Operation Brass Tacks | Jammu and Kashmir | Indian Army | Pakistani Army | India-Pakistan war | बदले की आग में जल रहा था पाक, तभी भारतीय सेना ने शुरू किया ‘ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स’, डर से कांपने लगा इस्लामाबाद | Indian Army Operation Brass Tacks exercise strategy psychological warfare Pakistan military tension
India Army & Operation Brass Tacks: वजूद में आने के साथ पाकिस्तान लगातार भारत के खिलाफ लगातार कई बार युद्ध की साजिश रच अपने मंसूबों को पूरा करना चाहा. लेकिन पाकिस्तान को एक भी मौका ऐसा नहीं मिला, जब युद्ध की उसकी साजिश अंजाम तक पहुंच पाई हो. 40 साल पुरानी एक ऐसी ही कहानी है, जो शायद अभी तक आपके लिए अभी तक अनसुनी हो. दरअसल, यह कहानी भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स’ से जुड़ी हुई है, जिसकी भनक लगने के बाद पाकिस्तान की हालत ऐसी हो गई थी कि वह डर के मारे कांपने लग गया था. ब्रासस्टैक्स भारतीय सेना का ऐसा ऑपरेशन था, जिसे आज तक साइकोलॉजिकल वॉर का मास्टर माना जाता है.
दरअसल, 1947 में मिली आजादी के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच सही मायने में तीन नहीं चार युद्ध हो चुके थे. पहला 1948 में, दूसरा 1965 में, तीसरा 1971 में और चौथा 1984 में सियाचिन ग्लेशियर पर. 1971 की जंग में पाकिस्तान का पूर्वी हिस्सा बांग्लादेश बन गया, जिससे इस्लामाबाद की फौज बदले की आग में जल रही थी. उसके बाद, जम्मे और कश्मीर की लाइन ऑफ कंट्रोल पर छिटपुट गोलीबारी आम हो गई थी और पाकिस्तान अपनी आईएसआई के जरिए कश्मीर में विद्रोह भड़काने की तैयारी कर रहा था. ऐसे में भारतीय थलसेना ने ‘ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स’ की योजना बनाई. यह नाम आया ब्रिटिश जनरल सर फिलिप चेस्टर वॉट से, जिन्होंने 1920 में अफगानिस्तान में ‘ब्रास्टैक्स’ का इस्तेमाल तोपखाने के लिए किया था.
4 लाख जवानों के साथ शुरू हुआ ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स
ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स एक मिलिट्री एक्सरसाइज थी, जिसे जनवरी 1986 में राजस्थान के पश्चिमी रेगिस्तान में शुरू किया गया था. ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स के साइज की बात करें तो उस दौर में यह सबकॉन्टिनेंट की सबसे बड़ी मिलिट्री एक्सरसाइज थी. इस एक्सरसाइज में लगभग 4 लाख जवान, 4,000 टैंक, 300 फाइटर एयरक्राफ्ट, ब्रह्मोस जैसी प्रोटोटाइप मिसाइल और 400 आर्टिलरी रेजिमेंट्स शामिल हुईं थी. इस एक्सरसाइज में शामिल होने वाले फाइटर एयरक्राफ्ट में मिग-21 और सुखाई-7 भी शामिल थे. भारतीय सेना के तत्कालीन चीफ जनरल कृष्णा एस ब्रार के नेतृत्व में यह एक्सरसाइज 29 जनवरी से 4 फरवरी तक चला था, जिसका मकसद अपनी सैन्य मशीनरी की टेस्टिंग करना था.
ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स के लिए समय गणतंत्र दिवस परेड के ठीक बाद का चुना गया. भारतीय एयर फोर्स ने ‘फोक ट्रॉट’ ऑपरेशन चलाया, जिसमें फाइटर जेट्स ने एलओसी के पास लो-लेवल फ्लाइंग की. नेवी ने भी अरब सागर में अपनी मूवमेंट शुरू कर दी. सब कुछ इतना बड़ा था कि अमेरिकी सैटेलाइट्स ने भी इसे कैप्चर कर लिया था.
ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स ने खिसकाई पाकिस्तान के पैरों तले जमीन
- ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स की भनक लगते ही इस्लामाबाद में खलबली मच गई. पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ने रिपोर्ट्स भेजीं कि भारत ‘ऑपरेशन टॉपैक’ चला रहा है.
- इंटेलिजेंस एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में इस्लामाबाद को बताया कि राजस्थान से भारतीय सेना सैनिकों को सिंधु नदी पार कराकर लाहौर पर हमला करने वाली है.
- पाकिस्तान के तत्कालीन आर्मी चीफ जनरल मुहम्मद अजीज खान ने प्रधानमंत्री मुहम्मद खान जुनेजो को अलर्ट किया. पूरा पाकिस्तान हाई अलर्ट पर आ गया.
- पाकिस्तानी मीडिया ने उस वक्त हेडलाइंस चलाईं कि ‘भारत की आक्रामक तैयारी!’. इस्लामाबाद ने अपनी फौज को मोबिलाइज किया और 50,000 सैनिक एलओसी पर भेज दिए.
