CJI Suryakant News| CJI Suryakant Latest News| BCI Letter CJI Suryakant| ‘खामोशी को कमजोरी न समझें’, केरल HC पर भड़का BCI, CJI सूर्यकांत को लिखी चिट्ठी
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Bar Council of India ने केरल हाईकोर्ट के जज की टिप्पणियों पर नाराजगी जताया है. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखकर चेतावनी दी और चुनावी विवाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला दिया है.
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सीजेआई सूर्यकांत को लिखी चिट्ठी.CJI Suryakant News: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) सोमवार को केरल हाईकोर्ट के जज के खिलाफ पर भड़क उठा. वकीलों की शीर्ष संस्था ने नाराजगी जताते हुए सीधे देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत को चिट्ठी लिख दी है. 26 जनवरी को भेजे गए इस पत्र में BCI ने न केवल जज की टिप्पणियों को बुनियादहीन और लापरवाह बताया है, बल्कि दबे शब्दों में चेतावनी भी दे दी है. इसमें उन्होंने कहा कि हमारी शराफत और संयम को उसकी कमजोरी समझने की भूल न की जाए.
दरअसल, विवाद केरल हाईकोर्ट में दायर एक याचिका को लेकर है. इसमें स्टेट बार काउंसिल के चुनाव के लिए तय की गई नामांकन फीस (Nomination Fee) को चुनौती दी गई थी. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के सिंगल जज ने कुछ मौखिक टिप्पणियां की थीं, जो बार काउंसिल ऑफ इंडिया को उचित नहीं लगीं. बार काउंसिल ऑफ इंडिया का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट आदेश दे रखा है कि कोई भी हाईकोर्ट या निचली अदालत बार काउंसिल चुनाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करेगी, क्योंकि यह चुनाव सीधे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रहे हैं. इसके बावजूद केरल हाईकोर्ट का दखल देना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है.
जज की टिप्पणियां गैर-जिम्मेदाराना
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपने पत्र में बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है. काउंसिल ने कहा कि जज द्वारा की गई मौखिक टिप्पणियां आधारहीन हैं. इससे संस्थान की छवि खराब होती है. बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सीजेआई सूर्यकांत को लिखे लेटर बताया कि वे न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के लिए अक्सर न्यायिक खामियों पर भी चुप रहते हैं. इस चुप्पी को उनकी सहमति या कमजोरी नहीं माना जाना चाहिए. इस तरह की टिप्पणियां बार और बेंच के बीच के संवैधानिक संतुलन को बिगाड़ सकती हैं.
पैसे के हिसाब-किताब पर सफाई
जज की टिप्पणी संभवतः चुनाव में लगने वाले पैसों को लेकर थी. इस पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने स्थिति साफ की है-
- नामांकन फीस: बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने बताया कि चुनाव के लिए जो 1.25 लाख रुपये की नामांकन फीस ली जाती है, वह पूरा पैसा स्टेट बार काउंसिल के पास रहता है, बार काउंसिल ऑफ इंडिया उसमें से एक भी पैसा नहीं लेती.
- 20 करोड़ का खर्चा: बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने खुलासा किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार चुनाव कराने के लिए ‘हाई-पावर कमेटियों’ का गठन किया गया है, जिसमें हाईकोर्ट के पूर्व जज शामिल हैं. इनके आने-जाने, रहने और मानदेय पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया अपनी जेब से करीब 20 करोड़ रुपये खर्च कर रही है. इसके लिए उन्हें सरकार से कोई मदद नहीं मिलती.
सीजेआई से हस्तक्षेप की मांग और चेतावनी
पत्र के अंत में बार काउंसिल ऑफ इंडिया चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने सीजेआई से अनुरोध किया है कि वे इस मामले में दखल दें और यह सुनिश्चित करें कि चुनावी विवाद केवल सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए तंत्र के जरिए ही सुलझाए जाएं. साथ ही, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने चेतावनी दी है कि अगर वकीलों की चुनी हुई संस्थाओं पर ऐसे लापरवाह हमले जारी रहे, तो उनके पास सामूहिक विरोध प्रदर्शन (Protest) और कानूनी रास्ता अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें