Hindu girls in Pakistan: abduction forced marriage | conversion punishment | how muslim ppc law difference bns act | पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के अपहरण और जबरन शादी की सच्चाई
Pakistan Hindu Girl Story: पाकिस्तान में बालिग या नाबालिग हिंदू या मुस्लिम लड़कियों का अपहरण करके बलात्कार करना, जबरन शादी करना और फिर तलाक दे देना या मार देना कितना बड़ा अपराध है? क्या पाकिस्तान में भी भारत की तरह ही कानून है या फिर अलग? क्या पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों को घर से उठाकर शादी करना या बलात्कार करने की सजा, मुस्लिमों के साथ होने वाली इस तरह की घटनाओं जैसी ही है? क्या पाकिस्तान में भी भारतीय न्याय संहिता या फिर आईपीसी और सीआरपीसी की तरह कानून है? पाकिस्तान पेनल कोड (PPC) की धारा 498B के तहत जबरन शादी को अपराध माना जाता है, इसके बाद भी हिंदू लड़कियों के साथ इस तरह की घटनाएं क्यों ज्यादा हो रही हैं? जानिए जमीनी हकीकत.
पाकिस्तान में जबरन शादी करने पर कितने साल की सजा होती है?
पाकिस्तान पेनल कोड की धारा 498B के तहत जबरन शादी को अपराध माना जाता है. इसमें 3 से 7 साल की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है. इसी तरह धारा 375 बलात्कार को परिभाषित करती है और धारा 365 अपहरण को. हालांकि, अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर हिंदू और ईसाई लड़कियों के मामलों में यह पाकिस्तानी कानून कमजोर है. अक्सर धर्म परिवर्तन का दावा करके अपराध को जायज ठहरा दिया जाता है. इसी तरह अदालतें शरिया कानून का हवाला देकर पीड़िता को अपहरणकर्ता के साथ रखने का फैसला सुना देती है.
पाकिस्तानी कानून भारतीय कानून से कितना अलग है?
भारत में कानून ज्यादा सेकुलर हैं और अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा बेहतर है. संविधान की धारा 15, 25 है, लेकिन दोनों देशों में सामाजिक पूर्वाग्रह और राजनीतिक दबाव से न्याय प्रभावित होता है. पाकिस्तान में धार्मिक अदालतें और राजनीतिक प्रभाव ज्यादा हैं, जबकि भारत में हाल के एंटी-कन्वर्जन लॉज को ‘लव जिहाद’ के नाम पर विवादास्पद माना जाता है.
पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के साथ क्या होता है?
एक कहानी से समझें- यह स्टोरी साल 2012 में पाकिस्तानी हिंदू रिंकल कुमारी पर आधारित है, जो पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के अपहरण और जबरन रूपांतरण का एक प्रमुख उदाहरण है. न्यूज 18 हिंदी ने इसे एक काल्पनिक कथा के रूप में प्रस्तुत किया है, लेकिन तथ्यों पर आधारित और भारत के कानून से तुलना की है. सिंध प्रांत के छोटे से शहर मीरपुर मथेलो में रहने वाली 19 साल की रिंकल कुमारी एक साधारण हिंदू परिवार की बेटी थी. उसके पिता एक स्कूल टीचर थे और रिंकल कॉलेज जाना चाहती थी. एक रात फरवरी 2012 में कुछ लोग उसके घर में घुसे. उन्होंने रिंकल को क्लोरोफॉर्म से बेहोश किया और अपहरण कर लिया. अगले दिन, उसके परिवार को पता चला कि रिंकल को पड़ोसी नवेद शाह ने अपहरण किया है, जो मुस्लिम था.
अपहरण के बाद नवेद ने कोर्ट में क्या दावा किया था?
नवेद ने दावा किया कि रिंकल ने अपनी इच्छा से इस्लाम कबूल किया और उससे शादी की. लेकिन रिंकल के परिवार ने कहा कि यह जबरन था. रिंकल के पिता ने पुलिस में शिकायत की, लेकिन स्थानीय प्रभावशाली नेता मियां मिथु ने नवेद का साथ दिया. पाकिस्तान में ऐसे मामलों में पीपीसी की धारा 498B के बावजूद, अगर रूपांतरण का दावा हो तो कोर्ट्स शरिया का हवाला देकर पीड़िता को अपहरणकर्ता के साथ रख सकती हैं.
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
रिंकल का केस करांची हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. सुनवाई के दौरान रिंकल ने रोते हुए कहा, ‘मैं हिंदू हूं, मुझे जबरन कन्वर्ट किया गया.’ लेकिन दबाव में उसने कोर्ट में नवेद के साथ रहने का बयान दिया. सुप्रीम कोर्ट ने उसे तीन हफ्ते प्रोटेक्टिव कस्टडी में रखा, लेकिन आखिर में उसे नवेद के साथ जाने दिया.
यह मामला भारत में होता तो क्या होता?
जबकि, परिवार का कहना था कि रिंकल को धमकी दी गई थी. अगर वह वापस आई तो परिवार का कत्ल कर दिया जाएगा. अब भारत से तुलना करें. अगर यह मामला भारत में होता तो उस समय आईपीसी की धारा 366 के तहत अपहरण और शादी के लिए दंड 10 साल तक का होता. अगर रिंकल नाबालिग होती हालांकि वह 19 की है. लेकिन मान लीजिए 17 की होती भारत में नवेद पर POCSO एक्ट लागू होता, जिसमें स्टेट्यूटरी रेप की सजा आजीवन कारावास तक है.
भारत में अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा संविधान की किसा धारा के तहत होती है?
भारत में अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा संविधान की धारा 25 से होती और एनजीओ या हाई कोर्ट ज्यादा सक्रिय होते. पाकिस्तान में धार्मिक दबाव ज्यादा था, जबकि भारत में सेकुलर फ्रेमवर्क से न्याय की उम्मीद ज्यादा होती. रिंकल की स्टोरी हजारों हिंदू लड़कियों की तरह खत्म हुई. वह कभी घर नहीं लौटी. उसके परिवार ने पाकिस्तान छोड़ दिया और मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा, लेकिन न्याय नहीं मिला. यह दिखाता है कि कानून होने के बावजूद, सामाजिक और राजनीतिक दबाव कैसे अल्पसंख्यकों को प्रभावित करते हैं.
पाकिस्तान की तरह अगर नाबालिग लड़कियों का भारत में अपहरण होता तो कितनी होती सजा?
भारत की तरह पाकिस्तान में भी नाबालिग लड़की को अपहरण करके जबरन शादी करना अपराध है. पाकिस्तान में चाइल्ड मैरिज रेस्ट्रेंट एक्ट 1929 के तहत महिलाओं की शादी की न्यूनतम उम्र 16 साल है. वहीं पुरुषों के लिए 18, लेकिन सिंध प्रांत में 2013 के एक्ट और इस्लामाबाद में 2025 के नए कानून के तहत दोनों लिंगों के लिए 18 साल है. पाकिस्तान में लगभग हर साल 1,000 से अधिक अल्पसंख्यक लड़कियां अपहरण, धर्म परिवर्तन और मुस्लिम लड़के के साथ जबरन शादी का शिकार होती हैं. पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों और महिलाओं को सबसे ज्यादा अपराधों का सामना जैसे अपहरण, इस्लाम धर्म अपनाने का मजबूर करना, जबरन शादी, घरेलू दासता और यौन हिंसा से सामना करना पड़ता है. ये अपराध मुख्य रूप से सिंध प्रांत में होते हैं, जहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं.