Why Chabahar Port is Important For India| What Irani ambassador told on War Situation| ‘हम जंग नहीं…’ अमेरिका सुनते ही दहाड़े ईरानी राजदूत, चाबहार और भारत पर कही दिल जीतने वाली बात
Irani Ambassador on Chabahar Port: मिडिल ईस्ट में उथल-पुथल मचा हुआ है. अमेरिका का यूएसएस अब्राहम लिंकन अरब सागर में पहुंच चुका है. हालांकि, ईरान पर हमले की चेतावनी और युद्ध से पहले दोनों देशों के बीच ओमान में बातचीत का दौर शुरू हो चुका है. इधर बीच भारत में तैनात ईरानी राजदूत का बयन आया है. नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान ईरानी राजदूत ने एक तरफ भारत के साथ दोस्ती के कसीदे पढ़े, तो दूसरी तरफ अपने दुश्मनों को चेतावनी दे डाली. उन्होंने साफ कर दिया है कि ईरान शांति का पक्षधर जरूर है, लेकिन अगर किसी ने उसे ललकारा, तो उसका अंजाम भुगतने के लिए भी तैयार रहना होगा.
हर विकल्प मेज पर
ईरानी राजदूत ने अपने बयान बेहद सधे हुए थे. उन्होंने शुक्रवार को कहा, ‘हम किसी भी तरह का युद्ध नहीं चाहते, लेकिन हर विकल्प के लिए पूरी तरह तैयार हैं.’ यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल-अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ ईरान के रिश्ते बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं. अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानों को लादे, ईरान की सीमा पर मंडरा रहा है. ईरानी राजदूत का कहना कि वे ‘पूरी तरह तैयार हैं’, इस बयान से साफ झलकता है कि ईरान किसी भी सैन्य या कूटनीतिक दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है.
अरब सागर में अमेरिका का अब्राहम लिंकन विमान वाहक.
चाबहार: भारत-ईरान की दोस्ती का गोल्डन गेट
तनावपूर्ण माहौल के बीच, ईरानी राजदूत ने भारत के साथ अपने ऐतिहासिक और रणनीतिक रिश्तों की बात की. उन्होंने कहा कि ‘चाबहार पोर्ट’ (Chabahar Port) दोनों देशों के लिए गेम-चेंजर है. चाबहार एक बेहद महत्वपूर्ण परियोजना है. यह अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच के लिए अहम भूमिका निभा सकती है.’
भारत पर भरोसा
यह बयान भारत के लिए एक बड़ी राहत और कूटनीतिक जीत की तरह है. राजदूत ने जोर देकर कहा कि ईरान का मानना है कि भारत के साथ रिश्तों को और विस्तृत किया जाना चाहिए. यह बयान इस बात का सबूत है कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों (Sanctions) की धमकियों के बावजूद, ईरान भारत को अपना सबसे भरोसेमंद साझीदार मानता है.
कूटनीतिक मायने क्या है?
ईरानी राजदूत का यह बयान अमेरिका जैसे देशों के लिए एक कड़ा संदेश है. जहां एक ओर अमेरिका, ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने भारत के जरिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान के साथ व्यापारिक मार्ग खोलने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है. चाबहार परियोजना न केवल व्यापार के लिए बल्कि क्षेत्र में भू-राजनीतिक (Geopolitical) संतुलन बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है.
चाबहार पोर्ट से जुड़े वो 4 सवाल जिनके जवाब हर भारतीय को जानने चाहिए-
1. चाबहार पोर्ट भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर: चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से ‘संजीवनी बूटी’ के समान है. भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सामान भेजने के लिए पाकिस्तान पर निर्भर रहना पड़ता था, जो अक्सर रास्ता देने से मना कर देता था. चाबहार के जरिए भारत अब सीधे अपना सामान भेज सकता है. पाकिस्तान में चीन द्वारा विकसित किए जा रहे ‘ग्वादर पोर्ट’ (Gwadar Port) के मुकाबले चाबहार भारत को अरब सागर में एक मजबूत रणनीतिक उपस्थिति देता है. यह उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) का मुख्य द्वार है, जिससे रूस और यूरोप तक भारत का व्यापार सस्ता और तेज हो जाएगा.
2: भारत ने चाबहार पोर्ट में कितना निवेश किया है?
उत्तर: चाबाहार पोर्ट को लेकर मई 2024 में भारत और ईरान के बीच हुए 10 साल के लिए समझौता होना चाहिए. भारत ने चाबहार पोर्ट के टर्मिनल्स को विकसित करने और उपकरणों के लिए लगभग 120 मिलियन डॉलर (करीब 1000 करोड़ रुपये) का निवेश करने का वादा किया है. इसके अलावा, भारत ने बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए 250 मिलियन डॉलर की क्रेडिट विंडो (ऋण सुविधा) की पेशकश भी की है. कुल मिलाकर यह परियोजना अरबों रुपये की है.
3: चाबहार पोर्ट का असली मालिक कौन है?
उत्तर: चाबहार पोर्ट का मालिकाना हक ईरान सरकार (Ports and Maritime Organization- PMO) के पास है. भारत, ‘इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड’ (IPGL) के माध्यम से वहां के ‘शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल’ का संचालन (Operator) करता है. यानी जमीन और पोर्ट ईरान का है, लेकिन उसके एक हिस्से को चलाने और मैनेज करने का ठेका भारत के पास है.
Q4: अमेरिका क्यों चाहता है कि भारत चाबहार में निवेश करना बंद कर दे?
उत्तर: यह मामला सीधे तौर पर अमेरिका और ईरान की दुश्मनी से जुड़ा है. अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य नीतियों के कारण उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं. अमेरिका का मानना है कि अगर दूसरे देश (जैसे भारत) ईरान में निवेश करेंगे, तो ईरान की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, जिससे अमेरिकी प्रतिबंधों का असर कम हो जाएगा. हाल ही में अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी दी थी कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापारिक समझौता करेगा, उस पर प्रतिबंधों का खतरा मंडरा सकता है.