Dahi Khakar Budget pesh karengi Nirmala Sitharaman। कहीं जाने से पहले हमारे समाज में दही क्यों खाते हैं लोग

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budget 2026 : निर्मला सीतारमण का दही खाकर बजट पेश करना परंपरा और आधुनिक राजनीति का अनोखा संगम है, जो स्वास्थ्य, धार्मिक विश्वास और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है.

दही खाकर बजट पेश करने निकलीं निर्मला सीतरमण, कहीं जाने से पहले क्यों खाते दहीदही खाकर बजट पेश करने निकलीं निर्मला सीतरमण

Budget 2026 : हर साल की तरह इस साल भी देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश करने जा रही हैं. लेकिन इस बार उनकी शुरुआत कुछ अलग अंदाज में होगी बजट पेश करने से पहले उन्हें राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने दही खिला कर रवाना किया. आप सोच रहे होंगे, आखिर क्यों दही? क्या ये कोई नई परंपरा है या फिर निजी पसंद का मामला? दरअसल, हमारे समाज में दही सिर्फ स्वाद का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह धार्मिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कई मायनों में खास माना जाता है. मंदिरों में भोग में, त्योहारों में या फिर घर में किसी खुशी के मौके पर दही हमेशा से शुभता और समृद्धि का प्रतीक रहा है. जैसा कि हर छोटे बच्चे को बचपन में सिखाया जाता है, “सफाई, शुद्धता और मीठास” यही गुण दही में होते हैं. वित्त मंत्री का दही खाना केवल सांकेतिक नहीं है; यह हमारे सांस्कृतिक रीति-रिवाज और परंपराओं को संसद के मंच तक जोड़ने का एक अनोखा तरीका है.

दही और भारतीय परंपरा
दही का उल्लेख वेदों और पुराणों में भी मिलता है. इसे पवित्र माना जाता है और घर की लक्ष्मी के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले दही खाने की परम्परा सदियों पुरानी है. इससे जुड़ी मान्यता है कि मीठा दही खाने से शुरू करने जा रहे काम के शुभ फल प्राप्त होते हैं. इतना ही नहीं त्योहारों में दही का प्रयोग करना आम है जैसे कि पोंगल, गोवर्धन पूजा, या होली के समय. हमारे बुजुर्ग हमेशा कहते हैं, “दही खाने से मन और शरीर दोनों शुद्ध होते हैं.” यह सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश भी देता है साथ मिलकर खाने और खुशी बांटने का.

-शुभ शुरुआत: किसी भी जरूरी काम, इंटरव्यू या यात्रा पर जाने से पहले दही-चीनी खाना सफलता और शुभता का प्रतीक माना जाता है.
-गणेश-लक्ष्मी को प्रिय: दही को गणेशजी और लक्ष्मीजी का भोग माना जाता है, इसलिए इसे सौभाग्य और सकारात्मकता लाने वाला समझा जाता है.
-चंद्रमा से संबंध: ज्योतिष में दही का संबंध चंद्रमा से बताया गया है, जो मानसिक शांति और शीतलता प्रदान करता है.
-पंचामृत का घटक: पूजा-पाठ और विशेष अवसरों पर दही को पंचामृत में शामिल किया जाता है, जो स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ-साथ शुद्धता भी प्रदान करता है.
-मन की शांति: माना जाता है कि दही खाने से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और मन शांत रहता है.

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स्वास्थ्य और दही
दही न सिर्फ आध्यात्मिक बल्कि शारीरिक लाभ भी देता है. इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और प्रोबायोटिक्स भरपूर होते हैं. हर सुबह एक कटोरी दही खाने से पाचन बेहतर होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. यही कारण है कि वित्त मंत्री जैसी व्यस्त दिनचर्या वाली शख्सियत भी इसे प्राथमिकता देती हैं.



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