बकरी पालन से इस शख्स की बदल गई तकदीर! सालाना हो रही लाखों की कमाई, बन गया मालामाल
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Success Story: रामपुर के विकास बकरी पालन कर लाखों की कमाई कर रहे हैं. वह सालाना 50 से 60 बकरियों की बिक्री कर बंपर कमाई कर रहे हैं. साथ ही दूध बेचकर भी रोजाना अतिरिक्त आय मिलती है.
रामपुर: रामपुर के रहने वाले विकास बचपन से ही बकरी पालन का काम कर रहे हैं. विकास के पास इस समय करीब 60 देसी नस्ल की बकरियां हैं. देसी बकरियों की सबसे बड़ी खासियत यही होती है कि वे कम देखरेख में भी अच्छी तरह पल जाती हैं और बीमारियां भी कम लगती हैं. विकास बताते हैं कि उनकी बकरियां हर पांच महीने में दो से तीन बच्चे देती हैं. इसी वजह से बकरियों की संख्या बनी रहती है और हर साल अच्छी संख्या में बकरे बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं. विकास के यहां साल भर में करीब 50 से 60 बकरे बिक जाते हैं. बाजार में एक बकरे की कीमत 20 हजार से लेकर 22 हजार रुपये तक मिल जाती है. अगर हिसाब लगाया जाए तो सिर्फ बकरों की बिक्री से ही उन्हें साल में लाखों रुपये की आमदनी हो जाती है. यही नहीं त्योहारों के समय कीमत और भी अच्छी मिल जाती है, जिससे मुनाफा बढ़ जाता है.
बकरी पालन में खर्च की बात करें तो रोज सुबह करीब 11 बजे बकरियों को जंगल चराने के लिए ले जाते हैं और शाम करीब 5 बजे वापस घर ले आते हैं. दिन भर जंगल में घास-पत्ते खाकर ही बकरियां अपना पेट भर लेती हैं, उन्हें अलग से दाना या महंगा चारा देने की जरूरत नहीं पड़ती. इसी वजह से लागत बहुत कम रहती है और मुनाफा ज्यादा होता है.
विकास बताते हैं कि बकरियों की साफ-सफाई और समय-समय पर टीकाकरण का ध्यान जरूर रखा जाता है, लेकिन इसके अलावा कोई खास खर्च नहीं आता. बकरों की बिक्री के साथ-साथ विकास को दूध से भी अच्छी आमदनी होती है. उनके पास जो दूध देने वाली बकरियां हैं, वे सुबह के समय करीब 20 लीटर तक दूध देती हैं. यह दूध वह सीधे दूधिया को बेच देते हैं. दूध का रेट लगभग 40 रुपये प्रति लीटर मिलता है. इस तरह दूध से भी उन्हें रोजाना अलग से कमाई हो जाती है, जो घर खर्च में काफी मददगार साबित होती है.
विकास का कहना है कि बकरी पालन ऐसा काम है, जिसे कम पढ़े-लिखे लोग भी आसानी से कर सकते हैं. उनका मानना है कि अगर युवा चाहें तो इस काम को छोटे स्तर से शुरू करके धीरे-धीरे बड़ा कर सकते हैं. खासकर गांवों में जहां जंगल और खाली जमीन उपलब्ध है, वहां बकरी पालन रोजगार का बेहतर विकल्प बन सकता है.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें