Gangajal Rules ghar me kaise rakhein। गंगाजल की पवित्रता और घर में रखने के नियम

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Gangajal Rules: भारत में अगर किसी नदी को मां कहा गया है, तो वह सिर्फ पानी की धारा नहीं, आस्था की बहती हुई पहचान है. गंगा बचपन में घर के मंदिर में रखी छोटी-सी बोतल से लेकर अंतिम संस्कार तक, गंगाजल हर मोड़ पर हमारे साथ रहता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर गंगाजल को इतना पवित्र क्यों माना जाता है? क्यों कहा जाता है कि इसका एक छींटा भी माहौल बदल देता है? सिर्फ धार्मिक वजहें ही नहीं, बल्कि परंपराएं, अनुभव और कुछ व्यावहारिक कारण भी इसके पीछे हैं. गंगा में स्नान करने से लेकर उसके जल को घर लाने और रखने तक, शास्त्रों में कई नियम बताए गए हैं, जिन्हें आज भी लोग मानते हैं. आइए जानते हैं गंगाजल की महत्ता और उससे जुड़े जरूरी नियम, आसान और साफ शब्दों में.

सनातन परंपरा में गंगाजल का महत्व
हिंदू धर्म में गंगा को ‘पतितपावनी’ कहा गया है. मान्यता है कि गंगा का उद्गम भगवान विष्णु के चरणों से हुआ और शिव की जटाओं से निकलकर वह धरती पर आईं. इसी वजह से गंगाजल को चरणामृत के समान पवित्र माना जाता है. कहा जाता है कि गंगा दर्शन मात्र से मन हल्का होता है. कई लोग बताते हैं कि गंगा तट पर बैठते ही एक अलग तरह की शांति महसूस होती है, जो शायद शब्दों में नहीं समा पाती.

विष्णु का चरणामृत क्यों कहलाता है गंगाजल
धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के अंगूठे से निकला जल गंगा बना. यही कारण है कि गंगाजल को अमृत समान माना गया है. मान्यता है कि इसके सेवन या स्पर्श से जीवन के दोष कम होते हैं और व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता. राजा भगीरथ द्वारा गंगा को पृथ्वी पर लाने की कथा भी यही बताती है कि गंगाजल सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पीढ़ियों के उद्धार का माध्यम माना गया.

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गंगाजल कब भरना माना जाता है शुभ
शुभ तिथियां और दिन
वैसे तो गंगाजल किसी भी दिन लिया जा सकता है, लेकिन कुछ तिथियां इसे और ज्यादा पुण्यकारी मानती हैं. जैसे- अमावस्या, पूर्णिमा, एकादशी, संक्रांति, गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा.
सोमवार, महाशिवरात्रि और कुंभ जैसे पर्वों पर गंगाजल भरना विशेष फलदायी माना जाता है.

ब्रह्म मुहूर्त का महत्व
परंपरा कहती है कि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में गंगाजल भरना सबसे अच्छा होता है. इस समय वातावरण शांत होता है और जल में आध्यात्मिक ऊर्जा अधिक मानी जाती है.

घर में गंगाजल कहां और कैसे रखें
गंगाजल को घर की उत्तर दिशा में किसी साफ और पवित्र स्थान पर रखना शुभ माना जाता है. आमतौर पर लोग इसे पूजा घर में रखते हैं. पात्र की बात करें तो पीतल, तांबा या कांसे का बर्तन सबसे उपयुक्त माना गया है. प्लास्टिक की बोतल में लंबे समय तक गंगाजल रखना सही नहीं माना जाता, अगर मजबूरी में प्लास्टिक में लाया गया हो, तो घर पहुंचते ही धातु के पात्र में डाल देना चाहिए.

गंगाजल से जुड़ी आम लेकिन जरूरी सावधानियां
न करें ये गलतियां
गंगाजल लाने से पहले घर और गंगा तट पर स्नान करना जरूरी माना गया है. बिना स्नान या अशुद्ध अवस्था में गंगाजल भरने से परहेज करना चाहिए. गंगाजल को कभी भी अंधेरी, गंदी या अपवित्र जगह पर न रखें. इसे छूते समय भी साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि मान्यता है कि श्रद्धा और नियम दोनों साथ चलते हैं.

आज के समय में गंगाजल का स्थान
आज भले ही जीवन तेज हो गया हो, लेकिन गंगाजल की अहमियत कम नहीं हुई. शादी-ब्याह, गृह प्रवेश या पूजा-पाठ-हर जगह इसकी मौजूदगी बताती है कि आस्था आज भी हमारी दिनचर्या का हिस्सा है. यह सिर्फ विश्वास नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चला आ रहा अनुभव है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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