‘ओ रोमियो’ पर हुसैन उस्तरा की बेटी का बड़ा आरोप, फिल्म बैन करने की मांग- ‘क्राइम रोकने में पुलिस की मदद की’
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फिल्म ‘ओ रोमियो’ कानूनी पचड़े में फंस गई है क्योंकि हुसैन उस्तरा की बेटी सनोबर शेख ने कोर्ट में फिल्म की रिलीज रोकने के लिए याचिका दायर की है. सनोबर का आरोप है कि फिल्म में उनके पिता को गलत तरीके से हिंसक और महिलाओं से बदतमीजी करने वाले माफिया के रूप में दिखाया गया है. हुसैन जैदी की किताब पर आधारित इस फिल्म के तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया है. सनोबर ने मांग की है कि या तो उनके पिता का जिक्र पूरी तरह हटाया जाए या विवादित सीन को फिल्म से बाहर किया जाए, ताकि उनके परिवार की इमेज खराब न हो.

फिल्म में शाहिद लीड रोल में हैं. (फोटो साभार: ians)
नई दिल्ली: शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की अगली फिल्म ‘ओ रोमियो’ अपनी रिलीज से पहले ही गंभीर कानूनी विवादों में घिर गई है. हुसैन उस्तरा की बेटी सनोबर शेख ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है. सनोबर का आरोप है कि फिल्म में उनके पिता से प्रेरित किरदार को बेहद आपत्तिजनक और गलत तरीके से पेश किया गया है. उनका तर्क है कि शाहिद कपूर द्वारा निभाया गया यह पात्र उनके पिता की असली इमेज के बिल्कुल उलट है, जिससे उनके परिवार के सम्मान को ठेस पहुंच रही है. यह विवाद तब और गहरा गया जब फिल्म का ट्रेलर सामने आया, जिसे देखने के बाद परिवार ने कानूनी कार्यवाही करने का निर्णय लिया.
सनोबर शेख ने आईएएनएस से बातचीत में खुलासा किया कि फिल्म में उनके पिता को एक आक्रामक, हिंसक और महिलाओं से बदतमीजी करने वाले व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है. सनोबर के अनुसार, उनके पिता हुसैन उस्तरा एक नेक इंसान थे, जिन्होंने अपराध खत्म करने के लिए पुलिस की मदद की थी. वे इतने भरोसे लायक थे कि सरकार ने उन्हें बुलेटप्रूफ जैकेट और लाइसेंसी हथियार तक दिए थे. सनोबर का कहना है कि एंटरटेनमेंट के नाम पर किसी मृत व्यक्ति की इमेज को धूमिल करना न्यायसंगत नहीं है, खासकर तब जब वह व्यक्ति समाज में अच्छा योगदान दे चुका हो.
किताब पर आधारित है फिल्म ‘ओ रोमियो’
फिल्म की कहानी हुसैन जैदी की मशहूर किताब ‘माफिया क्वींस ऑफ मुंबई’ पर आधारित बताई जा रही है, लेकिन सनोबर का दावा है कि इसमें तथ्यों को बुरी तरह तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है. उन्होंने एक चौंकाने वाला उदाहरण देते हुए बताया कि फिल्म में एक महिला किरदार को उनके पिता की ‘गर्लफ्रेंड’ के रूप में दिखाया जा रहा है, जबकि असल जिंदगी में वह महिला उनके पिता की बहन के समान थी. सनोबर का कहना है कि उनके पिता को गुजरे 28 साल हो चुके हैं, लेकिन आज इस फिल्म के कारण उनके बच्चों और समाज को जवाब देना भारी पड़ रहा है. उन्हें डर है कि इस काल्पनिक इमेज से लोग उनके पिता के असली इमेज पर उंगली उठाएंगे.
सनोबर की मेकर्स से अपील
सनोबर की मांग है कि या तो फिल्म से उनके पिता का नाम और संदर्भ पूरी तरह हटा दिए जाएं या फिर फिल्म रिलीज से पहले उन्हें दिखाई जाए, ताकि विवादित और झूठे सीन्स को हटाया जा सके. उनका कहना है कि अगर कहानी को महज ‘फिक्शन’ भी बताया जाए, तब भी लोग इसे उनके पिता से ही जोड़कर देखेंगे. फिलहाल, यह मामला अदालत में है और सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मेकर्स सनोबर की मांगों को स्वीकार करते हैं या फिल्म की रिलीज में देरी होगी. यह विवाद एक बार फिर फिल्मी गलियारों में ‘बोलने की आजादी’ और ‘निजी सम्मान’ के बीच की बहस को तेज कर गया है.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें