वंदे मातरम 150 वर्ष: बॉलीवुड में बदलाव, PM मोदी का समारोह
नई दिल्ली. समय के साथ ‘वंदे मातरम’ का स्वरूप भी बदला. इस राष्ट्रीय गीत की धुन बॉलीवुड में कई बार गूंजी है. क्लासिकल म्यूजिक से लेकर मॉडर्न फ्यूजन तक, इसे अलग-अलग दौर के कलाकारों ने अपनी आवाज दी. लता मंगेशकर से लेकर ए.आर. रहमान, विशाल-शेखर और शंकर महादेवन तक, हर वर्जन ने इसे अपनी पीढ़ी का राष्ट्रगीत बना दिया.
भारतीय सिनेमा में ‘वंदे मातरम’ की पहली गूंज 1952 में आई फिल्म ‘आनंद मठ’ में सुनाई दी. लता मंगेशकर की आवाज और हेमंत कुमार के संगीत से सजा यह गीत आज भी सबसे प्रतिष्ठित वर्जन माना जाता है. फिल्म में यह गीत आजादी की लड़ाई और बलिदान की भावना को जीवंत करता है.
एआर रहमान ने अमर कर दिया गीत
इसके बाद 1997 में ए.आर. रहमान ने ‘वंदे मातरम (मां तुझे सलाम)’ के रूप में इसे बिल्कुल नए अंदाज में पेश किया. यह एक नॉन-फिल्म इंडिपेंडेंट एल्बम था, जिसे भारत बाला और मेहबूब ने निर्देशित किया. रॉक, क्लासिकल और मॉडर्न फ्यूजन के साथ यह ट्रैक युवाओं में देशभक्ति का नया उत्साह लेकर आया.
साल 2001 की सुपरहिट फिल्म ‘कभी खुशी कभी गम’ में भी ‘वंदे मातरम’ की झलक देखने को मिली. उषा उत्थुप और कविता कृष्णमूर्ति द्वारा गाया गया यह गीत फिल्म के अंत में आता है और परिवार व राष्ट्रप्रेम के भाव को एक साथ जोड़ता है.
डांस और देशभक्ति का संगम 2015 की फिल्म ‘एबीसीडी 2’ में देखने को मिला, जहां सचिन-जिगर ने इसे एनर्जेटिक बीट्स के साथ पेश किया. यह संस्करण खासतौर पर युवा दर्शकों को प्रेरित करने वाला रहा.
‘वंदे मातरम’ को मिला मॉडर्न ट्विस्ट
हाल के वर्षों में भी यह गीत लगातार नई पहचान बना रहा है. 2022 की फिल्म ‘कोड नेम: तिरंगा’ में शंकर महादेवन की आवाज ने इसे गंभीर और भावनात्मक रूप दिया. वहीं 2024 में आई ‘फाइटर’ में विशाल-शेखर का ‘वंदे मातरम – द फाइटर एंथम’ जबरदस्त लोकप्रिय हुआ. उसी साल ‘ऑपरेशन वेलेंटाइन’ में भी इसका आधुनिक एंथम स्टाइल संस्करण सुनने को मिला, जिसने फिल्म के क्लाइमैक्स को और प्रभावशाली बनाया.
इसके अलावा, 2021 में टाइगर श्रॉफ ने ‘वंदे मातरम’ का इंडिपेंडेंट वर्जन रिलीज किया, जो उनका हिंदी सिंगिंग डेब्यू भी था. विशाल मिश्रा के संगीत से सजा यह गाना युवा जोश से भरपूर रहा.
‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी, जो 7 नवंबर 1875 को ‘बंगदर्शन’ पत्रिका में प्रकाशित हुई और बाद में उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा बनी. मातृभूमि को देवी के रूप में पूजने वाला यह गीत 2025 में अपने 150 वर्ष पूरे कर चुका है. इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम से एक वर्ष तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी समारोह की शुरुआत की, जो 7 नवंबर 2026 तक चलेगा.