‘माघ मेले’ में उमड़ा आस्था का सैलाब, दिखा स्वर्ग जैसा नजारा, 18 करोड़ लोग लगा चुके डुबकी, देखें तस्वीर
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Magh Mela Pics: प्रयागराज में पिछले साल इसी समय एक भव्य नजारा देखने को मिल रहा था. तब उस समय महाकुंभ को लेकर हर कोई आस्था में डूबा हुआ था. मगर, एक बार फिर वहीं नजारा आज संगम नगरी में देखने को मिल रहा है. हर तरफ खचाखच भीड़, जगह-जगह पर पुलिस और साधू-संतों का रैला लगा हुआ है. लोग पावन स्नान को करने के लिए बड़ी संख्या में आए हैं. संगम का शहर प्रयागराज देश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर आस्था और पर्यटन का बड़ा केंद्र बन गया है. कुछ वर्षों में यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. संयम, भक्ति और सेवा की अनुभूति का अनुष्ठान कल्पवास अब समाप्ति की ओर है. 3 जनवरी पौष पूर्णिमा से शुरू हुआ जप, तन, स्नान, दान, पूजा, भजन, सत्संग का यह क्रम 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के साथ ही थम जाएगा. पूजन, हवन की आहुतियों के चिह्न संगम की आस्था की गवाही दे रहे हैं. अब माघ मेला की कुछ खूबसूरत तस्वीरें सामने आई हैं.
माघ मेला 2026.वर्ष 2026 में माघ मेले के दौरान ही संगमनगरी में आस्था का अभूतपूर्व सैलाब दिख गया है. 27 जनवरी तक ही करीब 18 करोड़ श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके हैं. ये आंकड़े प्रयागराज को देश के सबसे बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र में स्थापित करते हैं. माघ मेले से धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा तो मिला ही, स्थानीय कारोबार को भी रफ्तार मिली है.
होटल, धर्मशाला, होम-स्टे, नाविक, ट्रेवल, दुकानदार और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों की आय में जबरदस्त वृद्धि हुई है. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और योजनाबद्ध तरीके से किया गया, तो आने वाले वर्षों में प्रयागराज धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन का गढ़ बन सकता है.
माघ मेले की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां कोई भी भूखा नहीं सोता. मेले के अलग-अलग सेक्टरों में बने आश्रमों और शिविरों में इस वक्त भी चौबीसों घंटे भंडारे चल रहे हैं. यही वजह है कि आपको खाने पर एक भी पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है. यहां का सादा लेकिन शुद्ध भोजन किसी बड़े होटल के पकवानों से कम नहीं लगता. वहीं रहने की बात करें, तो मेले के कई बड़े पंडालों और सरकारी रैन बसेरों में आप अभी भी मुफ्त में या मात्र 50-100 रुपये के रजिस्ट्रेशन पर रात बिता सकते हैं. दरअसल अगर आप कल्पवासियों के शिविर में समय बिताते हैं, तो आपको भारतीय संस्कृति को बेहद करीब से देखने का मौका भी मुफ्त में मिलता है.
44 दिनों का माघ मेला अपने समापन की ओर बढ़ रहा है. ऐसे में महाशिवारात्रि का अंतिम प्रमुख स्नान उत्सव 15 फरवरी 2026 को किया जाएगा, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि माघ मेले में श्रद्धालु अभी भी ओर बढ़ सकती है.
मेला प्रशासन ने बताया कि, मंगलवार और बुधवार को भारी भीड़ देखने को मिली, हालांकि कि इन दोनों ही दिन किसी भी तरह का प्रमुख स्नान नहीं था और न ही किसी भी तरह का विशेष धार्मिक आयोजन किया गया. मेला अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालु माघ मेला खत्म होने से पहले पवित्र स्नान करने के लिए उत्सुक हैं और प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं से श्रद्धालु खुश है.
महाशिवरात्रि आने में अभी भी 18 दिन बचें हैं, इसलिए अधिकारियों को इस बार माघ मेले में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है. संगम की रेती पर आयोजित माघ मेले में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु माघ मेले की दिव्यता और भव्यता के साथ योगी सरकार द्वारा किए गए इंतजामों को लेकर सरकार की जमकर सराहना भी कर रहे हैं.
माघ मेला में इंसान तो इंसान अब कुत्ते स्नान कर रहे हैं. जौनपूर जिला के अमित केशरवानी अपने पेट डॉग को लेकर स्नान कराने आये. पेट डॉग का नाम ऑगी है जोकि टॉयकाम नश्ल का है. इसकी उम्र 2 वर्ष है और लंबाई 15 सेंटीमीटर है. ऑगी अपनी नस्ल मे रेयर ब्रिड का है जिसे चंडीगढ़ से खरीदा गया है. इसकी कीमत 47 हजार है और पॉकेट साइज होने की वजह से मालिक जेब में रखकर उसे घुमाते है. फिल्हाल ऑगी खुशकिस्मत और काफी शांत स्वभाव का फैमिलीयर डॉग है.
माघ मेले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. यूपी एटीएस समेत करीब 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात हैं. एआई, सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी की जा रही है. प्रशासन का अनुमान है कि इस बार मेले में 9 करोड़ ज्यादा श्रद्धालु आएंगे. 800 हेक्टेयर में बसे मेले को सात सेक्टरों में बांटा गया है. करीब 8 किमी में अस्थायी घाट बनाए गए हैं.
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काव्या मिश्रा
Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें