पति-पत्नी पर बनी वो फिल्म, जिसमें थी रिश्ते निभाने की सीख, कपल इसे देख लें तो कभी नहीं होगा तलाक – divorce based best short hindi movie Kaash on YouTube touched heart chords sensitively cites separation reasons Indian Young Couple must watch film
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Divorce Based Best Hindi Movie : पति-पत्नी के रिश्तों पर बॉलीवुड में कई फिल्में बनी हैं. कई फिल्मों ने जिंदगी की सीख दी. रिश्ते निभाने का तरीका सिखाया. यह एक कड़वा सच है कि मेट्रो शहरों की व्यस्त जिंदगी, वर्किंग पति-पत्नी, ऑफिस की टेंशन के बीच कपल के बीच तलाक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. जिंदगी की भागदौड़ रिश्ते संभालने का मौका ही नहीं दे रही है. 5 साल पहले ऐसी ही 21 मिनट की एक शॉर्ट फिल्म यूट्यूब पर रिलीज हुई थी जिसे हर कपल को एकबार जरूर देखना चाहिए. फिल्म बताती है कि जिस शख्स के हम सबसे करीब होते हैं, कई बार उसी से घुटन होने लगती है. पति-पत्नी के बीच अहंकार कैसे रिश्तों को कच्चे धागे की तरह तोड़ देता है. आइये जानते हैं इस फिल्म से जुड़े कुछ फैक्ट्स……
‘अजीब फितरत है इंसान की. ज्यादा नजदीकियां उसे अपनों से दूर कर देती हैं. घुटन पैदा करती हैं. अपनों से जुदाई उसे पल-पल मारती है. रिश्ते कभी जीतकर नहीं निभाए जाते. रिश्तों की खुशहाली के लिए झुकना पड़ता है. सहना पड़ता है. हारना पड़ता है. कभी-कभी दिल और दिमाग की लड़ाई में दिमाग जीत जाता है लेकिन रिश्ता पीछे छूट जाता है….’ यह उस शॉर्ट फिल्म के शुरुआती डायलॉग हैं जो बैकग्राउंड में चलते हैं. पत्नी का एक्सीडेंट हो चुका है. अस्पताल में एडमिट कराने के लिए पति उसे रोते हुए ले जा रहा है. पत्नी से पति से तलाक लिया ही था कि उसका एक्सीडेंट हो गया. जी हां, हम बात कर रहे हैं शॉर्ट हिंदी फिल्म ‘काश’ की जो कि यूट्यूब पर फ्री में उपलब्ध है.
‘काश’ फिल्म का डायरेक्शन मुकेश शर्मा ने किया था. प्रोड्यूसर नीलम शर्मा थीं. फिल्म में शिवानी ठाकुर (लीड एक्ट्रेस), मोहन शर्मा (लीड एक्टर), रजनी बजाज, यथार्थ गुप्ता, विकास नेगी प्रेम सिंघानिया जैसे कलाकार नजए आए थे. फिल्म की कहानी अस्पताल से शुरू होती है. लीड एक्ट्रेस शिवानी ठाकुर ने दीपिका का रोल निभाया था. दीपिका का एक्सीडेंट हो गया है, वो स्ट्रेचर पर लेटी है और उसके मन में दांपत्य जीवन से जुड़ी कई कहानियां उमड़-घुमड़ रही हैं. फिल्म के अगले ही सीन में कहानी चार साल पहले फ्लैशबैक पर जाती है. दीपिका ने अपने पति यश का घर छोड़कर जा रही है. वो अपने साथ बेटे को भी ले जाती है. फिल्म की कहानी फ्लैशबैक में चलती है. फिल्म का सेटअप मेट्रो शहरों का है. यश काम के सिलसिले में ऑफिस से देर से लौटता है तो दोनों के बीच बहस होती है.
रोजाना की बहस रूटीन जिंदगी का हिस्सा बन जाती है. दीपिका पति पर एक्स्ट्रा मटेरियल अफेयर का आरोप लगाती है. यश कहता भी है कि वो जो भी कुछ भी कर रहा है लैविश लाइफ के लिए कर रहा है. फ्लैट की ईएमआई भरने के लिए कर रहा है. वो दीपिका को अहसास दिलाता है कि उसी की कमाई से वो किटी पार्टी कर पाती है. दोनों की तकरार एकदूसरे का दिल छलनी कर देती है. दीपिका घर गाड़ी में बैठकर जा रही है. उसके मन में बार-बार पति के साथ बिताए पल याद आ रहे हैं. खट्टी-मीठी यादें दिमाग में रह-रहकर आती हैं. दीपिका अपनी मां के घर लौट आती है. मां दोनों के बीच सुलह कराने के बजाय तलाक की सलाह देती है. चार साल तक केस चलता है और आखिरकार तलाक हो जाता है.
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दोनों की शादी के 12 साल हो चुके थे. पूरे चार साल बाद दीपिका अपनी मां के साथ पति के फ्लैट में अपना सामान लेने जाती है. पैकर्स एंड मूवर्स साथ में लेकर जाती है. पति के फ्लैट में दीपिका पहुंचती है. बैंकग्राउंड में उसके मन में चली रही बातें सुनने को मिलती हैं. वो कहती है, ‘मैंने इस घर को कितनी मेहनत से सजाया था. यहां की हर चीज में मेरी जान बसती है.पुरानी यादें ताजा हो गईं. हम तीनों कितने खुश थे इस छोटे से घर में. ना जाने किसकी नजर लग गई. कितनी शिद्दत से यश ने मेरे सपनों को पूरा किया था.’
दीपिका अभी पुरानी यादों में खोई ही थी कि अचानक यश पास आता है और कहता है कि दीपिका जो चाहिए, वो इस घर से ले लो. दीपिका फिर से मन ही मन कहती है, ‘एक बार नजर उठाकर तो देख लो यश, आज मैंने तुम्हारी मन पसंद साड़ी पहनी है. तुम्हें याद है, पहले तुम मुझसे इसी साड़ी को पहनने की जिद किया करते थे.’ उधर यश भी मन ही मन जवाब देता है, ‘इस साड़ी में दीपिका आज भी बहुत खूबसूरत लगती हो. संसार की सबसे खूबसूरत लड़की’
इसी बीच दीपिका की मां की एंट्री होती है. वो पूछती है कि सामान कहां है? बेच दिया होगा यश ने. वो शराबी है. इस पर यश जवाब देता है कि सामान स्टोर रूम में रखा है. इसी बीच दीपिका, यश को गहने लौटाती है. इस पर यश जवाब देता है, ‘जब गहने पहनने वाली ही साथ नहीं रही तो इनका क्या करेगा. तुम्हीं रख लो अपने पास.’ यह सुनकर दीपिका हैरान रह जाती है. दीपिका फिर से पति से सवाल करती है. वो कहती है: ‘इतनी ही फिक्र थी तो तलाक क्यों दिया?’ इस पर यश कहता है : ‘साइन तो तुमने ही किए थे.’ दीपिका फिर कहती है कि ‘साइन तो तुमने भी तलाक पेपर किए थे.’ यश कहता है कि घर छोड़कर तुम गई थी. इस पर दीपिका कहती है, ‘मनाने भी तो आ सकते थे.’ यश कहता है कि तुम खुद भी आ सकती थीं. दीपिका फिर कहती है कि ‘माफी मांग सकते थे’. इस पर यश कहता है, ‘गलती तुम्हारी भी थी.’
इसी बीच दीपिका की मां आ जाती है और उसे दूर ले जाती है. वो कहती है कि यश से रिश्ता खत्म हो गया है. अब उससे बातचीत करने का कोई फायदा नहीं. दीपिका फिर भी मन ही मन कहती है, ‘यश मैं इस घर से जाना नहीं चाहती. आज मुझे मना लो.’ उधर यश भी मन ही मन कहता है, ‘मुझे छोड़कर मत जाओ दीपिका. प्लीज मत जाओ.’ दोनों अपनी बातें दिल ही में दिल में कहते हैं लेकिन होठों पर नहीं ला पाते.
पैकर्स एंड मूवर्स सामान लेकर जाने लगते हैं. यश मन ही मन कहता है, ‘दीपिका बस एक बार मुझे पलटकर देख लो.’ मन ही मन दीपिका कहती है, ‘यश मुझे एक बार रोक लो. रुकने के लिए एक बार मुझे कह दो’. दोनों के मन में बातें चलती रहती हैं, इसी बीच एक कार दीपिका को टक्कर मारकर चली जाती है. छोटी सी फिल्म बहुत बड़ा मैसेज देकर जाती है. कैसे अहंकार रिश्तों को खत्म कर देता है. कैसे दिमाग दिल पर हावी हो जाता है. जो बात दिल कहना चाहता है, उसे वो जुबान पर नहीं ला पाता. फिल्म के लास्ट सीन में दीपिका की आवाज बैकग्राउंड में आती है, ‘यश मेरी यह जिद थी कि तुम मुझे रोको. तुम्हारी यह जिद थी कि मैं रुक जाऊं. काश! हम दोनों अपना गुरुर और जिद छोड़कर रिश्ता निभा लेते. कितने खूबसूरत होते हैं ये रिश्ते जो हमारी जिंदगी को खूबसूरत और जीने लायक बनाते हैं पर अपने गुरुर के चलते हम अपने ही रिश्तों का खून कर देते हैं. दुनिया की हर खुशी हमारे दामन में थी लेकिन हमारा गुरुर हमारी खुशियों को निगल गया.’