Bhanu Saptami 2026 today in ravi yog know puja vidhi or muhurat and significance of Bhanu Saptami | रवि योग में आज भानु सप्तमी, इस विधि से करें सूर्यदेव की उपासना, जानें महत्व और पूजन का शुभ मुहूर्त

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Bhanu Saptami 2026 Today: आज भानु सप्तमी का पर्व मनाया जा रहा है, इस तिथि को रथ सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है. पंचांग के अनुसार,जब शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रविवार को पड़ती है, तब भानु सप्तमी का पर्व मनाया जाता है. आज फाल्‍गुन माह के कृष्‍ण पक्ष की सप्‍तमी तिथि और दिन रविवार है. इस दिन ग्रहों के राजा सूर्य देव की पूजा-अर्चना, जप-तप और दान करने से पुण्य मिलता है और जीवन में यश-तरक्की के साथ सकारात्मकता बढ़ती है. हिंदू धर्म में सूर्यदेव को एकमात्र प्रत्यक्ष देवता माना जाता है और इनको भगवान विष्णु का अंशावतार भी माना जाता है. सूर्यदेव को विष्णु की आंखों से उत्पन्न माना गया है, जो संसार को प्रकाश, ऊर्जा और जीवन प्रदान करते हैं.

भानु सप्तमी का महत्व
भानु सप्तमी को रवि सप्तमी या रथ सप्तमी भी कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की विधि-विधान से पूजा, अर्घ्य और दान करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है, बीमारियां दूर होती हैं और जीवन की हर बाधा खत्म हो जाती है. कारोबार में तरक्की होती है, धन-धान्य की वृद्धि होती है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. भानु सप्तमी के दिन विशेषकर महिलाएं व्रत रखती हैं और भगवान सूर्य की पूजा करती हैं. इस व्रत का पालन करने से संतान प्राप्ति और संतान की लंबी आयु का वरदान मिलता है. साथ ही, यह व्रत घर में सुख-शांति और समृद्धि को बनाए रखने में सहायक होता है.

भानु सप्तमी पर शुभ योग
आज पंचांग के अनुसार सूर्योदय 7 बजकर 5 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 6 मिनट पर होगा. कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि 9 फरवरी सुबह 5 बजकर 1 मिनट तक रहेगी. नक्षत्र स्वाती रहेगा और योग गण्ड. आज भानु सप्तमी पर रवि योग भी बन रहा है, जो सूर्यदेव को समर्पित योग है. इस शुभ दिन पर रवि योग के होने से आज के दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. भानु सप्तमी पर रवि योग के साथ गण्ड और वृद्धि योग भी रहने वाला है.

भानु सप्तमी पूजा मुहूर्त
सूर्य देव को अर्घ्य देने का सबसे अच्छा समय सूर्योदय के साथ ही है. ब्रह्म मुहूर्त 5 बजकर 21 मिनट से 6 बजकर 13 मिनट पर होगा. अभिजित मुहूर्त 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट और विजय मुहूर्त 2 बजकर 26 मिनट से 3 बजकर 10 मिनट तक है, जो अति शुभ माना जाता है.

भानु सप्तमी पूजा विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव को तांबे के लोटे में जल भरकर, उसमें लाल फूल, लाल चंदन या रोली, अक्षत मिलाकर जल देना चाहिए. इस दौरान लाल वस्त्र पहनना शुभ होता है. सूर्य देव को पूर्व दिशा की ओर मुंह करके जल अर्पित करें और ॐ सूर्याय नमः या सूर्य गायत्री मंत्र का जाप करें. इस दिन दान का भी विशेष महत्व है. इसके लिए गेहूं, गुड़, तांबा, लाल कपड़ा या गन्ना दान करना श्रेयस्कर होता है. भानु सप्तमी पर सूर्य देव की आराधना से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है.

भानु सप्तमी पर इस समय ना करें शुभ काम
भानू सप्तमी पर अशुभ समय का विचार भी महत्वपूर्ण है. रविवार को राहुकाल शाम 4 बजकर 43 मिनट से 6 बजकर 6 मिनट तक रहेगा, यमगंड 12 बजकर 35 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक और गुलिक काल 3 बजकर 21 मिनट से 4 बजकर 43 मिनट तक है. इसलिए इस दौरान पूजा या कोई नया या शुभ कार्य न करें.

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