पहाड़ की इस स्वीट डिश में छिपा है मां-बेटी का प्यार, चावल से तैयार होती है ये लाजवाब मिठाई, जानें आसान रेसिपी – Uttarakhand News
Last Updated:
Pahadi Special Sweet: पहाड़ों में जब बेटी मायके से विदा होती है, तो मां अपने प्यार को शब्दों में नहीं, स्वाद में बांध देती है. इन्हीं में से एक डिश है खाजा जो सिर्फ एक पहाड़ी मिठाई नहीं, बल्कि मां और बेटी के रिश्ते की वह मिठास है, जो दूरी के बाद भी अपनापन जिंदा रखती है. आइए जानते हैं कैसे बनती है ये खास मिठाई.
पिथौरागढ़: पहाड़ों की परंपराएं जितनी सरल हैं, उतनी ही गहरी भी होती हैं. जब एक बेटी अपने मायके आती है और फिर वहां से विदा होकर ससुराल जाने लगती है, तो मां का दिल भर आता है. पहाड़ों में अक्सर लोग अपनी भावनाएं बोलकर जाहिर नहीं करते, लेकिन मां का प्यार किसी न किसी रूप में बेटी के साथ जरूर जाता है. कभी हाथों से बुने ऊनी स्वेटर में, तो कभी स्वाद से भरे किसी खास तोहफे में. ऐसी ही एक पारंपरिक पहाड़ी डिश है ‘खाजा’. यह सिर्फ एक मिठाई नहीं है, बल्कि मां और बेटी के रिश्ते की मिठास को अपने आप में समेटे हुए एक प्यारा सा अहसास है.
पहाड़ों में खाजा का महत्व
खाजा पहाड़ों की एक बहुत ही सादी लेकिन बेहद खास मिठाई मानी जाती है. यह मां की तरफ से बेटी के लिए अपनेपन से भरा एक अनमोल तोहफा होता है. पुराने समय में जब आवाजाही के साधन कम थे और बेटियां शादी के बाद बहुत कम मायके आ पाती थीं, तब मां हर बार उनके लिए खाजा जरूर बनाती थी. जब बेटी ससुराल के लिए निकलती, तो उसके सामान में मां का बनाया हुआ खाजा खासतौर पर रखा जाता था. इसके पीछे यह गहरी सोच थी कि जब भी बेटी इसे खाएगी, उसे अपनी मां की याद, घर की खुशबू और मायके के अपनेपन का अहसास हमेशा बना रहेगा.
कैसे बनाया जाता है यह पहाड़ी खाजा
खाजा को बनाने की विधि बहुत आसान है और इसके लिए बहुत ज्यादा सामान की जरूरत नहीं पड़ती. इसे बनाने की शुरुआत चावल भिगोने से होती है. सबसे पहले आधा कप चावल लेकर उसे गुनगुने पानी में करीब आधे घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है ताकि चावल अच्छी तरह नरम हो जाएं. इसके बाद चावल का सारा पानी निथार लिया जाता है और एक कड़ाही में थोड़ा सा घी डालकर उसे गर्म किया जाता है.
जैसे ही घी की खुशबू पूरे घर में फैलने लगती है, उसमें भिगोए हुए चावल डालकर हल्का-हल्का भूना जाता है. जब चावल घी के साथ अच्छी तरह मिल जाते हैं, तब इसमें स्वादानुसार चीनी मिला दी जाती है. चीनी डालने के बाद इसे एक मिनट तक अच्छे से चलाया जाता है ताकि मिठास हर तरफ बराबर फैल जाए. अंत में गैस बंद करके कड़ाही को ढक्कन से ढक दिया जाता है और करीब दस मिनट के लिए उसे भाप में छोड़ देते हैं. बस, इतने कम समय में गरमागरम खाजा तैयार हो जाता है.
सिर्फ एक पकवान नहीं, पहाड़ों की परंपरा है खाजा
करीब दस मिनट बाद जब ढक्कन हटाया जाता है, तो जो खुशबू आती है वह सीधे बचपन की यादों में ले जाती है. खाजा का स्वाद भले ही बहुत सादा हो, लेकिन इसमें मां का निस्वार्थ प्यार और बेटी के प्रति उसकी फिक्र घुली होती है. आज के दौर में भले ही बाजार की मंहगी मिठाइयों ने जगह ले ली हो, लेकिन पहाड़ों में आज भी खाजा का महत्व कम नहीं हुआ है. यह आज भी बेटी के लिए मां की ममता और अपनेपन का एक ऐसा प्यारा संदेश है, जो हर निवाले के साथ सीधे दिल की गहराइयों तक पहुंचता है.
About the Author
सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें