लोनार क्रेटर झील पर संकट: 1200 साल पुराने मंदिर डूबे, हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान | Lonar Lake Crisis: 1200-Year-Old Temples Submerged, HC Takes Suo Motu Cognizance

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Lonar Crater Lake: महाराष्ट्र की लोनार झील का जलस्तर 20 फीट बढ़ने से 1,200 साल पुराने 9 मंदिर डूब गए हैं. बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र सरकार और केंद्र को नोटिस भेजा है. झील की अनूठी लवणता और पीएच लेवल गिरने से दुर्लभ सूक्ष्मजीवों पर संकट है. कोर्ट ने अधिकारियों से दो हफ्ते में जवाब मांगा है और मंदिरों को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है.

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उल्कापिंड टकराने से बनी देश की इकलौती झील पर संकट! 1,200 साल पुराने मंदिर डूबेउल्कापिंड गिरने से बनी लोनार झील में मीठे पानी की घुसपैठ (File Photo)

Lonar Lake News: महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित मशहूर लोनार झील (Lonar Lake) इस वक्त गंभीर संकट में है. झील का जलस्तर अचानक 20 फीट तक बढ़ गया है. इससे सदियों पुराने मंदिर पानी में समा रहे हैं. बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने इस मामले पर खुद संज्ञान लिया है. कोर्ट ने इसे एक इकोलॉजिकल और हेरिटेज क्राइसिस माना है. झील के खारे पानी का कैरेक्टर बदलने से वहां मौजूद दुर्लभ सूक्ष्मजीवों के अस्तित्व पर भी खतरा पैदा हो गया है. हाई कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार के कई विभागों को नोटिस जारी किया है. जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस राज वाकोड़े ने अधिकारियों से दो हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है. कोर्ट ने एक ‘इमरजेंसी वाटर डायवर्जन प्लान’ बनाने का सुझाव दिया है ताकि मंदिरों को बचाया जा सके. साथ ही वृक्षारोपण की गतिविधियों को रोकने और पानी की क्वालिटी की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग करने की बात कही गई है.

क्या डूब जाएंगे लोनार के प्राचीन मंदिर?

लोनार क्रेटर के किनारे बने 1,200 साल पुराने मंदिरों का अस्तित्व अब खतरे में है. याचिका के मुताबिक झील के पास स्थित 15 में से 9 मंदिर पूरी तरह या आंशिक रूप से डूब चुके हैं. कमलजा देवी मंदिर, दैत्य सूदन मंदिर और गौमुख मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर पानी का कब्जा हो चुका है. नवंबर 2025 तक पानी सिर्फ मंदिरों की सीढ़ियों तक था. अब हालात इतने खराब हैं कि मूर्तियों के भी डूबने का डर है. अगर जल्द ही पानी नहीं हटाया गया, तो इन धरोहरों को भारी नुकसान पहुंच सकता है.

लोनार झील कैसे बनी? यह इतनी खास क्यों है

  • वैज्ञानिकों के अनुसार लोनार झील का निर्माण करीब 52,000 साल पहले हुआ था. यह झील एक विशालकाय उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने के कारण बनी थी. यह उल्कापिंड के टकराने से बनी भारत की इकलौती झील है.
  • करीब 20 लाख टन वजन का वह उल्कापिंड 90,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जमीन से टकराया था. इस टक्कर से इतना बड़ा गड्ढा बना जिसे क्रेटर कहा जाता है.
  • बेसाल्टिक चट्टानों पर बना यह दुनिया का इकलौता इम्पैक्ट क्रेटर है. इसका आकार गोलाकार है और यह करीब 1.8 किलोमीटर व्यास में फैला है. इसका पानी खारा और क्षारीय है.
  • लोनार झील अपने खारे और क्षारीय (Alkaline) पानी के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है. इसमें ऐसे बैक्टीरिया और फंगस पाए जाते हैं, जो कहीं और नहीं मिलते.
लोनार झील पर संकट : 20 फीट बढ़ा जलस्तर, 1,200 साल पुराने मंदिर डूबे. (File Photo)

HC में दायर याचिका में चेतावनी दी गई है कि झील में मीठा पानी मिलने से इसकी लवणता (Salinity) कम हो रही है. इससे झील का pH लेवल गिर रहा है. अगर खारापन खत्म हुआ, तो यहां का अनूठा इकोसिस्टम तबाह हो जाएगा. मीठे पानी की प्रजातियां यहां घुस रही हैं, जो दुर्लभ सूक्ष्मजीवों के लिए काल बन सकती हैं.

क्या यह कुदरती आपदा है या इंसानी गलती?

हैरानी की बात यह है कि इस संकट के लिए सिर्फ भारी बारिश जिम्मेदार नहीं है. याचिका में इसे प्रशासनिक विफलता बताया गया है. वन विभाग और ASI द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए वृक्षारोपण को भी एक वजह माना जा रहा है. ज्यादा पेड़ लगाने से मिट्टी में नमी बढ़ गई और वाष्पीकरण कम हो गया, जिससे पानी झील की तरफ बढ़ रहा है. इसके अलावा पास के ‘किनी परकोलेशन टैंक’ से पानी का रिसाव और शहर का गंदा पानी झील में मिलना भी बड़ी समस्या है. IIT बॉम्बे को इस पर रिपोर्ट देनी थी, लेकिन उसमें भी देरी हुई है.

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Deepak Verma

दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्‍य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़…और पढ़ें

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उल्कापिंड टकराने से बनी देश की इकलौती झील पर संकट! 1,200 साल पुराने मंदिर डूबे

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