दूध से सना आटा, सास-बहू मिलकर कर रहीं स्पेशल लिट्टी-चोखा तैयार, बेटा भी 95 हजार की नौकरी छोड़ बिजनेस से जुड़ा
बलिया: जिले की परंपरा और पहचान को जीवित रखने के लिए एक पूरा परिवार एकजुट हो चुका है. हालांकि, यह जनपद अपने बागी तेवर से देश-दुनिया में बागी बलिया के नाम से फेमस है. बात अगर यहां के देसी व्यंजन की करें, तो लिट्टी-चोखा का अपना अलग ही महत्व है. यही नहीं, लिट्टी के अंदर भरे जाने वाले सत्तू का भी बलिया से गहरा नाता रहा है.
यही कारण है कि कहीं न कहीं सरकार सत्तू को बलिया से ODOP में शामिल किया है. लगभग 95 हजार की नौकरी छोड़ एक युवा ने अपने पूरे फैमिली के साथ मिलकर लिट्टी चोखा को अलग मुकाम तक पहुंचाने की ठान लिया है. आगे इस परिवार के द्वारा बनाए लिट्टी चोखा की खासियत जानते हैं.
95 हजार की नौकरी छोड़ गांव आया बेटा
सरिता सिंह ने कहा कि P.S बनारसी बाटी चोखा की मैं एक घरेलू सदस्य हूं. इस रेस्टोरेंट को चलाने के लिए और परंपरा को जीवित रखने के लिए लगभग 95000 रुपए प्रति माह की नौकरी छोड़कर उनका बेटा इसमें लगा हुआ है और उनका पूरा परिवार ही इस लिट्टी चोखा की परंपरा को जीवित कर रहा है.
घर के बने स्पेशल सत्तू से होता है तैयार
यहां के रहने वाले लोग शुद्ध बाटी-चोखा खाने के लिए बनारस जाया करते थे, तो उन्होंने सोचा कि क्यों ना बनारस वासियों को बलिया ही बुला लें. इसी के तर्ज पर उन्होंने इस दुकान का निर्माण कराया और स्वाद को स्पेशल बनाने में लग गए. लिट्टी बनाने के लिए गाय के दूध में आटे को गूंथ यानी मला जाता है और घर का खुद से बनाया गया सत्तू डालते हैं. अब इस सत्तू को बकायदा लहसुन, नींबू, अदरक, सरसों तेल, अजवाइन, मंगरैला और आचार आदि डालकर तैयार किया जाता है.
दो प्रकार की थाली करते हैं तैयार
अब इसको तैयार आटे में भरकर ओवन में बनाया जाता है. इसके बाद लिट्टी को थोड़ा दबाकर खुद के खटाल से तैयार अपने घर के देसी घी में भिगो दिया जाता है. अब बात चुन्नी थाली की करें, जो 70 रुपए की है, इसमें दो बाटी, कटा हुआ प्याज और चोखा चटनी आदि होता है. इसके बाद नंबर आती है दूसरी थाली की, जिसे बेनजीर थाली के नाम से जाना जा रहा है. इसकी कीमत 120 रुपए होती है. इसमें रायता, दो लिट्टी, काजू दाल और विशेष प्रकार का सलाद शामिल होता है.
स्पेशल थाली में 8 आइटम
तीसरी स्पेशल बड़ी थाली, जो 180 रुपए की होती है, जिसमें पुलाव, दाल मखनी, पापड़, सलाद, एक मीठा, दो बाटी होती है, जो लगभग 7 से 8 आइटम से सजी होती है. इस परिवार की बहू अंजली सिंह ने कहा कि बाटी-चोखा यानी लिट्टी-चोखा, जो अपनी अलग पहचान रखता है. इसको लोगों के बीच लाकर बहुत अच्छा लग रहा है. खासकर लिट्टी चोखा, जो भारतीय संस्कृति में सबसे आगे आता है. सत्तू जो उक्त उपाय के द्वारा प्रॉपर अपने हाथों से बनाया जाता है.
अन्य जिलों से भी स्वाद लेने आते हैं लोग
परिवार के मुखिया और रेस्टोरेंट के मालिक प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि लिट्टी-चोखा को एक नई पहचान देकर बहुत ही अच्छा लग रहा है. इस लिट्टी-चोखा को खाने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं. जैसे नगरा, रसड़ा, गड़वार, बलिया, भरौली, बक्सर यानी बहुत दूर-दूर से लोग लिट्टी-चोखा का आनंद लेने के लिए आ रहे हैं. 26 जनवरी 2026 को ही बनारसी लिट्टी-चोखा रेस्टोरेंट का उद्घाटन हुआ था, लेकिन इतने कम दिनों में काफी फेमस हो चुका है.
सेफ्टी मैनेजर का काम करता था बेटा
चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि रेस्टोरेंट चलाने से पहले वह रत्नागिरी में सेफ्टी मैनेजर के पद पर थे, जिसमें उन्हें 95000 रुपए प्रतिमाह सैलरी मिलता था, लेकिन परिवार से दूर रहना पड़ता है. इस बिजनेस से वह काफी खुश हैं. पूरा परिवार इसमें लगा हुआ है. मन में बहुत पहले से विचार आ रहा था कि क्यों न अपने परिवार के साथ रहकर और बिना किसी दबाव के कार्य करूं, साथ ही औरों को भी रोजगार दूं.
हालांकि, वह बलिया के बेहतरीन व्यंजन लिट्टी चोखा को बेहतरीन तरीके से रिप्रेजेंट कर रहे हैं. यह रेस्टोरेंट बलिया रेलवे स्टेशन से लगभग 10 किलोमीटर दूर फेफना चौराहे से थोड़ी दूर यानि मेन रोड पर गोकुल पैलेस में स्थित है.