Hindu last rites ritual ।अंतिम संस्कार परंपरा

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Hindu Last Rites Ritual: भारतीय परंपराओं में हर रिवाज के पीछे कोई न कोई भाव, सोच और अनुभव जुड़ा होता है. जन्म से लेकर मृत्यु तक इंसान कई संस्कारों से गुजरता है, और हर संस्कार इंसान और परिवार को भावनात्मक सहारा देता है. जब कोई अपना इस दुनिया से विदा होता है, उस समय घर का माहौल दुख, यादों और श्रद्धा से भरा होता है. ऐसे समय में लोग अंतिम संस्कार से पहले मृत व्यक्ति के पैर छूते हैं. बहुत से लोगों के मन में यह सवाल आता है कि जब इंसान अब जीवित नहीं रहा, तो उसके पैर क्यों छुए जाते हैं? क्या यह सिर्फ परंपरा है या इसके पीछे कोई गहरी भावना भी है? यह उस व्यक्ति के प्रति अंतिम सम्मान, प्यार और कृतज्ञता दिखाने का तरीका माना जाता है. साथ ही यह पल परिवार को मानसिक रूप से विदाई स्वीकार करने में भी मदद करता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

1. अंतिम सम्मान और आभार जताने का तरीका
जब कोई अपना जीवन भर परिवार के लिए मेहनत करता है, प्यार देता है, मार्ग दिखाता है, तो उसके जाने के बाद दिल में एक खालीपन रह जाता है. पैर छूना यह दिखाता है कि हम उनके योगदान को मानते हैं. यह एक मौन “धन्यवाद” जैसा होता है. व्यक्ति अब बोल नहीं सकता, लेकिन हमारे इस भाव से सम्मान प्रकट होता है.

2. बड़ों के संस्कार से जुड़ी सोच
हमारे घरों में बचपन से सिखाया जाता है कि बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए. यह आदर का संकेत है. वही भाव यहां भी जुड़ा होता है. फर्क बस इतना है कि यह आखिरी बार होता है. लोग मानते हैं कि जीवन में जैसे हमने उनका सम्मान किया, वैसे ही विदाई में भी करना चाहिए.

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3. अंतिम आशीर्वाद की मान्यता
धार्मिक सोच के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा एक नई यात्रा पर निकलती है. कुछ लोग मानते हैं कि इस समय आत्मा सूक्ष्म रूप में आसपास होती है. ऐसे में पैर छूकर लोग उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं, ताकि जीवन में शांति और सही राह मिले. यह विश्वास लोगों को मानसिक सहारा देता है.

4. आत्मा की शांति के लिए भाव
जब परिवार के लोग पैर छूते हैं, तो मन ही मन प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्मा को सुकून मिले. यह विदाई का एक शांत तरीका है. लोग अपने दुख को रोककर, आंखों में आंसू लिए, उन्हें प्रेम से विदा करते हैं. यह पल भावनाओं से भरा होता है.

5. ऊर्जा से जुड़ी पारंपरिक धारणा
पुरानी मान्यताओं में पैरों को शरीर की ऊर्जा का केंद्र माना गया है. जीवित अवस्था में बड़ों के पैर छूने से सकारात्मक ऊर्जा मिलने की बात कही जाती है. इसी सोच को लोग मृत्यु के बाद भी भाव के रूप में जोड़ते हैं. यहां विज्ञान से ज्यादा भावनात्मक जुड़ाव काम करता है.

6. दिल को सुकून देने वाला पल
किसी अपने को खोना आसान नहीं होता. अंतिम बार पैर छूना, उनके चेहरे को देखना, यह सब मन को धीरे-धीरे सच्चाई स्वीकार करने में मदद करता है. यह एक तरह का क्लोजर होता है, जिससे अंदर का दर्द थोड़ा हल्का होता है.

7. परिवार को जोड़ने वाली परंपरा
ऐसे समय में सारे रिश्तेदार एक साथ खड़े होते हैं. सब एक ही भाव में जुड़े होते हैं. पैर छूने की यह क्रिया सबको एक जैसा महसूस कराती है कि हम सब मिलकर उन्हें विदा कर रहे हैं.

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