Bengali chicken curry, शोरशे मुर्गी रेसिपी बंगाल की पारंपरिक सरसों चिकन करी का असली स्वाद.

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आज के दौर में जब फ्यूजन फूड और मॉडर्न किचन का बोलबाला है, तब बंगाल की एक सदियों पुरानी देसी रेसिपी एक बार फिर सुर्खियों में लौट आई है. इसका नाम है शोरशे मुर्गी, यानी सरसों में पका चिकन. यह कोई नई या ट्रेंड से जन्मी डिश नहीं है, बल्कि ग्रामीण बंगाल की पारंपरिक थाली का अहम हिस्सा रही है. समय के साथ यह रेसिपी आधुनिक कुकिंग के शोर में कहीं पीछे छूट गई थी, लेकिन अब लोग फिर से इसके असली स्वाद और सादगी की ओर लौटते नजर आ रहे हैं.

अगर शोरशे मुर्गी को अंग्रेज़ी में समझाया जाए, तो इसे “Chicken in Curried Mustard Sauce” कहा जा सकता है. इस डिश की पहचान और इसकी आत्मा दोनों ही सरसों हैं. इसमें चिकन को गाढ़े सरसों के पेस्ट और शुद्ध सरसों के तेल में पकाया जाता है. यही वजह है कि इसका स्वाद तीखा, खुशबूदार और बेहद अलग होता है, जो इसे आम चिकन करी से बिल्कुल अलग पहचान देता है.

शोरशे मुर्गी को मिट्टी की हांड़ी में पकाया जाता है
गांव की रसोई से निकली यह रेसिपी किसी फाइव स्टार होटल की देन नहीं है. इसका जन्म बंगाल के गांवों में हुआ, जहां सीमित सामग्री में भी स्वाद को सबसे ऊपर रखा जाता था. परंपरागत रूप से शोरशे मुर्गी को मिट्टी की हांड़ी में पकाया जाता है. मिट्टी के बर्तन में पकने से सरसों का तीखापन और उसकी खुशबू और भी गहराई के साथ उभरकर आती है, जो इस करी को खास बनाती है.

ऐसे पकाई जाती है ये चिकन
इस करी में सरसों की तेज और चुभती खुशबू को संतुलित करने के लिए हरी मिर्च की गर्माहट और नारियल के दूध की हल्की मिठास मिलाई जाती है. यही स्वाद का संतुलन शोरशे मुर्गी को भारी मसालों वाली चिकन करी से अलग करता है. इसमें न तो बहुत सारे मसाले होते हैं और न ही लंबी तैयारी की जरूरत पड़ती है.

सरसों के तेल के साथ परोसा जाता है
कम सामग्री और ज्यादा स्वाद ही इस डिश की सबसे बड़ी ताकत है. न घंटों तक भूनने की झंझट, न लंबी सामग्री की लिस्ट. शायद यही वजह है कि यह रेसिपी आज भी बंगाल के ग्रामीण इलाकों में बेहद लोकप्रिय है. आज भी बंगाल के हाईवे किनारे मिलने वाले छोटे ढाबों या “भातेर दुकान” में यह करी आसानी से मिल जाती है. वहां इसे सादे उबले चावल, कच्ची हरी मिर्च और ऊपर से डाले गए थोड़े से सरसों के तेल के साथ परोसा जाता है.

समय के साथ इस रेसिपी में कुछ स्थानीय बदलाव भी देखने को मिले हैं. कहीं इसमें प्याज और टमाटर मिलाए जाते हैं, तो कहीं नारियल के दूध की जगह नारियल पानी का इस्तेमाल होता है. हालांकि इन बदलावों के बावजूद शोरशे मुर्गी की असली पहचान, यानी सरसों का तीखा और गहरा स्वाद, आज भी पूरी तरह बरकरार है.

करीब तीस मिनट में तैयार हो जाती है
हाल के दिनों में शोरशे मुर्गी कई घरों में संडे स्पेशल चिकन करी बनती जा रही है. इसकी वजह साफ है. यह डिश स्वाद में रिच है, बनाने में आसान है और करीब तीस मिनट में तैयार हो जाती है. सबसे खास बात यह है कि तीखी होने के बावजूद इसका स्वाद संतुलित और खुशबूदार रहता है. शायद यही कारण है कि लोग एक बार फिर इस देसी बंगाली रेसिपी को अपनी रसोई में जगह दे रहे हैं.

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