कौन हैं ERO? राज्य सरकार के अफसर या सेंट्रल ऑब्जर्वर? जानें 10 सवालों में सबकुछ

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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम काटे जाने के विवाद ने अब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त अधिकारी ही मतदाता सूची का अंतिम फैसला करेंगे. इस पूरे विवाद के केंद्र में ‘ERO’ यानी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी हैं. दरअसल, बंगाल में ममता सरकार ने आरोप लगाया है कि अधिकारी मनमानी कर रहे हैं जबकि कोर्ट का मानना है कि यह उनकी वैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये राज्य के अफसर होते हैं या केंद्र के प्रतिनिधि? क्या एक साधारण नागरिक, जिसका नाम लिस्ट से कट गया है, सीधे इनसे शिकायत कर सकता है? आइए, 10 आसान सवालों में ईआरओ की शक्ति, नियुक्ति और आपकी कानूनी पहुंच को विस्तार से समझते हैं.

ERO और मतदाता सूची विवाद: 10 जरूरी सवाल-जवाब

1. ERO का पूरा नाम क्या है और इनका मुख्य काम क्या है?
ERO का मतलब ‘इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर’ (निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी) होता है. इनका मुख्य कार्य किसी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची तैयार करना और उसे अपडेट करना है.

2. क्या ERO केंद्र सरकार के अधिकारी होते हैं या राज्य के?
ईआरओ आमतौर पर राज्य सरकार के राजपत्रित अधिकारी (जैसे एसडीएम या एडीएम) होते हैं. चुनाव आयोग राज्य सरकार के परामर्श से इन्हें इस पद के लिए नामित करता है.

3. क्या ERO सीधे चुनाव आयोग (ECI) के नियंत्रण में काम करते हैं?
हां, चुनावी ड्यूटी के दौरान ये अधिकारी सीधे चुनाव आयोग के प्रति जवाबदेह होते हैं. इन्हें हटाना या नियुक्त करना आयोग के निर्देशों पर ही होता है.

4. बंगाल विवाद में ERO पर क्या आरोप लगे हैं?
बंगाल में याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ये अधिकारी मनमानी कर रहे हैं और राजनीतिक दबाव में वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटा रहे हैं.

5. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या टिप्पणी की है?
कोर्ट ने साफ किया कि ERO चुनाव आयोग द्वारा तय किए गए वैधानिक अधिकारी हैं. मतदाता सूची में किसका नाम रहेगा या किसका नहीं, यह तय करना उन्हीं का अधिकार क्षेत्र है.

6. बिहार में इसे लेकर चर्चा क्यों नहीं हुई और बंगाल में क्यों?
बिहार में चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक तालमेल आमतौर पर स्थापित रहता है. बंगाल में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और वोटर लिस्ट में हेरफेर के आरोपों के कारण ईआरओ की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है.

7. क्या कोई आम आदमी सीधे ERO से मिल सकता है?
बिल्कुल. यदि आपका नाम कट गया है या गलत है तो आप संबंधित ईआरओ ऑफिस में दावा या आपत्ति दर्ज कराने के लिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.

8. नाम कटने पर सुधार की प्रक्रिया क्या है?
फॉर्म 7 (नाम हटाने के खिलाफ) या फॉर्म 8 (सुधार के लिए) भरकर ईआरओ के पास जमा करना होता है. ईआरओ को आपकी बात सुनकर फैसला लेना अनिवार्य है.

9. क्या ERO के फैसले को कहीं चुनौती दी जा सकती है?
हां, ईआरओ के फैसले के खिलाफ जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) या मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पास अपील की जा सकती है.

10. क्या ERO को मनमानी करने पर सजा मिल सकती है?
यदि ईआरओ जानबूझकर या लापरवाही से ड्यूटी में चूक करते हैं तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान है.

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