हीमोग्लोबिन बढ़ाने से लेकर स्वाद तक, पालक का झोर है सेहत का देसी नुस्खा

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मिथिलांचल की पारंपरिक रसोई में पालक का झोर सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि सेहत और सादगी का प्रतीक माना जाता है. कम मसालों और पारंपरिक विधि से तैयार यह डिश स्वाद के साथ-साथ शरीर को जरूरी पोषण भी देती है. आयरन, कैल्शियम और विटामिन्स से भरपूर पालक का झोर दरभंगा और आसपास के इलाकों में चावल और आलू के चोखे के साथ कंफर्ट फूड के रूप में खाया जाता है, जिसे डॉक्टर भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानते हैं. रिपोर्ट- अभिनव कुमार

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भारत के हर क्षेत्र की अपनी एक विशिष्ट खाद्य संस्कृति है, जो न केवल स्वाद बल्कि स्वास्थ्य के सिद्धांतों पर भी टिकी होती है. मिथिलांचल की रसोई में भी एक ऐसा ही पारंपरिक व्यंजन है’पालक का झोर’. आमतौर पर लोग पालक का साग या पालक-पनीर खाना पसंद करते हैं, लेकिन दरभंगा और आसपास के इलाकों में पालक का झोर एक ‘कंफर्ट फूड’ के रूप में प्रसिद्ध है.

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डॉक्टर भी आयरन और विटामिन्स की प्रचुरता के कारण इसके सेवन की सलाह देते हैं. पालक को गुणों की खान माना जाता है. इसमें प्रचुर मात्रा में आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो हीमोग्लोबिन बढ़ाने और आंखों की रोशनी तेज करने में सहायक होते हैं.

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मिथिलांचल की इस पारंपरिक विधि की खासियत यह है कि इसमें मसालों का प्रयोग बहुत संतुलित होता है, जिससे पालक के औषधीय गुण नष्ट नहीं होते. मिथिलांचल के इस विशेष व्यंजन को बनाने की प्रक्रिया जितनी सरल है, इसका स्वाद उतना ही गहरा. सबसे पहले ताजे और हरे पालक के पत्तों को अच्छे से साफ कर लें.

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कुकर में पत्तों के साथ चुटकी भर नमक और थोड़ा पानी डालकर 3 से 4 सीटी लगाएं. उबलने के बाद इन पत्तों को ठंडा करके मिक्सी में एक महीन पेस्ट बना लें. साथ ही कुछ आलू भी उबाल लें, क्योंकि झोर के साथ आलू का चोखा एक अनिवार्य जुगलबंदी है.

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एक कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करें. इसमें जीरा, सूखी लाल मिर्च और तेजपत्ता का तड़का लगाएं. इस डिश का मुख्य आकर्षण लहसुन है. बारीक कटा हुआ लहसुन जब तेल में सुनहरा होता है, तो वह एक सोंधी खुशबू पैदा करता है. अब इसमें बारीक कटा प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें.

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मसालों में हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और हल्का गरम मसाला मिलाएं. अब तैयार किया गया पालक का पेस्ट डालकर इसमें आवश्यकतानुसार गर्म पानी मिलाएं. झोर का असली स्वाद तब आता है जब इसे धीमी आंच पर अच्छी तरह खदकाया (उबाला) जाता है. जैसे ही इसकी सतह पर तेल दिखने लगे और खुशबू आने लगे, समझ लीजिए कि पालक का झोर तैयार है.

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मिथिला में कहावत है कि भोजन वही जो मन को तृप्त कर दे. गरमा-गरम उबले हुए चावल के ऊपर गहरा हरा पालक का झोर और साथ में सरसों तेल वाला आलू का चोखा यह एक पूर्ण भोजन है. यह डिश न केवल सुपाच्य है, बल्कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए उत्तम आहार है.

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हीमोग्लोबिन बढ़ाने से लेकर स्वाद तक, पालक का झोर है सेहत का देसी नुस्खा

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