बाहर वाली के कारण घर में हुआ झगड़ा, पति बोला- जाओ मर जाओ, तब पत्नी ने दे दी जान, अदालत ने कर दिया माफ | married man extramarital affair wife killed herself kerala high court big decision

Share to your loved once


Last Updated:

Husband-Wife Relation: पति-पत्‍नी के बीच मनमुटाव या लड़ाई-झगड़ा आम बात है, लेकिन इस पवित्र रिश्‍ते में उस वक्‍त खटास पैदा हो जाता है जब किसी तीसरे की एंट्री हो जाती है. ऐसे ही एक मामले में केरल हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है.

बाहर वाली के कारण घर में हुआ झगड़ा, पति बोला- मर जाओ, तब पत्नी ने दे दी जानHusband-Wife Relation: पति के एक्‍स्‍ट्रा मैरिटल अफेयर पर परिवार में ऐसा कलह मचा कि मामला हाईकोर्ट पहुंच गया. (फाइल फोटो)

तिरुवनंतपुरम. केरल हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि झगड़े के दौरान कहे गए सामान्य या आवेशपूर्ण शब्द जैसे ‘जाओ और मर जाओ’ अपने आप में जान देने के लिए उकसावा नहीं माने जा सकते. जस्टिस सी. प्रतीप कुमार की पीठ ने यह टिप्पणी एक 30 साल के युवक की याचिका पर सुनवाई करते हुए की है. आरोपी पर पत्‍नी को जान देने के लिए उकसाने समेत अन्‍य आरोप लगे थे. मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता का एक विवाहित महिला के साथ संबंध था. जब युवक की पत्‍नी को पता चला कि उनका पति किसी अन्य महिला से शादी की योजना बना रहा है, तो उसने उससे सवाल किया, जिससे दोनों के बीच तीखी बहस हो गई. आरोप है कि इसी दौरान युवक ने महिला से कहा था कि ‘जाओ और मर जाओ.’ इसके बाद वर्ष 2023 में महिला और उसकी पांच साल की बेटी ने आत्महत्या कर ली.

घटना के बाद पुलिस ने युवक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और धारा 204 (सबूत नष्ट करना) के तहत मामला दर्ज किया. सत्र अदालत ने आरोपी की डिस्चार्ज याचिका खारिज करते हुए उसके खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था. इसके बाद युवक ने हाईकोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति को जान देने के लिए उकसाने का मामला तभी बनता है जब आरोपी की स्पष्ट मंशा पीड़ित को ऐसा कदम उठाने के लिए प्रेरित करने की हो. अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून में आरोपी की मंशा को महत्व दिया जाता है, न कि पीड़ित द्वारा शब्दों या परिस्थितियों को कैसे महसूस किया गया.

हाईकोर्ट ने क्‍या कहा

‘हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स’ की रिपोर्ट के अनुसार, केरल हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि इस मामले में ‘जाओ और मर जाओ’ जैसे शब्द झगड़े के दौरान आवेश में कहे गए थे और इनमें आत्महत्या के लिए उकसाने की कोई स्पष्ट मंशा नहीं दिखाई देती. हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में परिस्थितियों की संपूर्णता और आरोपी के व्यवहार का समग्र मूल्यांकन जरूरी होता है. केवल कठोर या असंवेदनशील शब्दों के आधार पर जान देने के लिए उकसावे का अपराध सिद्ध नहीं किया जा सकता, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि आरोपी ने जानबूझकर पीड़ित को आत्महत्या के लिए प्रेरित किया.

यह फैसला क्‍यों है अहम?

इस फैसले को आत्महत्या के मामलों में कानून की व्याख्या के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि भावनात्मक क्षणों में कहे गए शब्द, भले ही वे अनुचित हों, अपने आप में गंभीर आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. साथ ही अदालत ने यह भी संकेत दिया कि आत्महत्या जैसे संवेदनशील मामलों में जांच और अभियोजन के दौरान संतुलित और तथ्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है.

About the Author

Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

homenation

बाहर वाली के कारण घर में हुआ झगड़ा, पति बोला- मर जाओ, तब पत्नी ने दे दी जान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP