Jaya Ekadashi 2026 Puja Vidhi samagri muhurat mantra aarti ravi yog parana samay | रवि योग में जया एकादशी आज, भूत, पिशाच योनि से मुक्ति का दिन, जानें पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, आरती, पारण समय
जया एकादशी मुहूर्त
- माघ शुक्ल एकादशी तिथि की शुरुआत: 28 जनवरी, शाम 4:35 बजे से
- माघ शुक्ल एकादशी तिथि की समाप्ति: 29 जनवरी, दोपहर 1:55 बजे पर
- जया एकादशी पूजा मुहूर्त: सुबह 07:11 बजे से सुबह 08:32 बजे तक
- रवि योग: सुबह में 07:11 ए एम से 07:31 ए एम तक
- ब्रह्म मुहूर्त: 05:25 ए एम से 06:18 ए एम तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 पी एम से 12:56 पी एम तक
- जया एकादशी पारण: कल, सुबह 7:10 बजे से सुबह 9:20 बजे तक
- द्वादशी तिथि का समापन: कल, 11:09 एएम परयह भी पढ़ें: Jaya Ekadashi 2026 Katha: रवि योग में जया एकादशी, विष्णु पूजा में पढ़ें यह व्रत कथा, भूत-पिशाच योनि से मिलेगी मुक्ति!
जया एकादशी पूजा मंत्र
- ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम:
- मंगलम् भगवान विष्णुः, मंगलम् गरुणध्वजः।
मंगलम् पुण्डरी काक्षः, मंगलाय तनो हरिः॥ - ओम नमोः नारायणाय॥
जया एकादशी व्रत और पूजा विधि
आज प्रात:काल में स्नान करके साफ कपड़े पहन लें. उसके बाद हाथ में जल लेकर जया एकादशी व्रत और विष्णु पूजा का संकल्प लें. फिर सूर्य देव को जल अर्पित करें. उसके बाद जया एकादशी की पूजा सामग्री एकत्र कर लें.
अब शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की स्थापना करें. पंचामृत से उनको स्नान कराएं. फिर वस्त्र, फूल, माला, चंदन से उनको सुशोभित करें. इसके बाद अक्षत्, पीले फूल, माला, हल्दी, चंदन, धूप, दीप, तुलसी के पत्ते, फल आदि अर्पित करके पूजन करें.
इसके बाद विष्णु चालीसा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. जया एकादशी व्रत कथा सुनें. फिर घी का दीपक जलाएं या कपूर से विष्णु जी की आरती करें. पूजा के अंत में क्षमा प्रार्थना करें.
अब दिनभर फलाहार पर रहें. रात्रि के समय जागरण करें. अगले दिन यानि कल सुबह में स्नान आदि करके पूजा, दान करें. फिर पारण करके व्रत को पूरा करें. विष्णु कृपा से आपके कष्ट मिटेंगे और मोक्ष की प्राप्ति होगी.
विष्णु जी की आरती
ओम जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ओम जय जगदीश हरे…
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ओम जय जगदीश हरे…
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
ओम जय जगदीश हरे…
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ओम जय जगदीश हरे…
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ओम जय जगदीश हरे…
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ओम जय जगदीश हरे…
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ओम जय जगदीश हरे…
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ओम जय जगदीश हरे…
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख-संपत्ति पावे॥
ओम जय जगदीश हरे…