माघ मेले में फिर लौटेंगे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद? समझौता करा रहे हैं कुछ अधिकारी, पूर्णिमा का कर सकते हैं स्नान

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ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ी सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है. प्रशासन अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को सम्मान पूर्णिमा स्नान कराने का प्रयास कर रहा है. कुछ बड़े अधिकारी मध्यस्थता करने में लगे हैं. इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बुधवार को मेला छोड़कर काशी जा चुके हैं.

माघ मेले में लौटेंगे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद? समझौता करा रहे हैं अधिकारीअनशन पर थे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद.

प्रयागराजः ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ी सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है. प्रशासन अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को सम्मान पूर्णिमा स्नान कराने का प्रयास कर रहा है. कुछ बड़े अधिकारी मध्यस्थता करने में लगे हैं. इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बुधवार को मेला छोड़कर काशी जा चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक प्रशासन के अधिकारियों के माफी न मांगने के चलते स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भारी और बोझिल मन से मेले से चले गए. हालांकि अधिकारियों ने मौनी अमावस्या के विवाद को लेकर खेद व्यक्त कर दिया था. लेकिन जब तक प्रशासनिक अधिकारियों का खेद व्यक्त करने का संदेश उन तक पहुंचा. तब तक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मेला छोड़ने का ऐलान कर चुके थे.

मौनी अमावस्या के स्नान पर हुआ था बवाल
उनकी नाराजगी इस बात पर भी थी कि जिन बटुकों के साथ मारपीट की गई. उस मामले में भी अधिकारियों ने कोई गलती नहीं स्वीकार की. 18 जनवरी को मौनी अमावस्या स्नान के लिए पालकी से संगम नोज जाते हुए पुलिस से विवाद हुआ था. पुलिस ने संगम नोज पर भीड़ का हवाला देकर पालकी रोक दिया था. इसके बाद विवाद बढ़ने पर पुलिस ने शंकराचार्य के साथ चल रहे शिष्यों के बालों को चोटी पड़कर मारा था. आरोप है कि पुलिस के जवानों ने ही उन्हें पालकी सहित सेक्टर 4 में त्रिवेणी मार्ग स्थित उनके शिविर के बाहर छोड़ दिया था. इसके बाद 18 जनवरी से 28 जनवरी तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शिविर के बाहर अनशन पर रहे. लड़ाई बढ़ने पर प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने दो नोटिसें भी उन्हे जारी कर जवाब मांगा था.

वरिष्ठ अधिकारी कर रहे मध्यस्थता
इस बीच सपा मुखिया अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं का उन्हें समर्थन भी मिला. बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने उनके समर्थन में नौकरी से इस्तीफा दे दिया. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर वरिष्ठ अधिकारी अब मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं तो 11 दिनों तक जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती माघ मेले में ही अनशन पर बैठे थे तो ये अधिकारी क्या कर रहे थे. उनकी सिर्फ दो मांगें थीं,पहली यह कि प्रशासन ससम्मान उन्हें गंगा स्नान कराए. दूसरा यह कि माघ मेले में चारों शंकराचार्यों के स्नान की एस ओ पी जारी करें. इसके साथ ही बटुकों और शिष्यों के साथ पुलिसिया बर्बरता और मारपीट के लिए माफी मांगे.

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Prashant Rai

प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें

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