आखिर गुड़ वाली चाय क्यों फट जाती है? चीनी में क्यों नहीं, क्या इसके पीछे का साइंस

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चाय बनाते हुए एक शख्स ने जब उबलती हुई चाय के दूध में गुड़ डाला तो ये तुरंत फट गई. ये काम उसने चाय के उबलने से पहले भी किया और चाय उबलने के बाद. तो उसने ये सवाल पूछना शुरू किया कि आखिर ऐसा क्यों होता है. आमतौर पर चाय में गुड़ डालते ही दूध का फटना आम बात है. बहुत कम मौकों पर ऐसा होता है जबकि चाय सही सलामत बन जाए. तो ऐसा क्यों होता है कि चीनी डालने पर चाय का दूध नहीं फटता और गुड़ डालने पर हो जाता है.

ये एक बहुत ही सामान्य समस्या है जो अक्सर हम सभी के किचन में होती है. दरअसल चाय में गुड़ डालते ही दूध का फटना कोई जादू नहीं, बल्कि रसायन विज्ञान है यानि साइंस है. क्या आपने कभी सोचा कि ऐसा चीनी के साथ क्यों नहीं होता.

क्या है इसका साइंस

चाय में गुड़ डालने पर दूध फटने के पीछे अम्लता यानि एसिडिटी मुख्य वजह है. चीनी के विपरीत गुड़ एक प्राकृतिक और कम रिफाइंड उत्पाद है. इसमें प्राकृतिक रूप से कुछ मात्रा में मैलिक एसिड और अन्य कार्बनिक एसिड होते हैं. दूध में ‘केसीन’ नाम का प्रोटीन होता है. जैसे ही आप गर्म चाय में गुड़ डालते हैं तो गुड़ में मौजूद एसिड दूध के संपर्क में आता है.

गर्मी और एसिड का मेल दूध के प्रोटीन को जमा देता है, जिससे दूध फट जाता है. चीनी रिफाइंड होती है. उसमें एसिड नहीं होता, इसलिए वह दूध को नहीं फाड़ती.

गुड़ वाली चाय को फटने से कैसे बचाएं?

चाय को पूरी तरह पका लें. दूध डालने के बाद जब चाय तैयार हो जाए, तब गैस बंद कर दें. गैस बंद करने के बाद ही गुड़ डालें और मिलाएं. गुड़ को कद्दूकस करके या पाउडर के रूप में डालें ताकि वह जल्दी घुल जाए. अगर आप उसे देर तक उबालेंगे, तो फटने के चांस बढ़ जाएंगे. नए गुड़ में एसिड की मात्रा अधिक होती है. पुराने या सूखे गुड़ से चाय फटने की संभावना कम होती है.

और कब फट सकती है आपकी चाय

गुड़ के अलावा भी ऐसी कई स्थितियां हैं जिनमें आपकी ‘नॉर्मल’ दूध की चाय अचानक फट सकती है. इसके पीछे भी रसायन विज्ञान यानि केमस्ट्री साइंस की वजह होती है. अगर अदरक का गलत इस्तेमाल किया गया. अदरक में ‘प्रोटीयोलाइटिक एंजाइम्स’ होते हैं जो दूध के प्रोटीन को तोड़ सकते हैं. अगर आप दूध डालने के बाद अदरक डालकर उसे बहुत देर तक उबालते हैं, तो दूध फट सकता है. अदरक को हमेशा पानी में पहले अच्छी तरह उबाल लें, फिर दूध डालें.

कभी-कभी बहुत ज्यादा तुलसी उबालने से भी दूध फट जाता है क्योंकि इसमें भी मामूली अम्लता होती है. इलायची या दालचीनी जैसे मसाले अगर पुराने हों या उनमें नमी लग गई हो, तो भी वे दूध की बनावट बिगाड़ सकते हैं. कभी-कभी दूध देखने में ठीक लगता है लेकिन चाय में जाते ही फट जाता है. क्योंकि दूध के अंदर बैक्टीरिया धीरे-धीरे लैक्टिक एसिड बनाते रहते हैं. भले ही दूध अभी पूरी तरह फटा न हो, लेकिन उसकी पीएच वैल्यू कम हो जाती है. जैसे ही ऐसा दूध गर्म चाय के संपर्क में आता है, वह तुरंत फट जाता है.

