‘नफरत फैलाने का एजेंडा’, ‘द केरल स्टोरी 2’ पर मौलाना साजिद रशीदी अटैक, लगाया प्रोपेगेंडा का आरोप
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फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ का टीजर रिलीज होते ही विवादों में आ गया. फिल्म में तीन लड़कियों के जबरन धर्मांतरण की मार्मिक कहानी दिखाई गई है, जिसे लेकर समाज दो गुटों में बंट गया है. ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने इसे नफरत फैलाने वाला ‘प्रोपेगेंडा’ बताया है. उनका दावा है कि यह फिल्म तथ्यों से परे और मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने की साजिश है. इसके विपरीत, संत समाज का मानना है कि यह फिल्म समाज की कड़वी हकीकत को उजागर करती है.
‘द केरल स्टोरी 2’ विवाद पर बंटे लोग (फोटो साभार: IANS)नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा जगत में एक बार फिर ‘धर्मांतरण’ और ‘सांप्रदायिक विमर्श’ जैसे संवेदनशील मुद्दों ने हलचल मचा दी है. विवादित फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के सीक्वल ‘द केरल स्टोरी 2’ का टीजर रिलीज होते ही बहस का बाजार गर्म हो गया है. फिल्म का विषय जितना मार्मिक है, उससे जुड़े विवाद उतने ही तीखे नजर आ रहे हैं.
फिल्म की मूल कहानी तीन लड़कियों पर बनी है, जिन्हें उल्का गुप्ता, ऐश्वर्या ओझा और अदिति भाटिया ने निभाया है. टीजर में दिखाया गया है कि कैसे इन लड़कियों के पतियों का जबरन धर्मांतरण कराया गया था. जहां फिल्ममेकर्स इसे समाज के एक कड़वे सच के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं क्रिटिक्स और एक खास समुदाय ने इसे ‘प्रोपेगेंडा’ करार दिया.
मुस्लिम धर्मगुरुओं का कड़ा रुख
फिल्म के विरोध में सबसे मुखर स्वर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी का उभरा है. उन्होंने फिल्म को ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ के बजाय ‘नफरत फैलाने का एजेंडा’ बताया है. रशीदी का तर्क है कि फिल्म में मुस्लिम युवकों द्वारा हिंदू लड़कियों को टारगेट करने की बात निराधार है. वह नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और केरल पुलिस की पुरानी रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहते हैं कि ऐसे दावों का कोई ठोस आधार नहीं है. ऐसी फिल्में मुस्लिम समुदाय की इमेज बिगाड़ने और देश में नफरत का जहर घोलने की सोची-समझी राजनीति का हिस्सा हैं.
समाज को बांटने की कोशिश!
दिलचस्प बात यह है कि जहां मुस्लिम धर्मगुरु और सोशल मीडिया का एक धड़ा इस फिल्म को बैन करने की मांग कर रहा है, वहीं संत समाज और राजनीतिक गलियारों का एक वर्ग इसके सपोर्ट में खड़ा है. लोगों का मानना है कि फिल्म ‘लव जिहाद’ और कट्टरपंथ की उस सच्चाई को उजागर करती है जिसे अक्सर दबा दिया जाता है.
दो विचारधाराओं का टकराव
‘द केरल स्टोरी 2’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं के टकराव का जरिया बन गई है. एक पक्ष इसे समाज को जागरूक करने वाली ‘हकीकत’ मान रहा है, तो दूसरा इसे समुदायों के बीच खाई गहरी पैदा करने वाला ‘हथियार’. फिलहाल, सेंसर बोर्ड और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बोलने की आजादी और सामाजिक सौहार्द के बीच संतुलन बनाए रखने की है.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें