today Masik Kalashtami or janki janmotsav and masik krishna Janmashtami 2026 | आज भैरव अष्टमी और जानकी जन्मोत्सव के साथ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी, जानें धार्मिक महत्व और पूजा का शुभ समय
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आज सोमवार के दिन भैरव अष्टमी, जानकी जन्मोत्सव और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का एक साथ पर्व मनाया जाएगा. भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव के साथ आज के दिन माता लक्ष्मी की अवतार सीता मां और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना करने का विधान है. आइए जानते हैं इस दिन का खास महत्व और सोमवार के दिन के शुभ व अशुभ समय के बारे में…
आज 8 फरवरी को भैरव अष्टमी या कालाष्टमी, जानकी जन्मोत्सव और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत किया जाएगा. आज फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है और इस दिन एक साथ तीन धार्मिक पर्व मनाए जाएंगे. भक्तजन इन अवसरों पर विशेष पूजा, व्रत और जागरण करते हैं. इन तीन पर्व का एक ही दिन होना बहुत शुभ माना जा रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. सभी परेशानियों से मुक्ति के लिए भैरव अष्टमी की, साहस व समृद्धि के लिए माता लक्ष्मी के अवतार सीता मां और सुख-शांति के लिए भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना करें. हालांकि आपको पूजा अर्चना में कुछ अशुभ समय का भी ध्यान रखना होगा. आइए जानते हैं भैरव अष्टमी, जानकी जन्मोत्सव और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व…
भैरव अष्टमी या कालाष्टमी 2026 – आज भैरव अष्टमी या कालाष्टमी है, जो हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है. यह भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित है. भक्त उपवास रखकर पूजा करते हैं, जो सुरक्षा, नकारात्मकता से मुक्ति और बाधाओं के निवारण के लिए की जाती है. भैरव को न्याय और सुरक्षा के देवता के रूप में जाना जाता है. इस दिन भक्तगण भगवान भैरव की पूजा-अर्चना करते हैं और उनसे जीवन में आने वाली कठिनाइयों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं. भैरव अष्टमी के दिन भगवान भैरव की सवारी कुत्ते को विशेष रूप से भोजन कराया जाता है. इसे शुभ माना जाता है और इससे भगवान भैरव की कृपा प्राप्त होती है.
जानकी जन्मोत्सव व्रत 2026 – 8 फरवरी को जानकी जन्मोत्सव भी है, जो फाल्गुन कृष्ण की अष्टमी को मनाई जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ तिथि पर माता सीता का प्राकट्य हुआ था इसलिए माता सीता के जन्म के उत्सव को सीता अष्टमी भी कहते हैं. जानकी जन्मोत्सव के दिन माता सीता के साथ भगवान राम की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है. साथ ही भक्तजन भजन-कीर्तन करते हैं और अन्न-दान का आयोजन भी करते हैं. इस पर्व के दौरान, लोग सीता माता के जीवन से प्रेरणा लेते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प करते हैं.
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मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026 – आज कालाष्टमी और जानकी जन्मोत्सव के साथ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी है. स्कंदपुराण, पद्मपुराण, नारदपुराण आदि ग्रंथों में इसका महत्व बताया गया है. भक्त लड्डू गोपाल की पूजा, भजन-कीर्तन और जागरण करते हैं, जिससे सुख, शांति और कृपा प्राप्त होती है. भक्तजन आधी रात को भगवान कृष्ण की आरती करते हैं. वे उपवास रखते हैं और भजन-कीर्तन में शामिल होते हैं. इस दिन बच्चे कान्हा के रूप में सजते हैं और चारों ओर खुशी का माहौल होता है.
दृक पंचांग के अनुसार, सोमवार को नक्षत्र विशाखा पूर्ण रात्रि तक रहेगा. वृद्धि योग 10 फरवरी की रात 12 बजकर 52 मिनट तक है. करण बालव शाम 6 बजकर 12 मिनट तक और फिर कौलव पूर्ण रात्रि तक रहेगा. चंद्रमा तुला राशि में संचार करेंगे. सूर्योदय 7 बजकर 4 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 7 मिनट पर होगा.
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त – आज के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 21 मिनट से 6 बजकर 12 मिनट तक है. अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक है. विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 26 मिनट से 3 बजकर 10 मिनट तक. गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 4 मिनट से 6 बजकर 30 मिनट तक और अमृत काल रात 10 बजकर 4 मिनट से 11 बजकर 51 मिनट तक है.
इस समय शुभ कार्य करने से बचें – अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 8 बजकर 27 मिनट से 9 बजकर 50 मिनट तक है. यमगंड सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक है. गुलिक काल दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक है. वहीं, आडल योग पूरे दिन है, इनमें शुभ कार्य वर्जित होता है.