कितने देशों में दूध की चाय लोकप्रिय

दूध वाली चाय दुनिया के एक बड़े हिस्से में बहुत लोकप्रिय है. हालांकि इसके पीने का तरीका और नाम हर देश में अलग हो सकता है, लेकिन मुख्य रूप से दुनिया के लगभग 40 से 50 देशों में दूध की चाय किसी न किसी रूप में प्रमुखता से पी जाती है.

भारत और पाकिस्तान की मसाला चाय और दूध पत्ती दुनिया भर में मशहूर है. यहां चाय का मतलब ही दूध वाली चाय होता है. बांग्लादेश और नेपाल में भी भारत की तरह ही कड़क दूध वाली चाय पी जाती है.

ताइवान को ‘बबल टी’ का जन्मदाता माना जाता है. चीन के हांगकांग में ‘हांगकांग स्टाइल मिल्क टी’बहुत प्रसिद्ध है. थाईलैंक की ‘थाई मिल्क टी’ अपने नारंगी रंग और कंडेन्स्ड मिल्क के स्वाद के लिए जानी जाती है. मलेशिया और सिंगापुर में तेह तारिक पी जाती है, ये भी एक तरह की चाय है. दूध वाली है. इसमें इसे एक बर्तन से दूसरे बर्तन में ऊंचाई से गिराकर झागदार बनाया जाता है. जैसे कॉफी को भी करते हैं. मंगोलिया की पारंपरिक चाय ‘सूते त्साई’ में दूध के साथ नमक और कभी-कभी मक्खन भी डाला जाता है.

ब्रिटेन में अंग्रेजों को चाय में दूध डालकर पीने का बहुत शौक है. वे अक्सर काली चाय में ऊपर से थोड़ा दूध मिलाकर पीते हैं.आयरलैंड में प्रति व्यक्ति चाय की खपत दुनिया में सबसे अधिक है. वो भी दूध वाली चाय पसंद करते हैं. यमन जैसे देशों में ‘अदनी चाय’ काफी लोकप्रिय है, जो दूध और मसालों के साथ बनाई जाती है.

दुनिया के सबसे ज्यादा चाय पीने वाले देशों में एक तुर्की है, लेकिन वहां लोग चाय में दूध बिलकुल नहीं डालते. वे कड़क लाल चाय बिना दूध की पीना पसंद करते हैं.

शाही कश्मीरी नमकीन चाय

वैसे तो भारत में हर नुक्कड़ पर चाय मिलती है, लेकिन जब बात सबसे अनोखी और शाही दूध वाली चाय की आती है, तो बाजी मारता है कश्मीर. कश्मीर में एक बेहद खास चाय पी जाती है जिसे ‘नून चाय’ या ‘गुलाबी चाय’ कहते हैं. यह रेगुलर ब्राउन चाय से एकदम अलग है.

कश्मीर की ये चाय भूरी नहीं बल्कि गुलाबी रंग की होती है. हैरान करने वाली बात ये है कि ये मीठी नहीं बल्कि नमकीन होती है. नून चाय जम्मू-कश्मीर की स्पेशल चाय है. कश्मीर में इसे गुलाबी चाय और जम्मू में इसे देसी चाय कहा जाता है. इसका रंग गाढ़ा गुलाबी होता है. इसे बनाने में नॉर्मल चाय से ज्यादा समय लगता है. दरअसल ये चाय की हरी पत्तियों को सूखा कर तैयार की जाती है. पानी में इन्हें मिलाया जाता है.

पानी को आधा होने तक उबाला जाता है. फिर इसमें दूध, चीनी, नमक को मिलाकर चाय तैयार की जाती है. हालांकि कुछ लोग इसमें बेकिंग सोडा भी मिलाते हैं, लेकिन बहुत कम मात्रा में. वहीं कुछ लोग इसे स्टोर करके भी रख लेते हैं और कहवा की तरह पीते हैं. इसका स्वाद लाजवाब होता है. स्थानीय लोगों का दावा है कि इसे पीने से गैस जैसी समस्या नहीं होती है और यह सर्दियों में शरीर को गर्म रखती है. कई स्थानीय लोग इसमें कूटा हुआ ड्राई फ्रूट्स भी ऊपर से डाल देते हैं.

हैदराबादी ईरानी चाय भी डिफरेंट

इसे बनाने का तरीका बिल्कुल अलग है. इसमें दूध और चाय को अलग-अलग बर्तनों में पकाया जाता है. दूध को इतना उबाला जाता है कि वह गाढ़ा होकर रबड़ी जैसा हो जाए, फिर उसे चाय के काढ़े के साथ मिलाया जाता है.

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