शेयर मार्केट निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी, देवास में साइबर गैंग बेनकाब
देवास. ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत देवास पुलिस ने ऐसे संगठित साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो फर्जी निवेश स्कीम के नाम पर देशभर के लोगों को निशाना बना रहा था. यह गिरोह युवाओं को लालच देकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल करता था और इन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था. देवास पुलिस ने इस मामले में 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से नकद राशि, बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज और लग्जरी कार जब्त की गई है. इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ राज्य पुलिस की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है.
ऑपरेशन मैट्रिक्स में क्या-क्या बरामद हुआ
पुलिस ने नौ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनके कब्जे से भारी मात्रा में डिजिटल और वित्तीय सबूत जब्त किए हैं. इसमें 2,00,000 रुपये नकद, 19 एंड्रॉइड मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज और कई एटीएम कार्ड, एक लग्जरी कार, दर्जन भर बैंक खाते मिले हैं. इसके साथ ही 13,00,000 रुपये साइबर ठगी की राशि बैंक खातों में होल्ड कराई गई है.
म्यूल अकाउंट्स से करोड़ों की साइबर ठगी
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और अलग-अलग राज्यों में ठिकाने बदलकर काम करता था. आरोपी युवाओं को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते किराए पर लेते थे. इन खातों में साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर कराई जाती थी, जिससे मुख्य ठग कानून की पकड़ से बाहर रहते थे. एनसीआरपी पोर्टल के जरिए 13 लाख रुपये की राशि को होल्ड कराया गया है. पुलिस के मुताबिक, कुल मिलाकर लगभग 30 लाख रुपये का चोरी किया गया सामान जब्त किया गया है.
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के चार से पांच आरोपी इंदौर के रहने वाले हैं. सभी आरोपी आपस में टेलीग्राम चैनल्स और ग्रुप्स के जरिए जुड़े हुए थे. इन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से डार्क वेब लिंक तक साझा किए जा रहे थे. पुलिस का कहना है कि टेलीग्राम जैसे ओपन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल साइबर ठगी की आपराधिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए किया गया.
1930 साइबर हेल्पलाइन या 112 पर शिकायत दर्ज कराएं
एसपी देवास ने स्पष्ट कहा कि यदि कोई व्यक्ति बैंक खाता किराए पर लेने या कमीशन का लालच देता है, तो तुरंत उसकी सूचना पुलिस को दें. 1930 साइबर हेल्पलाइन या 112 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. यदि कोई व्यक्ति लालच में आकर अपना खाता देता है और उसमें ठगी की रकम ट्रांसफर होती है, तो वह भी अपराध में समान रूप से भागीदार माना जाएगा.