रद्धा की वजह है. यहां लोग बिल्लियों को भगाते नहीं, सिर झुकाकर प्रणाम करते हैं. कहानी सिर्फ आस्था की नहीं, इंसान और जानवर के रिश्ते की भी है, जो पुराने समय से चला आ रहा है और आज भी लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में जिंदा है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

जहां बिल्ली है गांव की रक्षक
कर्नाटक के एक छोटे से गांव मांड्या के बेक्कलाले में बिल्लियों को देवी का रूप माना जाता है. यहां मान्यता है कि सालों पहले गांव पर मुसीबत आई थी. उसी समय एक बिल्ली के रूप में देवी प्रकट हुईं और गांव को खतरे से बचाया. बुजुर्गों की जुबानी ये कहानी आज भी जिंदा है. लोग बताते हैं कि उनके पुरखों ने उस दिव्य रूप के दर्शन किए थे. तभी से गांव में बिल्ली को साधारण जानवर नहीं समझा जाता.

मंदिरों और घरों में खास जगह
यहां कई घरों में बिल्ली को पहले खाना दिया जाता है, फिर परिवार खाता है. कुछ घरों में तो उनके लिए अलग कटोरी और सोने की जगह तय है. गांव के मंदिर में भी बिल्ली की प्रतीक मूर्ति रखी गई है, जहां त्योहारों पर पूजा होती है. साल में एक बार खास उत्सव मनाया जाता है, जो तीन-चार दिन चलता है. इस दौरान गांव में बाहर से लोग भी आते हैं.

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नियम इतने सख्त कि कोई मजाक नहीं
इस गांव में बिल्ली को नुकसान पहुंचाना बड़ा अपराध माना जाता है, अगर कोई जानबूझकर बिल्ली को सताए, तो उसे सामाजिक सजा मिलती है. कई बार ऐसे लोगों को गांव छोड़ने तक को कहा गया है. अगर किसी को मरी हुई बिल्ली मिलती है, तो उसका सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाता है. यह सब सुनकर शहर में रहने वाले लोग हैरान हो सकते हैं, लेकिन यहां ये रोजमर्रा की बात है.

अशुभ वाली धारणा पर सवाल
अक्सर लोग कहते हैं कि बिल्ली रास्ता काटे तो काम बिगड़ता है, लेकिन गांव के लोग इसे अलग नजर से देखते हैं. उनका मानना है कि बिल्ली किसी अनहोनी से पहले सतर्क कर देती है. जैसे कुत्ते भूकंप या खतरे से पहले बेचैन हो जाते हैं, वैसे ही बिल्लियां भी बदलाव महसूस कर लेती हैं. फर्क बस इतना है कि हमने कुत्तों को वफादार कहा और बिल्लियों को बदनाम कर दिया.

दुनिया में भी है बिल्ली का मान
सिर्फ इस गांव में नहीं, दुनिया के कई हिस्सों में बिल्ली को शुभ माना गया है. मिस्र की पुरानी सभ्यता में बिल्ली को पवित्र समझा जाता था. लोग मानते थे कि घर में बिल्ली हो तो नकारात्मक चीजें दूर रहती हैं. गांव के बुजुर्ग भी यही तर्क देते हैं कि बिल्ली घर को चूहों से बचाती है, अनाज सुरक्षित रखती है और कई कीड़े-मकोड़ों को दूर रखती है.

बदलती सोच की कहानी
आजकल गांव के युवा पढ़-लिखकर शहरों में जा रहे हैं, लेकिन अपनी इस परंपरा को नहीं भूलते. सोशल मीडिया पर भी इस गांव की चर्चा होने लगी है. कई लोग यहां घूमने सिर्फ इस अनोखी परंपरा को देखने आते हैं. गांव वाले इसे दिखावा नहीं, अपनी पहचान मानते हैं.

आखिर में बात सोच की है. जिसे हम डर से जोड़ते हैं, कोई और उसे विश्वास से जोड़ सकता है. बिल्ली शुभ है या अशुभ, ये बहस चलती रहेगी, लेकिन इस गांव में उसका दर्जा तय है -वह देवी है, रक्षक है.

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