वर्दीवालों को ही जाल में फंसाकर करते थे लाखों की उगाही, अब दिल्ली पुलिस ने किया ऐसे गिरफ्तार – delhi police arrested two key members of traffic fraud and extortion syndicates in two separate operations

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नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने राजधानी की सड़कों पर सक्रिय एक ऐसे खतरनाक सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो कानून के रखवालों को ही अपने जाल में फंसाकर उनसे लाखों रुपये की उगाही कर रहा था. एंटी रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल ने दो अलग-अलग ऑपरेशनों में आमिर चौधरी उर्फ सिकंदर और संजय गुप्ता नामक दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है. ये दोनों आरोपी उन आपराधिक गिरोहों के सक्रिय सदस्य हैं, जिनके सरगना जीशान अली और राजकुमार उर्फ राजू मीणा को पुलिस ने पहले ही दबोच चुकी है. इस मामले में अब तक कुल 10 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जो दिल्ली में चल रहे एक बड़े ट्रैफिक एक्सटॉर्शन रैकेट की कड़ियों को जोड़ती हैं.

क्राइम ब्रांच के पहले ऑपरेशन में सुल्तानपुरी निवासी आमिर चौधरी उर्फ सिकंदर को दबोचा गया. आमिर, जीशान अली के नेतृत्व वाले सिंडिकेट का एक प्रमुख हिस्सा है. यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था. ये लोग सड़कों पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों और अन्य सरकारी अधिकारियों की गुप्त रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग करते थे. जांच में सामने आया है कि ये अपराधी पुलिसकर्मियों को बातों में उलझाकर या किसी प्रक्रिया के दौरान उनकी ऐसी क्लिप बना लेते थे, जिन्हें बाद में एडिट करके ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था. आमिर चौधरी को पुलिस ने तब गिरफ्तार किया जब वह एक सरकारी अधिकारी से जबरन वसूली की रकम लेने पहुंचा था. उसके पास से 60,000 रुपये नकद और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं.

राजू मीणा का शातिर चेला संजय गुप्ता गिरफ्तार

दूसरे ऑपरेशन में पुलिस ने संजय गुप्ता को गिरफ्तार किया, जो कुख्यात गैंगस्टर राजकुमार उर्फ राजू मीणा का करीबी सहयोगी है. राजू मीणा और रियाजुद्दीन ने संजय गुप्ता को बाकायदा ट्रेनिंग दी थी कि कैसे ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को अपने जाल में फंसाना है. ये लोग पुलिसकर्मियों को छोटे-मोटे लालच देते थे या चालान प्रक्रिया के दौरान उन्हें उकसाकर उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग कर लेते थे. बाद में इन वीडियो में हेरफेर कर पुलिसकर्मियों को विभागीय जांच, सस्पेंशन और विजिलेंस की कार्रवाई की धमकी दी जाती थी. संजय गुप्ता एक ट्रांसपोर्टर है और वह इस तकनीकी जानकारी का उपयोग कर बड़े पैमाने पर वसूली कर रहा था.

स्टिकर और अवैध तंत्र का खुलासा

इस पूरे मामले की शुरुआत 29 अप्रैल 2025 को हुई थी, जब दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के एक जवान ने एक कमर्शियल एलजीवी को रोका. वाहन चालक ने चालान से बचने के लिए एक फर्जी स्टिकर दिखाया, जिस पर ’03 मार्च’ लिखा था. चालक का दावा था कि इस स्टिकर वाले वाहनों का चालान नहीं होता. जब क्राइम ब्रांच ने इसकी गहराई से जांच की और ड्राइवरों के व्हाट्सएप ग्रुप खंगाले, तो एक चौंकाने वाला सच सामने आया. जीशान अली का गैंग कमर्शियल वाहनों के मालिकों से पैसे लेकर उन्हें सुरक्षा का झूठा भरोसा देता था और साथ ही ट्रैफिक पुलिस को डराने के लिए एक समानांतर सिस्टम चला रहा था. पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 112 के तहत संगठित अपराध सिंडिकेट का मामला दर्ज किया है.

राजकुमार उर्फ राजू मीणा 2015 से अपराध की दुनिया में सक्रिय है. वह इतना दुस्साहसी था कि उसने पुलिसकर्मियों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया. राजू और उसके साथी पुलिसकर्मियों को भ्रष्टाचार के झूठे जाल में फंसाने की धमकी देकर मोटी रकम वसूलते थे. इस गिरोह की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इनके खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) और बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. राजू मीणा को 8 दिसंबर 2025 को ही गिरफ्तार कर लिया गया था और अब उसके सहयोगियों की धरपकड़ जारी है.

क्राइम ब्रांच की टीम और बरामदगी

इन सफल ऑपरेशनों को एसीपी संजय कुमार नगपाल के करीबी पर्यवेक्षण में इंस्पेक्टर अरुण सिंधु और इंस्पेक्टर के.के. शर्मा के नेतृत्व वाली एक विशेष टीम ने अंजाम दिया. टीम में एसआई अमित कुमार, एसआई मनोज, और कई हवलदार व सिपाही शामिल थे. पुलिस ने आरोपियों के पास से अब तक भारी मात्रा में नकदी, मोबाइल फोन और कूरियर रसीदें बरामद की हैं, जो उनके वसूली नेटवर्क के सबूत हैं. डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) संजीव कुमार यादव ने बताया कि ये गिरफ्तारियां दिल्ली पुलिस के उन प्रयासों का हिस्सा हैं, जो वर्दी की गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाले और सरकारी तंत्र को ब्लैकमेल करने वाले अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे हैं.

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