‘बेटी गंदा गीत लिखा है’ रिकॉर्डिंग के समय शर्मिंदा हुए गीतकार, रिलीज होते ही छाए गाने, आशा भोसले को मिली बदनामी
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आशा भोसले ने अपनी जिंदादिल आवाज से भारतीय संगीत की दिशा बदली. उन्होंने बहन लता मंगेशकर से इतर बेबाक और बोल्ड गाने गाए. उन्हें शोहरत तो मिली, मगर उनके गाए कुछ गाने आकाशवाणी में बैन हुए. एक गाने की रिकॉर्डिंग के वक्त गीतकार भी अपने बोलों पर शर्मिंदा हो गए थे. आज हम आशा भोसले के उन दो गानों के बारे मे बताएंगे, जिनसे उनके करियर को नई ऊंचाई मिली, लेकिन इनसे समाज की हदों और सेंसरशिप को सीधी चुनौती भी मिली. ‘ऑल इंडिया रेडियो’ ने गानों की ‘बोल्डनेस की वजह से बैन लगा दिया था, लेकिन समय के साथ लोगों ने गानों को स्वीकारा. आज यह कालजयी गाने खूब सुने जाते हैं.

नई दिल्ली: भारतीय संगीत जगत की आशा भोसले एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने पारंपरिक गायकी की सीमाओं को तोड़कर एक नई पहचान बनाई. उन्होंने आज से करीब 54 साल पहले आशा भोसले ने दो ऐसे गाने गाए थे, जिन्होंने न सिर्फ संगीत की दुनिया में तहलका मचाया, बल्कि उस दौर के समाज और सेंसरशिप की हदों को भी चुनौती दी. गानों ने आशा भोसले को शोहरत दिलाई, लेकिन उनकी बदनामी भी हुई. गीतकार मजरूह सुल्तान पूरी को एक गाने की रिकॉर्डिंग के वक्त शर्मिंदगी भी महसूस हुई.

70 के दशक में जहां लता मंगेशकर की आवाज शालीनता और मधुरता का प्रतीक थी, वहीं आशा भोसले ने अपनी ‘वाइड वोकल रेंज’ के जरिए एक बेखौफ और मॉडर्न पहचान बनाई. उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ आरडी बर्मन से मुलाकात थी. इस जोड़ी ने मिलकर 1971 की फिल्म ‘कारवां’ का गाना ‘पिया तू अब तो आजा’ और ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ का गाना ‘दम मारो दम’ तैयार किया. ये गाने अपने दौर से बहुत आगे थे, जिनमें वेस्टर्न संगीत का असर और बोलों में बेबाकी और खुलापन साफ झलकता था.

आशा भोसले ने एक इंटरव्यू में उन दिनों की यादें बयां करते हुए बताया कि ये गाने रिकॉर्ड करना आसान नहीं था. ‘पिया तू अब तो आजा’ की रिकॉर्डिंग के दौरान मशहूर गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी इतने असहज हो गए थे कि वे स्टूडियो छोड़कर बाहर चले गए.
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मजरूह सुल्तानपुरी ने तब आशा भोसले से कहा था, ‘बेटी मैंने बहुत गंदा गाना लिखा है. मेरी बेटियां जब बड़ी होंगी और इसे गाएंगी, तो मुझे कैसा लगेगा?’

आशा भोसले ने भी पंचम दा से सवाल किया था कि उन्हें हमेशा बोल्ड गाने ही क्यों दिए जाते हैं, जबकि उनकी बहन लता दीदी को सॉफ्ट गाने मिलते हैं? लेकिन पंचम दा को अपनी धुन पर पूरा भरोसा था और उनका अनुमान सही साबित हुआ.

गानों की बोल्डनेस और ‘दम मारो दम’ में दिखाए गए काउंटर-कल्चर की वजह से इन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा. ऑल इंडिया रेडियो (AIR) ने इन गानों को प्रसारित करने पर बैन लगा दिया था.

आकाशवाणी के अधिकारियों का मानना था कि ये गाने समाज पर बुरा असर डाल रहे हैं. दूरदर्शन ने भी जब फिल्म का प्रसारण किया, तो ‘दम मारो दम’ जैसे गानों को काट दिया. आशा भोसले बताती हैं कि उस दौर में उनके कम से कम 3-4 गाने बॉम्बे रेडियो पर बैन थे.

विडंबना है कि जिन गानों को कभी ‘अश्लील’ या ‘विवादित’ कहकर बैन किया गया था, वे ही आज हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े क्लासिक माने जाते हैं. दर्शकों ने समय के साथ इन गानों की ईमानदारी को समझा. ‘दम मारो दम’ और ‘पिया तू अब तो आजा’ ने संगीत में मॉडर्निटी का रास्ता खोला. ये गाने साबित करते हैं कि सच्ची कला समय की पाबंदियों को तोड़कर हमेशा जीवित रहती है.