NEET PG 2025: 811 Candidates Switch to NRI Status for Clinical Seats | डॉक्टर बनने का शॉर्टकट, चाचा-ताऊ के नाम पर NRI सीटों का खेल, 3 करोड़ में मिल रही डिग्री
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NEET PG NRI Quota Conversion 2025: 811 भारतीय छात्रों ने एनआरआई कोटा पाने के लिए अपनी राष्ट्रीयता बदल ली. कम स्कोर (3.5%) के बावजूद 95 लाख सालाना फीस देकर ये छात्र महंगी क्लिनिकल सीटें पा सकेंगे. कर्नाटक में भी सरकारी सीटों को NRI कोटे के नाम पर ऊंचे दामों में बेचने पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है.
NEET PG NRI Quota: मेडिकल कॉलेज में एनआरआई सीट के नाम पर कम स्कोर वालों को भी एडमिशन मिल रहा हैनई दिल्ली (NEET PG NRI Quota Conversion 2025). मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने एनआरआई सीटों से जुड़े कुछ आंकड़े जारी किए हैं. इस डेटा ने चिकित्सा शिक्षा में मेरिट और पैसे की जंग को फिर से चर्चा में ला दिया है. साल 2025-26 के तीसरे दौर की काउंसलिंग में 811 उम्मीदवारों ने अपनी राष्ट्रीयता ‘भारतीय’ से ‘NRI’ में बदल ली है. यह बदलाव केवल नागरिकता का नहीं, बल्कि कम कॉम्पिटीशन और कम कट-ऑफ के रास्ते मंहगी सीटें हासिल करने का ‘शॉर्टकट’ नजर आ रहा है.
मेरिट पर भारी पड़ती ‘आर्थिक ताकत’
NRI कोटे की सीटें सबसे महंगी होती हैं, जिस वजह से यहां प्रतिस्पर्धा काफी कम हो जाती है. आंकड़ों के अनुसार, पहली श्रेणी (वास्तविक NRI) में 66% उम्मीदवारों का स्कोर 215 से कम है, जबकि दूसरी श्रेणी (रिश्तेदारों के जरिए स्पॉन्सर्ड) में 60% से अधिक उम्मीदवार 1.5 लाख से नीचे की रैंक वाले हैं. सामान्य परिस्थितियों में इन रैंकों पर क्लिनिकल सीटें मिलना असंभव है, लेकिन 45 लाख से 95 लाख रुपये सालाना फीस चुकाने की क्षमता इन्हें दौड़ में वापस ले आती है.
कैसे उठा रहे हैं फायदा?
अदालतों और सरकार ने एनआरआईI की परिभाषा को फ्लेक्सिबल बना दिया है. इस वजह से निजी मेडिकल कॉलेजों को काफी वित्तीय लाभ हो रहा है. अगर ‘भारतीय से NRI’ कैटेगरी में बदलाव की अनुमति नहीं होती तो ये सीटें खाली रह जातीं और उन्हें मैनेजमेंट कोटे में बदलना पड़ता, जहां फीस काफी कम होती है. अब दूर के रिश्तेदार भी प्रायोजक (Sponsor) बन सकते हैं, जिससे संपन्न परिवारों के कम स्कोर वाले छात्रों के लिए रास्ता साफ हो गया है.
कर्नाटक में राजनीति घमासान
कर्नाटक में यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है. भाजपा विधायक वाई भरत शेट्टी ने विधानसभा में आरोप लगाया कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जो सीटें कन्नड़ छात्रों को 1-1.5 लाख रुपये में मिलनी चाहिए थी, उन्हें अब 25 लाख रुपये सालाना में बेचा जा रहा है. NEET 2025 के दौरान सरकारी कॉलेजों में NRI श्रेणी की 57 सीटों में से केवल 18 ही वास्तविक NRI ने लीं, जबकि बाकी 39 सीटें गैर-NRI छात्रों को ‘NRI फीस’ पर आवंटित कर दी गईं.
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