Astra Mark 2 VS Meteor Missile VS AMRAAM Missile| Meteor हो या AMRAAM, भारत की इस मिसाइल के आगे भरेंगी पानी! राफेल से लेकर तेजस और Su-30 MKI में लगेगी Astra Mk2
Astra MK-2 vs Meteor or AMRAAM: दुनिया भर में अब तक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (BVR – Beyond Visual Range) की बादशाहत यूरोपीय ‘मेटिअर’ (Meteor) और अमेरिकी ‘एमराम’ (AMRAAM) के पास है. लेकिन, डीआरडीओ द्वारा विकसित भारत की स्वदेशी अस्त्र मार्क-2 (Astra Mk2) मिसाइल जल्द ही वायुसेना में शामिल होने जा रही. रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि यह ‘देसी महाबली’ न केवल अमेरिकी एएमआरएएएम को कड़ी टक्कर देगा, बल्कि कई मामलों में दुनिया की सबसे घातक मानी जाने वाली मेटिअर मिसाइल की बादशाहत को भी चुनौती देगा. यह मिसाइल सुखोई-30 MKI, तेजस और राफेल जैसे फाइटर जेट्स को एक ‘यूनिवर्सल शिकारी’ बना देगी.
Astra Mk2 के बारे में जानते हैं. डीआरडीओ द्वारा विकसित भारत की अगली पीढ़ी की बीवीआर (Beyond Visual Range) एयर-टू-एयर मिसाइल है. यह यूरोपीय मेटिअर और अमेरिकी AIM-120 एएमआरएएएम से कई मायनों में अलग है. अस्त्र मार्क-2 में भी एसएफडीआर (Solid Fuel Ducted Ramjet) टेक्नोलॉजी है, जो मेटिअर की तरह ही सस्टेनड थ्रस्ट प्रदान करती है, जिससे इसका नो-एस्केप जोन (NEZ) मेटिएर के बराबर या उससे बड़ा हो सकता है. अस्त्र मार्क-2 की अधिकतम रेंज 160-180 किमी से ज्यादा बताई जा रही है. इसकी स्पीड मैक 4.5 से ज्यादा है. यह हाई-स्पीड, हाई-ऑल्टीट्यूड टारगेट्स को बेहतर तरीके से हैंडल कर सकती है. इसके अलावा, इसमें एईएसए आधारित एक्टिव रडार (AESA Radar System) को भी चकमा देने की क्षमता है.
Astra Mk2 की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्वदेशी डिजाइन, कम लागत और भारतीय फाइटर जेट्स (राफेल, तेजस Mk1A, Su-30 MKI) में आसान एकीकरण है. Meteor और एएमआरएएएम दोनों महंगे आयातित हथियार हैं, जबकि Astra Mk2 बड़े पैमाने पर उत्पादन और स्टॉकिंग में आसान है, जिससे वायुसेना की BVR क्षमता में भारी वृद्धि होगी. यह मिसाइल न केवल Meteor के बड़े NEZ और सस्टेनड एनर्जी को मैच करती है, बल्कि एएमआरएएएम की तुलना में लंबी दूरी पर ज्यादा मैन्यूवरेबिलिटी और किल प्रोबेबिलिटी देती है. नेटवर्क-सेंटर्ड वारफेयर में इसका दो-तरफा डेटालिंक AWACS और अन्य प्लेटफॉर्म्स से रीयल-टाइम अपडेट्स ले सकता है. कुल मिलाकर, Astra Mk2 भारत को एयर-टू-एयर मिसाइल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाती है और Meteor-AMRAAM जैसे दिग्गजों के सामने मजबूत विकल्प पेश करती है.
मेटियोर अपनी 150 km की रेंज में ज़्यादातर समय अपने थ्रस्ट को कम कर सकता है, जिससे आखिरी सेकंड में एनर्जी के लिए फ्यूल बच जाता है.
मेटिअर बनाम एएमआरएएएम
– अस्त्र मार्क-2 की ताकत को समझने से पहले हमें दुनिया की दो सबसे बेहतरीन मिसाइलों के अंतर को समझना होगा. अमेरिकी AIM-120 एएमआरएएएम (एडवांस्ड मीडियम-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल) 1990 के दशक से युद्ध के मैदान में भरोसेमंद रही है. यह सॉलिड-फ्यूल रॉकेट मोटर पर काम करती है. लॉन्च होने के बाद यह तेजी से जलती है और फिर लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अपनी गति (Coasting) का इस्तेमाल करती है. लेकिन लंबी दूरी पर जाते-जाते इसकी ऊर्जा कम हो जाती है.
– वहीं, यूरोप की मेटिअर की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘रैमजेट’ (Ramjet) इंजन है. यह सॉलिड फ्यूल की तरह एक बार में जलकर खत्म नहीं होता, बल्कि उड़ान के दौरान अपनी गति को कम या ज्यादा (Throttle) कर सकता है. इससे मेटिअर का ‘नो-एस्केप जोन’ (NEZ) यानी वह दायरा जहां से दुश्मन का बच निकलना नामुमकिन है, जो कि एमराम के मुकाबले बहुत बड़ा होता है. अगर दुश्मन का विमान 180 डिग्री घूमकर भागने की कोशिश भी करे, तो भी मेटिअर के पास उसे दौड़ा कर मारने की क्षमता रहती है.
– वहीं, अस्त्र मार्क-2 भारत के लिए गेमचेंजर है. मेटिअर अपनी टेक्नोलॉजी में आगे है तो एमराम अपने कॉम्बैट रिकॉर्ड में. वहीं, भारत की अस्त्र मार्क-2 इन दोनों के बीच एक जबरदस्त विकल्प बनकर उभरी है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित अस्त्र मार्क-2 एक ‘डुअल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर’ (Dual-Pulse Motor) वाली मिसाइल है. यह तकनीक इसे सामान्य एएमआरएएएम से कहीं ज्यादा घातक बनाती है. इसकी रेंज और सटीकता काफी खास है. अस्त्र मार्क-2 की मारक क्षमता करीब 160 किलोमीटर बताई जा रही है, जो इसे अमेरिकी AMRAAM (AIM-120 C5/C7) की रेंज के बराबर या उससे आगे खड़ा करती है.
– अस्त्र मार्क-2 का डुअल-पल्स मोटर इसे दुश्मन के करीब पहुंचने पर ‘दूसरी बार’ एक्सीलरेट करने की ताकत देता है. यानी जैसे ही यह दुश्मन के पास पहुंचती है, यह अपनी बची हुई ऊर्जा का इस्तेमाल कर अपनी गति बढ़ा लेती है, जिससे इसका ‘नो-एस्केप जोन’ काफी घातक हो जाता है.
विदेशी मिसाइलों पर क्यों भारी ‘अस्त्र’?
अस्त्र मार्क-2 रणनीतिक रूप से भारत के लिए ‘गेमचेंजर’ क्यों है, इसके तीन बड़े कारण हैं-
- यूनिवर्सल इंटीग्रेशन (सब पर फिट): मेटिअर मिसाइल को राफेल में तो लगाया जा सकता है, लेकिन भारत के मुख्य फाइटर जेट सुखोई-30 एमकेआई (रूसी प्लेटफॉर्म) या स्वदेशी तेजस में इसे इंटीग्रेट करना बेहद जटिल और महंगा है. वहीं, अस्त्र मार्क-2 पूरी तरह स्वदेशी होने के कारण भारत के हर विमान चाहे वह रूसी सुखोई हो, फ्रांसीसी राफेल हो या भारतीय तेजस सभी पर आसानी से फिट हो जाएगी. यह क्षमता में किसी विदेशी मिसाइल से कम नहीं है.
- कीमत और आत्मनिर्भरता: एक मेटिअर मिसाइल की अस्त्र मार्क-2 उसकी तुलना में बेहद किफायती है. युद्ध की स्थिति में हम विदेशी सप्लाई पर निर्भर नहीं रहेंगे. हम जितनी चाहें उतनी मिसाइलें बना सकते हैं और दाग सकते हैं.
- रणनीतिक आजादी: अस्त्र मार्क-2 के आने से भारत को अब अमेरिकी या यूरोपीय शर्तों के आगे झुकना नहीं पड़ेगा. यह मिसाइल ‘फायर एंड फॉरगेट’ (दागो और भूल जाओ) तकनीक पर काम करती है और आधुनिक जैमिंग (Jamming) को भी मात देने में सक्षम है.