हाथ में कैंची, दिल में बारूद; दर्जी बनकर छिपा था जैश-अलकायदा से जुड़ा फैजान, गुजरात ATS ने किया अरेस्ट
नई दिल्ली. गुजरात के नवसारी से एक ऐसी खबर आई है जिसने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं. क्या आपके पड़ोस में रहने वाला एक साधारण दर्जी देश के खिलाफ बड़ी साजिश रच सकता है? क्या एक 19 साल का लड़का खतरनाक आतंकी संगठनों का प्यादा बन सकता है? गुजरात एटीएस (ATS) ने चारपुल इलाके से एक ऐसे ही संदिग्ध को दबोचा है जिसके इरादे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं बल्कि शांत दिखने वाले शहर के भीतर पल रहे उस खौफनाक नेटवर्क का पर्दाफाश है जो सरहद पार से रिमोट कंट्रोल के जरिए ऑपरेट हो रहा था.
गुजरात एटीएस ने एक खुफिया सूचना के आधार पर नवसारी के झालावाड़ इलाके में छापेमारी कर 19 वर्षीय फैजान शेख को गिरफ्तार किया. फैजान मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रामपुर का रहने वाला है और पिछले कुछ सालों से नवसारी में दर्जी का काम कर रहा था. उसके पास से भारी मात्रा में अवैध हथियार और विस्फोटक बरामद हुए हैं.
वारदात और जांच से जुड़े 5 सवाल
1. आरोपी फैजान शेख की असल पहचान क्या है?
जवाब: फैजान (19) रामपुर, यूपी का निवासी है. वह पिछले 3-4 साल से नवसारी में रहकर एक टेलरिंग शॉप पर काम कर रहा था, ताकि किसी को उस पर शक न हो.
2. वह किन आतंकी संगठनों के संपर्क में था?
जवाब: एटीएस के अनुसार, फैजान जैश-ए-मोहम्मद और अल-कायदा जैसी खतरनाक तंजीमों की विचारधारा से प्रभावित था और उनके हैंडलर्स के संपर्क में था.
3. उसके पास से क्या-क्या बरामद हुआ है?
जवाब: छापेमारी के दौरान एटीएस ने फैजान के पास से अवैध हथियार, कारतूस और विस्फोटक सामग्री जब्त की है, जिसे वह किसी बड़ी वारदात के लिए इस्तेमाल करने वाला था.
4. फैजान कट्टरपंथ की राह पर कैसे चला?
जवाब: शुरुआती जांच में पता चला है कि फैजान सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए रेडिकलाइज हुआ था. वह इंटरनेट पर जिहादी कंटेंट और आतंकी वीडियो देखता था.
5. पुलिस की अगली कार्रवाई क्या है?
जवाब: कोर्ट ने फैजान को 12 दिनों की एटीएस रिमांड पर भेजा है. पुलिस अब उसके हैंडलर्स, स्लीपर सेल्स और हथियारों की सप्लाई चेन का पता लगा रही है.
स्लीपर सेल्स का नया पैटर्न?
फैजान शेख की गिरफ्तारी आतंकवाद के एक बदलते पैटर्न की ओर इशारा करती है. एक दर्जी की आड़ में रहकर हथियार इकट्ठा करना इस बात का सबूत है कि आतंकी संगठन अब लोन वुल्फ अटैक या छोटे मॉड्यूल्स पर फोकस कर रहे हैं. 19 साल की उम्र में इतना बड़ा नेटवर्क तैयार करना और विस्फोटक जमा करना बिना किसी बाहरी मदद के संभव नहीं है. एटीएस अब यह जांच कर रही है कि क्या गुजरात के अन्य शहरों में भी ऐसे ‘स्लीपर सेल्स’ सक्रिय हैं.