BJP strategy West Bengal Assembly Election: ‘बंगाली अस्मिता’ का जवाब ‘खोए गौरव’ से: नितिन नवीन ने तय किया बंगाल चुनाव का वॉर रूम ब्लूप्रिंट

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कोमोल‍िका सेनगुप्‍ता
दुर्गापुर: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है. पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी पहली ही संगठनात्मक बैठक में साफ कर दिया है कि इस बार लड़ाई सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक भी होगी. दुर्गापुर के आईटीसी फॉर्च्यून होटल में हुई कोर कमेटी की बैठक में नवीन ने तृणमूल कांग्रेस की ‘बंगाली अस्मिता’ की काट के लिए ‘बंगाल का खोया गौरव’ वापस लाने का नरेटिव सेट किया है. सूत्रों के मुताबिक, बंद कमरे में हुई इस बैठक में नितिन नवीन ने पार्टी नेताओं को जो ‘टास्क’ दिया है, वह 2021 की हार के ‘पोस्टमॉर्टम’ पर आधारित है.

सबसे बड़ा रणनीतिक बदलाव टीएमसी की कैंपेनिंग स्टाइल को लेकर किया गया है. सूत्रों के अनुसार, नवीन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि टीएमसी की हर चाल का जवाब ‘मैन-टू-मैन मार्किंग’ के जरिए दिया जाएगा. यानी टीएमसी के हर दांव और हर नेता के लिए बीजेपी के पास एक स्पेसिफिक काउंटर-प्लान होगा.

2021 की गलतियों से सबक

2026 का रोडमैप बैठक के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि 2021 की हार की रिपोर्ट अब भी टेबल पर है. उसी के आधार पर 2026 की रणनीति बुनी जा रही है.

लोकल मुद्दों पर फोकस: नितिन नबीन ने जोर दिया कि चुनाव सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दों पर नहीं, बल्कि स्थानीय समस्याओं पर लड़ा जाएगा. विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी.

जिलेवार जिम्मेदारी: बंगाल की विविधता को देखते हुए लीडरशिप की जिम्मेदारी अब ‘सेंट्रलाइज्ड’ नहीं, बल्कि जिला या विधानसभा के हिसाब से तय होगी. हर क्षेत्र की जिम्मेदारी अलग-अलग नेताओं को सौंपी जाएगी.

हर 15 दिन में राष्ट्रीय अध्यक्ष लेंगे हिसाब: संगठन में सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी. तय हुआ है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन खुद हर 15 दिन में संगठनात्मक रिपोर्ट की समीक्षा करेंगे. इसका मतलब है कि दिल्ली सीधे तौर पर बंगाल की हर गतिविधि पर नजर रखेगी.

‘खोया गौरव’ बनाम ‘बंगाली पहचान’
बीजेपी इस बार टीएमसी के ‘बंगाली इनसाइडर बनाम आउटसाइडर’ के कार्ड को ध्वस्त करने की तैयारी में है. नवीन का मंत्र है- पश्चिम बंगाल के उस गौरव को वापस लाना, जो पिछले कुछ दशकों में खो गया है. यह लड़ाई अब ‘अस्मिता’ बनाम ‘गौरव’ की पिच पर लड़ी जाएगी.

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