How to make corn flour dhokla | method of making dhokla | how to make corn flour dhokla | how is corn flour dhokla made |recipe for making corn flour dhokla | ढोकले बनाने की विधि | मक्के के आटे का ढोकला कैसे बनाते हैं | मक्के के आटे का ढोकला कैसे बनता है
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Corn Flour Dhokla Recipe: भीलवाड़ा और मेवाड़ क्षेत्र में मक्की के आटे के ढोकले पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजन हैं. सर्दियों में यह हर रसोई में आम दिखते हैं. रात के बचे ढोकलों को सुबह हल्के मसालों और सब्जियों के साथ तड़का देकर नया और स्वादिष्ट नाश्ता बनाया जा सकता है. दाल-ढोकले भी इसी शैली में पौष्टिक और आसान बनते हैं, जो पूरे परिवार के लिए भरपेट भोजन और ऊर्जा का स्रोत हैं.

आमतौर पर भीलवाड़ा सहित मेवाड़ क्षेत्र के लगभग हर घर में मक्की के आटे के ढोकले बनाए जाते हैं, जो यहां की पारंपरिक और पौष्टिक भोजन संस्कृति का अहम हिस्सा माने जाते हैं. सर्दियों के मौसम में यह व्यंजन विशेष रूप से हर रसोई में दिखाई देता है. कई बार रात के भोजन के बाद ढोकले बच जाते हैं, जिन्हें लोग अनुपयोगी समझकर फेंक देते हैं, जबकि थोड़ी सी समझदारी से इन्हीं ढोकलों को दोबारा उपयोग में लाकर स्वादिष्ट और उपयोगी नाश्ते के रूप में आसानी से बदला जा सकता है. यह परंपरा मेवाड़ की पहचान को भी दर्शाती है.

आज भी ग्रामीण और शहरी इलाकों में सुबह के समय अक्सर यह समस्या सामने आती है कि जल्दी में नाश्ते के लिए क्या बनाया जाए. ऐसे में रात के बचे ढोकले एक सरल और भरोसेमंद विकल्प बन जाते हैं. इन्हें तैयार करने में ज्यादा समय नहीं लगता और परिवार के सभी सदस्यों को भरपेट भोजन मिल जाता है. यह तरीका रसोई के कामकाज को आसान बनाता है तथा महिलाओं पर काम का दबाव भी कम करता है.

रात के बचे ढोकलों को सुबह छोटे टुकड़ों में काटकर उपयोग में लिया जा सकता है. कड़ाही में थोड़ा तेल गर्म कर उसमें सरसों के दाने, जीरा, हींग और करी पत्ते का तड़का लगाया जाता है. इसके बाद प्याज, हरी मिर्च, टमाटर तथा उपलब्ध मौसमी सब्जियां डालकर अच्छी तरह भून लिया जाता है. अंत में ढोकले मिलाकर हल्के मसालों के साथ चलाने पर उनका स्वाद पूरी तरह बदल जाता है. ऊपर से हरा धनिया डालने पर यह व्यंजन देखने में भी आकर्षक लगता है और खाने में बिल्कुल नया महसूस होता है. घर के सभी लोग इसे पसंद करते हैं.
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मक्की के आटे से दाल-ढोकले बनाने की विधि बेहद सरल है. वहीं ताजा ढोकला बनाने के लिए सबसे पहले एक कप मूंग या अरहर दाल को 2 घंटे भिगोकर उबाल लें. फिर दो कप मक्की के आटे में हल्दी, नमक, अजवाइन और थोड़ा सा अदरक-लहसुन पेस्ट डालकर गुनगुने पानी से सख्त आटा गूंथ लें. अब इस आटे की छोटी-छोटी गोलियां या रोल बनाकर उबलते पानी में 10-15 मिनट तक पकाएं. फिर उबले हुए ढोकलों को दाल में डालकर धीमी आंच पर कुछ देर पकने दें ताकि दोनों का स्वाद एक-दूसरे में मिल जाए.

अंत में घी, जीरा, हींग, लहसुन और हरी मिर्च का तड़का लगाकर ऊपर से डालें और हरे धनिए से सजाएं. यह पारंपरिक डिश स्वाद में लाजवाब है और शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी देती है. मक्की का आटा फाइबर और आयरन से भरपूर होता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, जबकि मूंग दाल प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो मांसपेशियों को ऊर्जा देती है. ठंड के मौसम में दाल-ढोकले शरीर को गर्म रखते हैं और लंबे समय तक भूख भी नहीं लगने देते. इसे गर्मागर्म हरी चटनी या लहसुन की चटनी के साथ परोसने पर इसका स्वाद दोगुना हो जाता है.