- टैंक डिवीजंस सिंध और पंजाब में तैनात कर दिए गए. अमेरिका और ब्रिटेन से मदद मांगी गई. पूर्व अमेरिकी राजदूत रॉबर्ट मैकफारले ने बाद में बताया कि पाकिस्तान को लगा कि भारत हमला करने वाला है.
- आईएसआई के तत्कालीन अफसर जनरल असीम मुनीर जैसे लोग इसे भारतीय आक्रमण की शुरुआत मान रहे थे.
इस ऑपरेश को लेकर आपके जहन में उठ रहे सवालों के जवाब
पाकिस्तान को ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स से इतना डर क्यों लगा था?
ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स का पैमाना बेहद विशाल और अभूतपूर्व था, जिसने पाकिस्तान को असली युद्ध की आशंका में डाल दिया. उस समय भारतीय सेना की संख्या लगभग 12 लाख थी, जो पाकिस्तान की करीब 5 लाख की सेना से दोगुनी थी. भारत ने 1962 के चीन युद्ध के बाद अपनी सेना को दो-मोर्चा युद्ध के लिए मजबूत किया था. एक्सरसाइज के दौरान भारतीय टैंकों की “रनिंग फायर” जैसी गतिविधियां असली हमले जैसी लग रही थीं. दोनों देशों की सेनाएं ब्रिटिश इंडियन आर्मी की परंपरा से निकली थीं, इसलिए वे एक-दूसरे की रणनीति समझती थीं. यही बात डर को और गहरा कर रही थी.
ब्रासस्टैक्स को साइकोलॉजिकल वॉर का क्लासिक उदाहरण क्यों कहा जाता है?
ब्रासस्टैक्स सिर्फ एक सैन्य अभ्यास नहीं था, बल्कि साइकोलॉजिकल दबाव बनाने की रणनीति भी थी. भारतीय सेना ने यह अभ्यास पाकिस्तान सीमा के पास किया, जिससे संदेश साफ था कि अपनी ताकत से दुश्मन को सोचने पर मजबूर कर दो. रडार सिग्नल जाम करना, नकली रेडियो संदेश भेजना और हवाई गतिविधियों से भ्रम पैदा करना, सब साइकोलॉजिकल वॉर का हिस्सा था. पाकिस्तानी पायलट्स ने भारतीय जेट्स का पीछा किया, लेकिन उन्हें भ्रमित किया गया. इसका सीधा मकसद डिटरेंस था, यानी बिना युद्ध के दुश्मन को रोकना.
भारत और पाकिस्तान की राजनीतिक प्रतिक्रिया क्या रही?
भारत ने ब्रासस्टैक्स को ‘पीस टाइम मोबिलाइजेशन’ यानी शांति काल का सैन्य अभ्यास बताया था. जनरल सुंदरजी और अन्य सैन्य अधिकारियों के अनुसार यह तैयारी का हिस्सा था. जनरल ब्रार ने अपनी किताब में लिखा कि उद्देश्य पाकिस्तान को ताकत दिखाकर कश्मीर में हस्तक्षेप से रोकना था. वहीं पाकिस्तान ने इसे आक्रामक कदम मानते हुए संयुक्त राष्ट्र में शिकायत की. उस समय के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने साफ कहा था कि यह भारत की संप्रभुता का मामला है और अपनी जमीन पर अभ्यास करने का अधिकार भारत को है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटनाक्रम को कैसे देखा गया?
अंतरराष्ट्रीय समुदाय खासकर अमेरिका इस स्थिति से चिंतित हो गया था, क्योंकि दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ रहा था. रोनाल्ड रीगन प्रशासन ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की. अमेरिका ने सैटेलाइट तस्वीरें साझा कर संकेत दिया कि यह वास्तव में सैन्य अभ्यास था, न कि तत्काल हमला था. फिर भी पाकिस्तान को गहरा झटका लगा. विश्लेषकों के अनुसार, इसके बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कश्मीर में गतिविधियां बढ़ाईं, जिससे 1989 में उग्रवाद भड़क उठा.
ब्रासस्टैक्स का भारत की भविष्य के सैन्य ऑपरेशन पर क्या प्रभाव पड़ा?
ब्रासस्टैक्स ने भारतीय सेना का आत्मविश्वास बढ़ाया. इतने बड़े स्तर पर मोबिलाइजेशन और लॉजिस्टिक्स संभालना एक बड़ी उपलब्धि थी. इससे भारत ने सीखा कि बड़े पैमाने की सैन्य तैयारी कैसे की जाती है. 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान यह आत्मविश्वास और तैयारी नजर आई. सेना ने कठिन परिस्थितियों में भी समन्वय और तेज कार्रवाई दिखाई. ब्रासस्टैक्स ने यह साबित किया कि मजबूत तैयारी, मनोबल और रणनीतिक सोच युद्ध से पहले ही बढ़त दिला सकती है.