लाल सागर से लेकर गाजा तक… दुनिया खतरे में! अरब देशों से बोले एस जयशंकर, आतंकवाद को मिलकर कुचलना होगा
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जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद सबका दुश्मन है और हमें इसे मिलकर कुचलना होगा. (फाइल फोटो)नई दिल्ली. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अरब देशों के विदेश मंत्रियों के सामने आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है. नई दिल्ली में आयोजित बैठक में जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि आतंकवाद और सीमा पार आतंकवाद (Cross-border terrorism) पर ‘जीरो टॉलरेंस’ होना चाहिए. उन्होंने इसे पूरी दुनिया और विशेषकर भारत-अरब क्षेत्र के लिए एक साझा खतरा बताया. जयशंकर ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था बदल रही है और ऐसे में आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ ही वैश्विक मानक बनना चाहिए. भारत का यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि पश्चिम एशिया इस वक्त भारी उथल-पुथल से गुजर रहा है.
गाजा, यमन और लेबनान पर भारत की चिंता
विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई.
* गाजा संकट: उन्होंने कहा कि गाजा में चल रहा संघर्ष अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बड़ी चिंता है. संघर्ष को खत्म करने की व्यापक योजना आज सबकी प्राथमिकता है.
* UNSC प्रस्ताव: जयशंकर ने अक्टूबर 2025 के शर्म-अल-शेख शांति सम्मेलन और नवंबर 2025 में पारित UNSC प्रस्ताव 2803 का जिक्र किया.
* लेबनान और यमन: उन्होंने बताया कि लेबनान में UNIFIL के तहत भारतीय सैनिक शांति रक्षा में तैनात हैं. वहीं, यमन संकट से समुद्री व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं, जो चिंताजनक है. सूडान, लीबिया और सीरिया में भी स्थिरता जरूरी है.
तेल से आगे बढ़कर स्पेस और स्टार्टअप में सहयोग
जयशंकर ने भारत और अरब देशों के बीच सहयोग का नया रोडमैप (2026-28) पेश किया. उन्होंने कहा कि अब हमारे रिश्ते सिर्फ ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे.
* नए क्षेत्र: भारत ने डिजिटल, अंतरिक्ष (Space), स्टार्टअप्स और इनोवेशन जैसे नए क्षेत्रों को जोड़ने का प्रस्ताव रखा है.
* चैंबर ऑफ कॉमर्स: रिश्तों को मजबूती देने के लिए ‘भारत-अरब चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर’ की शुरुआत की गई है.
* साझा विरासत: विदेश मंत्री ने याद दिलाया कि अरब देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं और हमारे ऐतिहासिक रिश्ते हैं.
आतंकवाद पर एक सुर में बोलने की जरूरत
जयशंकर ने जोर देकर कहा कि राजनीति, इकोनॉमी और टेक्नोलॉजी की वजह से दुनिया बदल रही है. ऐसे में सुरक्षा की चुनौतियां भी बढ़ी हैं. सीमा पार से होने वाला आतंकवाद किसी भी देश के लिए स्वीकार्य नहीं होना चाहिए. भारत ने पिछले एक दशक में जो तकनीकी क्षमताएं हासिल की हैं, उसका फायदा अरब दोस्तों को भी मिलेगा. संसदीय आदान-प्रदान और आतंकवाद विरोधी सहयोग पर भी दोनों पक्ष मिलकर काम करेंगे.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें